Crude Oil From Russia Again : मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के लगभग बंद होने से भारत के सामने गहरा ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। इस आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए फिर से रूसी कच्चे तेल की ओर रुख किया है।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी व्यापार शुल्कों (Trade Tariffs) और प्रतिबंधों के जोखिम के बावजूद, कम से कम तीन बड़े टैंकर रूसी तेल लेकर भारतीय बंदरगाहों की ओर मुड़ गए हैं। इन जहाजों में लगभग 1.4 मिलियन (14 लाख) बैरल रूसी 'यूराल' तेल लदा है, जो पहले पूर्वी एशिया की ओर जा रहे थे।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 88 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा होर्मुज के रास्ते आता है। वर्तमान में ईरान और इजरायल के बीच जारी जंग ने इस रास्ते को असुरक्षित बना दिया है, जिससे वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। अपनी राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, नई दिल्ली ने पश्चिमी दबाव के बावजूद मॉस्को के साथ अपने तेल व्यापार को फिर से गति देने का साहस दिखाया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और भारत की मजबूरी
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग ब्लॉक कर दिए जाने से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी (LNG) परिवहन ठप होने की कगार पर है। भारत के लिए यह मार्ग जीवन रेखा की तरह है क्योंकि खाड़ी देशों से आने वाला अधिकांश तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग पर असुरक्षा बढ़ने से भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की कमी और कीमतों में भारी बढ़ोतरी का अंदेशा है। ऐसे में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि संकट की इस घड़ी में रूस भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।
प्रतिबंधित जहाजों ने बदला भारत का रास्ता
शिप-ट्रैकिंग डेटा (Kpler और Vortexa) के अनुसार, 'ओडुने' (Odune) और 'मतारी' (Matari) नामक दो टैंकर पहले ही भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर पहुंच चुके हैं। ओडुने 7,30,000 बैरल तेल लेकर ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर खड़ा है, जबकि मतारी गुरुवार को गुजरात के वाडिनार पहुंचने वाला है। इसके अलावा, 'इंद्री' (Indri) नामक एक और जहाज ने सिंगापुर की ओर जाने के बजाय अचानक भारत की ओर रुख किया है। गौरतलब है कि ये तीनों जहाज पिछले साल ब्रिटेन और यूरोपीय संघ द्वारा प्रतिबंधित किए गए थे, लेकिन भारत ने आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इन्हें स्वीकार करने का जोखिम उठाया है।
ट्रम्प की टैरिफ चेतावनी और भारत का रुख
पिछले महीने ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के साथ एक व्यापार समझौता किया था, जिसमें भारत ने रूसी तेल न खरीदने पर सहमति जताई थी। इसके बदले में भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ को वापस लिया गया था। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि अगर भारत ने फिर से रूस से तेल खरीदा, तो यह टैरिफ दोबारा लगा दिया जाएगा। भारत सरकार ने अब यह साफ कर दिया है कि उसकी खरीद का "मार्गदर्शक कारक" केवल राष्ट्रीय हित होगा। ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत कई स्रोतों से तेल खरीदना जारी रखेगा।
रणनीतिक बदलाव और रिफाइनरीज की तैयारी
भारतीय रिफाइनरियों ने अब पश्चिमी कूटनीतिक दबाव के बजाय आपूर्ति सुरक्षा को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ महीनों में भारत ने रूस से दूरी बनाकर मध्य पूर्व से तेल आयात बढ़ाया था, लेकिन युद्ध की अनिश्चितता ने इस रणनीति को पलटने पर मजबूर कर दिया है। ओडिशा और गुजरात के रिफाइनिंग हब में तेल के भंडार को भरने के लिए समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं ताकि देश के भीतर ईंधन की कमी न होने पाए। भारत का यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में उसकी स्वायत्तता को भी दर्शाता है।