
रत्न, दवाइयों, मसालों पर जीरो टैरिफ, पीयूष गोयल बोले- किसानों को होगा बड़ा फायदा
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते में रत्न, दवाइयों, स्मार्टफोन समेत कई भारतीय उत्पादों पर जीरो टैरिफ तय हुआ है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि किसानों-निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार (7 फरवरी) को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत भारत में बने कई उत्पादों पर अमेरिका में अब शून्य शुल्क (जीरो टैरिफ) लगेगा। इनमें रत्न-आभूषण, हीरे, दवाइयां और स्मार्टफोन जैसे प्रमुख उत्पाद शामिल हैं।
पीयूष गोयल ने कहा,ऐसे कई उत्पाद हैं जिन पर अब शून्य शुल्क लगेगा, जब हमारे निर्यातक अमेरिका को सामान भेजेंगे। उदाहरण के तौर पर रत्न और हीरे पर अब जीरो ड्यूटी होगी। भारत से बड़ी मात्रा में निर्यात होने वाले फार्मास्यूटिकल उत्पादों पर भी शून्य शुल्क लागू होगा। इसी तरह भारत से बड़ी संख्या में निर्यात होने वाले स्मार्टफोन पर भी पहले की तरह शून्य शुल्क ही रहेगा।”
उन्होंने कहा कि इस तरह भविष्य में कई ऐसे उत्पाद होंगे जिन पर शून्य शुल्क लागू होगा। कृषि क्षेत्र में भी कई उत्पाद ऐसे हैं, जिन्हें भारत से अमेरिका निर्यात किया जाएगा और उन पर पारस्परिक रूप से शून्य अतिरिक्त शुल्क लगेगा। इनमें मसाले, चाय, कॉफी और उनसे बने उत्पाद, नारियल और नारियल तेल, वेजिटेबल वैक्स, सुपारी, ब्राजील नट, काजू और चेस्टनट शामिल हैं। इसके अलावा कई फल और सब्जियां भी इस सूची में हैं।”
कृषि उत्पादों पर कोई रियायत नहीं
पीयूष गोयल ने साफ किया कि जिन क्षेत्रों में भारत आत्मनिर्भर है, वहां किसी तरह की रियायत नहीं दी गई है। कृषि उत्पादों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सोयाबीन, चावल, चीनी, ज्वार, बाजरा, रागी, शहद और मूंगफली जैसे उत्पादों को रियायतों के दायरे से बाहर रखा गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अन्य क्षेत्रों में बाजार पहुंच बढ़ाने के बावजूद भारतीय किसानों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी।
उन्होंने आगे बताया कि भारतीय किसानों द्वारा उगाए गए कई कृषि उत्पाद अमेरिका को शून्य शुल्क पर निर्यात किए जाएंगे, लेकिन अमेरिकी किसानों के कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में लाने के लिए कोई टैरिफ रियायत नहीं दी गई है। वाणिज्य मंत्री ने यह भी साफ किया कि समझौते में आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) खाद्य पदार्थों को भारत में अनुमति नहीं देने का स्पष्ट प्रावधान है।
MSMEs को नहीं होगा नुकसान
पीयूष गोयल ने कहा कि वो पूरी स्पष्टता और बिना किसी संकोच के कह सकते हैं कि भारत के किसान, MSMEs, कारीगर और शिल्पकारों को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा। इसके उलट, अमेरिका के बाजार तक बेहतर पहुंच से भारत को लाभ ही होगा। उन्होंने इस व्यापार समझौते को MSMEs के लिए बड़ा प्रोत्साहन बताया, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा कार्यरत हैं। गोयल ने कहा कि वस्त्र और परिधान, चमड़ा और फुटवियर, खिलौने, तथा रत्न-आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों से अमेरिका को निर्यात में तेजी आने की उम्मीद है। इससे लाखों रोजगार सृजित होंगे और घरेलू विनिर्माण को मजबूती मिलेगी।
कई भारतीय उत्पादों पर शून्य शुल्क
वाणिज्य मंत्री ने समझौते के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी देते हुए कहा कि कई उत्पादों पर शुल्क घटाकर शून्य किया जाएगा। उन्होंने कहा जनरल फार्मास्यूटिकल्स, रत्न और हीरे, तथा विमान के पुर्जों सहित कई उत्पादों पर शुल्क शून्य हो जाएगा, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा और ‘मेक इन इंडिया’ को और मजबूती मिलेगी। विमान के पुर्जों पर सेक्शन 232 के तहत छूट, ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ रेट कोटा और जेनेरिक दवाओं पर बातचीत के जरिए तय नतीजे भारत को ठोस निर्यात लाभ देंगे।
इस सूची में मसाले, चाय, कॉफी, नारियल तेल, काजू, और कई फल-सब्जियां जैसे एवोकाडो, केला, आम, अनानास और मशरूम, साथ ही कुछ बेकरी उत्पाद भी शामिल हैं।
भारत की विकास यात्रा को नई गति
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारत की विकास यात्रा के लिए नए अवसर और आशावाद लेकर आया है। टैरिफ में युक्तिकरण का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पहले 50 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क अब घटकर 18 प्रतिशत रह गया है, जो पड़ोसी देशों की तुलना में कम है और इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा सहारा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत की विकास कहानी में नई उम्मीदें और संभावनाएं लेकर आया है। समझौते के ढांचे की घोषणा को ऐतिहासिक बताते हुए गोयल ने कहा कि यह दिन एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर के रूप में याद रखा जाएगा।
गोयल के अनुसार, फरवरी 2025 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच चल रही बातचीत अब एक बड़े ब्रेकथ्रू तक पहुंची है, जिसे ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज किया जाएगा। दोनों देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान भारतीय निर्यातकों के लिए नई ऊर्जा, उत्साह और संकल्प लेकर आया है।
संयुक्त बयान में भारत और अमेरिका ने घोषणा की कि वे पारस्परिक और परस्पर लाभकारी व्यापार के लिए एक अंतरिम समझौते के ढांचे पर सहमत हो गए हैं। इससे पहले 2 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी होने की घोषणा की गई थी।
ट्रंप प्रशासन ने पहले भारत और चीन सहित कई बड़े निर्यातक देशों पर टैरिफ लगाए थे। फरवरी 2025 में औपचारिक रूप से प्रस्तावित यह द्विपक्षीय व्यापार समझौता 2030 तक भारत-अमेरिका व्यापार को मौजूदा 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर से अधिक करने का लक्ष्य रखता है।

