India Healthcare Crisis
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दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था, लेकिन अस्पतालों में 20 लाख बेड की कमी, भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र की हकीकत

भारत के हेल्थकेयर सेक्टर की हकीकत ये है कि गांवों में इलाज का संकट है तो इसका दबाव शहरों पर पड़ रहा है. 140 करोड़ आबादी वाले भारत में 20 लाख अस्पताल बेड की कमी है.


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140 करोड़ से ज्यादा की आबादी, दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था वाले देश के हेल्थकेयर सेक्टर का ये हाल है कि भारत ( India) अपने अस्पतालों में 20 लाख बेड्स ( Hospital Beds ) की कमी से जूझ रहा है. दुनिया की 18 फीसदी आबादी भारत में रहती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के तय मानक के मुताबिक प्रति 10,000 की आबादी पर 30 अस्पताल बेड्स होना चाहिए. लेकिन भारत में हर 10,000 की आबादी पर केवल 16 ही बिस्तर अस्पतालों में उपलब्ध हैं.

स्वास्थ्य सेक्टर में गांवों की अनदेखी

रेटिंग एजेंसी केयरऐज (CareEdge Ratings) ने एक रिपोर्ट जारी किया है जिसमें उसने हेल्थकेयर सेक्टर ( Healthcare Sector) में अवसर का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट में अस्पतालों में बेड्स की कमी को लेकर शहरों और गावों के असंतुलन का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक देश की 65 फीसदी आबादी गांवों और छोटे शहरी इलाकों में रहती है लेकिन कुल बेड्स का 30-35 फीसदी ही बेड्स ही गांवों और छोटे शहरों के अस्पतालों में उपलब्ध है. जाहिर है ऐसे में लोगों को इलाज के लिए शहरों और महानगरों का रूख करना पड़ता है.

40% आबादी के पास है स्वास्थ्य बीमा कवरेज

रिपोर्ट के मुताबिक, देश की 40 फीसदी आबादी के पास स्वास्थ्य बीमा कवरेज उपलब्ध है. साल 2014 में कुल 20 करोड़ लोगों के ही पास स्वास्थ्य बीमा कवरेज (Health Insurance Coverage) उपलब्ध था जो 2025 में 55 करोड़ तक जा पहुंचा है. इसमें आयुष्मान भारत योजना का बड़ा योगदान है जिसमें केंद्र सरकार 5 लाख रुपये तक बीमा कवरेज दे रही है. केयरऐज के मुताबिक, वित्त वर्ष 2030 तक देश की 47-50 फीसदी आबादी तक बीमा कवरेज पहुंचने की उम्मीद है. जिसके बाद अस्पताल में भर्ती होने के लिए ज्यादा मरीज पहुंचेंगे तो जाहिर है ऐसे में अस्पतालों में ज्यादा बिस्तरों की भी दरकार होगी.

बुजुर्ग आबादी में क्रॉनिक बीमारियों बढ़ा रही संकट

केयरऐज ने कहा, बुजुर्ग आबादी में बढ़ोतरी से क्रॉनिक बीमारियों और स्पेशलाइज्ड इलाज की मांग लगातार बढ़ती जा रही है. तो मेडिकल टूरिज्म भी लगातार भारत में बढ़ रहा है. 2024 में 7 लाख से ज्यादा विदेशी मरीज इलाज के लिए भारत आए, जिनमें से 85–90% अफ्रीका, पश्चिम एशिया और दक्षिण एशियाई देशों से थे. भारत में इलाज की लागत दूसरे देशों के मुकाबले 60–90% तक सस्ती है.

स्वास्थ्य सेक्टर में सरकार खर्च है नाकाफी

भारत में हेल्थकेयर सेक्टर पर खर्च बढ़ा है लेकिन अभी भी ये 4 फीसदी से कम है जो कि 2022 में केवल 3.3 फीसदी था. साल 2030 कर सरकार ने जीडीपी का 5 फीसदी हेल्थकेयर पर खर्च करने का लक्ष्य रखा है. हालांकि हेल्थकेयर सेक्टर पर सरकार जीडीपी का केवल 1.9 फीसदी खर्च करती है. नेशनल हेल्थ पॉलिसी के तहत 2025 तक सरकार ने 2.5 फीसदी खर्च करने का लक्ष्य रखा था. अस्पतालों में बेड्स की कमी और गांवों - शहरों में असंतुलन को दूर करने में प्राइवेट सेक्टर की भूमिका अहम हो जाती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में निजी अस्पताल चेन इस बढ़ती मांग का सबसे ज्यादा लाभ उठा सकते हैं. FY25 में स्टॉक मार्केट में लिस्टेड अस्पताल समूहों ने करीब 3,200–3,300 नए बेड जोड़े हैं. अगले तीन वर्षों में लगभग 15,000 बेड जोड़ने की योजना है. केयरएज रेटिंग्स के मुताबिक, भारत का अस्पताल क्षेत्र अगले 3 से 5 वर्षों में 11–12 फीसदी सालाना ग्रोथ दिखा सकता है. इस तेज ग्रोथ में देश में अस्पताल बेड की भारी कमी, स्वास्थ्य बीमा कवरेज में बढ़ोतरी, मेडिकल टूरिज्म और अस्पताल इंफ्रास्ट्रक्चर में नया निवेश योगदान देंगे.

निजी सेक्टर के लिए अवसर

केयरएज रेटिंग्स की निदेशक रवलीन सेठी के मुताबिक, “भारत में अस्पताल बेड की दो मिलियन की कमी कोई अस्थायी समस्या नहीं, बल्कि लंबी अवधि के लिए बड़ा अवसर है. बीमा कवरेज, मेडिकल टूरिज्म और टियर-2 व टियर-3 शहरों में विस्तार से नई क्षमता आसानी से खप जाएगी.” नया निवेश अभी भी मेट्रो शहरों में ज्यादा है, लेकिन अस्पताल समूह अब टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं. साथ ही, डिजिटल हेल्थ और AI आधारित डायग्नोस्टिक्स से इलाज की पहुंच और बेहतर होने की उम्मीद है.

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