
करदाताओं को राहत या सिर्फ री-पैकेजिंग? आयकर कानून 2025 पर सवाल
आयकर अधिनियम 2025 को बड़े सुधार के रूप में पेश किया गया है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक यह पुराने कानून का ही सरल और पुनर्गठित रूप है।
Income Tax Act 2025: असल में यह वही प्रावधान हैं, वही कानून है बस इसे नए और सरल रूप में पेश किया गया है। कर विशेषज्ञ आशीष मेहता कहते हैं। वे इस दावे को खारिज करते हैं कि नया आयकर कानून कोई बड़ा या क्रांतिकारी बदलाव लेकर आया है।
केंद्रीय बजट 2026 के जरिए आयकर अधिनियम, 2025 का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही भारत 65 साल पुराने आयकर कानून को बदलने जा रहा है। नए कानून में एकल टैक्स वर्ष प्रणाली, सरल भाषा और बायबैक व अनुपालन से जुड़े नए नियम शामिल हैं। द फेडरल ने खैतान एंड कंपनी के पार्टनर आशीष मेहता से बातचीत कर यह समझने की कोशिश की कि आम करदाताओं, निवेशकों और पेशेवरों के लिए वास्तव में क्या बदलेगा और क्या पहले जैसा ही रहेगा।
65 साल पुराने कानून की सबसे बड़ी दिक्कत क्या दूर हुई?
भारत में हम छह दशकों से अधिक समय से 1961 के आयकर अधिनियम के साथ जी रहे हैं। रोजमर्रा के अनुपालन के स्तर पर नया कानून आम नागरिक के लिए सबसे बड़ी कौन-सी समस्या दूर करता है?आशीष मेहता के मुताबिक, “जैसा कि लोग इसे दिखा रहे हैं, यह कोई नया कानून नहीं है। पहले जो प्रावधान थे, वही अब एक नए कानून में समाहित कर दिए गए हैं। सरकार ने असल में क्रॉस-रेफरेंसिंग को काफी हद तक खत्म किया है।
पहले करदाताओं को एक धारा पढ़ने के बाद संशोधन के लिए दूसरी धारा और फिर किसी अन्य प्रावधान का सहारा लेना पड़ता था। अब संबंधित प्रावधानों को एक ही जगह शामिल कर दिया गया है। भाषा को सरल बनाया गया है और कानून को अधिक यूज़र-फ्रेंडली बनाया गया है।इसका सबसे बड़ा फायदा स्पष्टता और व्याख्या से जुड़ा है। पहले कई मुद्दों पर स्थिति साफ होने में वर्षों की मुकदमेबाजी और अदालती फैसलों का सहारा लेना पड़ता था। अब उस पूरे अनुभव को कानून में समाहित कर दिया गया है। मूल रूप से आम करदाताओं के लिए बहुत कुछ नहीं बदला है। हां, पेशेवरों को चीजें दोबारा सीखनी होंगी, लेकिन करदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं है।
‘पिछला वर्ष’ और ‘आकलन वर्ष’ की उलझन खत्म
भारत में लंबे समय से ‘पिछला वर्ष’ और ‘आकलन वर्ष’ की अवधारणा लोगों के लिए परेशानी का कारण रही है। लोग अक्सर गलत वर्ष के लिए चालान भर देते थे, गलत साल का रिटर्न दाखिल कर देते थे या गलत मद में टैक्स जमा कर देते थे। इन दोनों को मिलाकर एक ‘एकल टैक्स वर्ष’ में बदलना एक प्रगतिशील कदम है। हालांकि, लोगों को इसकी आदत डालने में समय लगेगा क्योंकि वे पूरी जिंदगी पुराने सिस्टम के आदी रहे हैं। उन्हें पुरानी सोच छोड़कर नई प्रणाली अपनानी होगी।
दुनिया के कई देश पहले से ही इसी प्रणाली का पालन करते हैं, जहां आय अर्जित करना, उसका आकलन और कर भुगतान एक ही वर्ष में होता है। शुरुआत में थोड़ी उलझन हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह व्यवस्था ज्यादा सरल और स्पष्ट होगी।
क्या टैक्स भुगतान की प्रक्रिया बदलेगी?
क्या इस बदलाव से एडवांस टैक्स, कैपिटल गेन टैक्स या टीडीएस के भुगतान पर असर पड़ेगा? क्या यह अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के अनुरूप है? आशीष मेहता के अनुसार, “यह वैश्विक मानक है और भारत अब उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। लेकिन अनुपालन के लिहाज से कोई बुनियादी बदलाव नहीं है।”
एडवांस टैक्स पहले की तरह तिमाही आधार पर देना होगा। कैपिटल गेन टैक्स उसी वर्ष लगेगा, जिसमें आय अर्जित की गई हो। टीडीएस के प्रावधान भी अधिकांशतः पहले जैसे ही रहेंगे। हालांकि सरकार ने पुराने कानून में मौजूद कई अलग-अलग टीडीएस दरों को समेटकर अब कम और सरल दरें तय करने की कोशिश की है, जिससे अनुपालन आसान होगा।
संक्रमण काल में गड़बड़ी का खतरा?
क्या पुराने आकलन वर्ष से नए टैक्स वर्ष में जाने के दौरान दोहरी कराधान या रिपोर्टिंग चूक का खतरा है? मेहता कहते हैं, “उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा।” भारत अब एक मजबूत ऑनलाइन टैक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ काम करता है। पूरा सिस्टम आयकर पोर्टल और सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर के जरिए संचालित होता है। यह कोई मैनुअल व्यवस्था नहीं है, जहां अधिकारी की व्याख्या पर सब कुछ निर्भर हो।
31 मार्च 2026 तक रिटर्न पुराने कानून के तहत दाखिल होंगे। 1 अप्रैल 2026 के बाद अर्जित आय नए कानून के तहत आएगी। यह बात वित्त मंत्री ने स्पष्ट कर दी है। हालांकि, अभी नियम (Rules) अधिसूचित होना बाकी हैं, जो कानून का अहम हिस्सा होते हैं। अगले कुछ महीनों में नियम लाए जाएंगे, सार्वजनिक परामर्श होंगे और फॉर्म अंतिम रूप लेंगे। इसके बाद ही पूरा ढांचा स्पष्ट होगा।
बायबैक पर नया नियम: निवेशकों को राहत?
पहले शेयर बायबैक को डिविडेंड की तरह टैक्स किया जाता था, जिससे ऊंचे टैक्स स्लैब वाले निवेशकों को नुकसान होता था। नया कैपिटल गेन मॉडल कैसे मदद करता है? जब किसी कंपनी के पास अतिरिक्त नकदी होती है, तो वह अपने शेयर प्रीमियम पर वापस खरीदती है। पहले अलग-अलग समय पर बायबैक पर अलग-अलग तरीके से टैक्स लगाया गया। एक दौर में टैक्स कंपनी पर लगता था, बाद में इसे निवेशकों के हाथ में डिविडेंड माना गया।
इस व्यवस्था में ऊंचे टैक्स स्लैब वाले निवेशकों को पूरे बायबैक अमाउंट पर 35–36% टैक्स देना पड़ता था, जबकि शेयर खरीदने की लागत घटाने की अनुमति नहीं थी। वह लागत भविष्य में पूंजीगत नुकसान के रूप में अलग से समायोजित होती थी। इससे टैक्स लीकेज होता था। नया सिस्टम बायबैक को फिर से कैपिटल गेन के दायरे में लाता है, यानी अब केवल वास्तविक आय पर टैक्स लगेगा।
प्रमोटर्स पर ज्यादा टैक्स क्यों?
बजट में प्रमोटर्स के लिए ऊंचा बायबैक टैक्स भी लाया गया है। कॉर्पोरेट प्रमोटर्स के लिए लगभग 22% और अन्य के लिए 30%। इसका मकसद साफ है: बायबैक को टैक्स बचाने के रास्ते के रूप में इस्तेमाल करने से रोकना। इससे छोटे निवेशकों और प्रमोटर्स के बीच फर्क किया गया है। इसका असली असर तब दिखेगा, जब प्रमोटर्स इस बदलाव पर प्रतिक्रिया देंगे।
क्या अब बायबैक वाली कंपनियां बेहतर निवेश होंगी?
निवेश का फैसला सिर्फ बायबैक या डिविडेंड के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, जिन निवेशकों के पास पहले से कैपिटल लॉस हैं, उनके लिए भविष्य के बायबैक उन्हें समायोजित करने में मदद कर सकते हैं। यह पूरी तरह निवेशक की आय संरचना और टैक्स स्थिति पर निर्भर करता है।
क्या 10 मिनट में रिटर्न फाइल करना संभव होगा?
वित्त मंत्री ने नए टैक्स फॉर्म की बात की है। क्या अब सैलरीड लोग बिना प्रोफेशनल मदद के 10 मिनट में रिटर्न भर सकेंगे? कुछ मामलों में हां। अगर कोई व्यक्ति नया टैक्स सिस्टम चुनता है, कोई कटौती नहीं लेता, न पूंजीगत लाभ है और न जटिल निवेश तो वह खुद रिटर्न दाखिल कर सकता है। लेकिन जिनके पास कैपिटल गेन, विदेशी संपत्ति, क्रिप्टोकरेंसी या जटिल निवेश हैं, उन्हें अभी भी पेशेवर सलाह की जरूरत पड़ेगी। उद्देश्य स्पष्ट है प्रक्रिया को सरल बनाना। लेकिन पूरी तरह प्रोफेशनल सहायता खत्म होना अभी दूर है।
तो क्या यह पुरानी शराब, नई बोतल है?
आशीष मेहता मानते हैं, “हां, यह कहना गलत नहीं होगा।” मूल ढांचा वही है, बस उसे सरल और व्यवस्थित किया गया है। शुरुआती वर्षों में कुछ भ्रम और ग्रे एरिया रह सकते हैं, लेकिन समय के साथ यह कानून पुराने की तुलना में ज्यादा सहज और स्पष्ट रूप से लागू किया जा सकेगा।

