
भारत ने 8 वर्षों में पहली बार ईरान से खरीदी LPG, US के दबाव में 2019 में बंद कर दी थी खरीदारी
भारत की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने ईरान से एलपीजी खरीदी है. इस गैस को दूसरी सरकारी तेल कंपनियां भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के साथ भी साझा की जाएगी.
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध से पैदा हुए एलपीजी संकट के बीच साल 2018 के बाद 8 वर्षों में पहली बार भारत ने ईरान से एलपीजी (रसोई गैस) की खरीदारी की है. अमेरिका ने ईरान के तेल गैस पर लगे प्रतिबंध में छूट दे दी है जिसके बाद भारत ने ये फैसला लिया है. साल 2019 के बाद अमेरिका के अलावा अन्य पश्चिमी देशों के दबाव में भारत ने ईरान से क्रूड ऑयल और एलपीजी की खरीदारी रोक दी थी.
रॉयटर्स के रिपोर्ट के मुताबिक भारत की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने ईरान से एलपीजी खरीदी है. इस गैस को दूसरी सरकारी तेल कंपनियां भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के साथ भी साझा की जाएगी. बताया जा रहा है कि करीब 43,000 टन ब्यूटेन और प्रोपेन खरीदा गया है. लेकिन ईरान से खरीदा गया ये एलपीजी केवल आधे दिन के खपत की जरूरत को ही पूरा कर पाएगी.
भारत में एलपीजी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर खाना पकाने के लिए होता है. देश अपनी जरूरत का करीब दो-तिहाई गैस आयात करता है, जिसमें से 90% मध्य-पूर्व से आता है. यह सप्लाई मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के जरिए होती है, जो युद्ध के कारण प्रभावित है.
जमीन पर क्या असर दिख रहा है?
कई जगह लोगों को मजबूरी में लकड़ी जलाकर खाना पकाना पड़ रहा है. एलपीजी गैस सिलेंडर लेने के लिए लंबी लाइनें लग रही हैं. कुछ जगहों पर झगड़े भी हो रहे हैं. सरकार ने होटलों और रेस्टोरेंट जैसे कमर्शियल यूजर्स को गैस सप्लाई कम कर दी है और पाइप्ड गैस (PNG) नेटवर्क को तेजी से बढ़ाने की कोशिश कर रही है.
क्यों अहम है यह खरीद?
यह ईरान से भारत की पहली ऊर्जा खरीद है, जब अमेरिका ने हाल ही में कुछ समय के लिए छूट दी है, जिससे भारत जैसे देश ईरान से तेल या गैस खरीद सकते हैं. पहले अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों की वजह से ईरान से खरीद लगभग बंद हो गई थी. डेटा के मुताबिक “Sea Bird” नाम का जहाज यह गैस लेकर आ रहा है और इसके मंगलुरु पोर्ट पहुंचने की उम्मीद है. दिलचस्प बात यह है कि जहाज पहले चीन जाने वाला था, लेकिन बाद में उसका ट्रैक बदल गया और वह भारत की ओर आ गया. भारत में गैस की कमी गंभीर होती जा रही है और ईरान से खरीद अस्थायी राहत दे सकती है. किन यह मात्रा बहुत कम है, इसलिए संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है और आने वाले समय में सप्लाई पर काफी कुछ निर्भर करेगा.

