पहले डबल बढ़ा दी हवाई ईंधन की कीमतें फिर लिया यूटर्न, तेल कंपनियों पर चला सरकार का डंडा!
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पहले डबल बढ़ा दी हवाई ईंधन की कीमतें फिर लिया यूटर्न, तेल कंपनियों पर चला सरकार का डंडा!

सरकार के दबाव में सरकारी तेल कंपनियों को एटीएफ के दामों में दोगुनी बढ़ोतरी के फैसले को वापस लेना पड़ा. और उन्हें दामों में महज 8.5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ संतोष करना पड़ा


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सरकारी तेल कंपनियों ने हवाई ईंधन के दामों में बढ़ोतरी के फैसले पर यूटर्न ले लिया है. इंडियन ऑयल ने एटीएफ के दामों में जो दोगुनी बढ़ोतरी करने का फैसला लिया था उसे सरकार के दबाव में वापस लेना पड़ा है. और अब केवल एटीएफ के दामों में केवल 8.5 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है. राजधानी दिल्ली में एयरलाइंस को हवाई ईंधन 104,927 रुपये प्रति किलोलीटर में मिलेगा.

क्यों तेल कंपनियों ने लिया एटीएफ पर यूटर्न?

आप जानना चाहेंगे आखिर ऐसा क्या हुआ कि सरकारी तेल कंपनियां एटीएफ के दामों में दोगुनी बढ़ोतरी के फैसले पर कुछ घंटे से ज्यादा टिकी नहीं रही. दरअसल हर महीने की पहली तारीख को सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के दामों की समीक्षा करती है जिसमें हवाई ईंधन भी शामिल है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के चलते मार्च महीने में कच्चे तेल के दामों में 50 फीसदी का उछाल देखने को मिला. 70 डॉलर प्रति बैरल से कच्चे तेल के दाम बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल पर जा पहुंचे. जिसके बाद सरकारी तेल कंपनियों ने 1 अप्रैल 2026 से हवाई ईंधन के दामों में दोगुनी बढ़ोतरी कर दी. 1 मार्च 2026 को हवाई ईंधन की कीमत राजधानी दिल्ली में 96,638 रुपये किलो लीटर थी जिसे बढ़ाकर 1 अप्रैल 2026 को पहले 207,341 रुपये प्रति किलो लीटर दिया गया.

महंगे एटीएफ पर उठने लगे सवाल

सरकारी तेल कंपनियों के इस फैसले की आलोचना होने लगी. सोशल मीडिया पर लोग पोस्ट डालने लगे, हवाई चप्पल पहनने वालों के लिए हवाई जहाज में सफर करना हुआ मुश्किल. फिर क्या था, सरकार के दबाव में सरकारी तेल कंपनियों को एटीएफ के दामों में दोगुनी बढ़ोतरी के फैसले को वापस लेना पड़ा. और उन्हें दामों में महज 8.5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ संतोष करना पड़ा और एटीएफ की नई कीमतें 207,341 रुपये प्रति किलो लीटर से घटाकर 104,927 रुपये प्रति किलोलीटर कर दी गई.

पेट्रोलियम मंत्रालय ने दी सफाई

सरकारी तेल कंपनियों के इस फैसले पर पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा, भारत में एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) की कीमतें 2001 में डीरेगुलेट कर दी गई थीं और इन्हें अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के आधार पर हर महीने बदलाव किया जाता है. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने और वैश्विक एनर्जी मार्केट्स में असाधारण परिस्थितियों के कारण, 1 अप्रैल को घरेलू बाजार के लिए एटीएफ की कीमतों में 100% से अधिक बढ़ोतरी होने की आशंका थी. लेकिन घरेलू हवाई यात्रा की लागत को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में इस भारी उछाल से बचाने के लिए, पेट्रोलियम मंत्रालय की सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (PSU OMCs) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ परामर्श कर केवल आंशिक और चरणबद्ध रूप से 25% (यानी सिर्फ 15 रुपये प्रति लीटर) की बढ़ोतरी ही एयरलाइंस पर डाली है. लेकिन मंत्रालय ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एटीएफ की पूरी बढ़ी हुई कीमत लागू की जाएगी, जो दुनिया के अन्य हिस्सों में चुकाई जा रही कीमतों के अनुरूप होगी.

एविएशन मंत्री ने पीएम का जताया आभार

एटीएफ के दामों को लेकर यूटर्न पर नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू को भी बयान सामने आया. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में एटीएफ कीमतों के मामले में हस्तक्षेप करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का आभार जताया. उन्होंने कहा, यह संतुलित कदम यात्रियों को किराए में अचानक बढ़ोतरी से बचाने में मदद करेगा, घरेलू एयरलाइंस पर बोझ कम करेगा और इस महत्वपूर्ण समय में एविएशन सेक्टर में स्टैबिलिटी बनाए रखने में सहायक साबित होगा. साथ ही, इससे अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ होगा क्योंकि इससे माल ढुलाई की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित होगी और व्यापार व लॉजिस्टिक्स के लिए आवश्यक हवाई कनेक्टिविटी बनी रहेगी.

एयरलाइंस हो गई फैसले से खुश

सरकार के दबाव में एटीएफ पर यूटर्न को एयरलाइंस का भी बयान सामने आ रहा है. इंडिगो ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, इस महत्वपूर्ण कदम के लिए प्रधानमंत्री का हार्दिक धन्यवाद करते हैं. हम नागरिक उड्डयन मंत्रालय और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के प्रति भी अपनी गहरी सराहना व्यक्त करना चाहते हैं, क्योंकि यह एक सार्थक पहल है जो एयरलाइंस के लिए अधिक स्थिरता सुनिश्चित करेगी और हमें अपने यात्रियों को सस्ती और आसान यात्रा का लाभ देने में मदद करेगा.

महंगे हवाई सफर का टला खतरा

बहरहाल घरेलू हवाई यात्रियों के लिए महंगा हवाई सफर का खतरा कुछ समय के लिए टल गया है लेकिन सवाल उठता है कि मिडिल ईस्ट में युद्ध जारी रहा तो ये खतरा कितने समय तक टला रहेगा.

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