
पश्चिम एशिया की जंग से भारतीय शेयर बाजार 'लहूलुहान', 6.5 लाख करोड़ रुपये डूबे
भारतीय शेयर बाजार सेंसेक्स में 1,000 अंक की बड़ी गिरावट आई तो निफ्टी 24,700 के नीचे आ गया। ईरान-इज़रायल युद्ध सहित 4 वजहों से बाजार में हाहाकार मच गया
सोमवार को भारतीय शेयर बाजारों में भयंकर हाहाकार मच गयी। बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते सेंसेक्स और निफ्टी करीब 2% तक गिर गए। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और रुपये की कमजोरी ने निवेशकों की धारणा को और कमजोर किया, जबकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रही।
बाजार की स्थिति
सोमवार को भारतीय शेयर बाजार गहरे लाल निशान में बंद हुए। सेंसेक्स 1,048 अंकों की गिरावट के साथ 80,239 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी करीब 313 अंक गिरकर 24,866 पर आ गया। दोनों प्रमुख सूचकांक लगभग एक महीने के निचले स्तर पर बंद हुए।
इस तेज गिरावट से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में 6.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई और यह घटकर लगभग 457 लाख करोड़ रुपये रह गया।
कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स 2,743 अंक गिरकर 78,543 पर खुला, जबकि निफ्टी 519 अंक टूटकर 24,659 पर खुला। हालांकि बाद में कुछ रिकवरी देखने को मिली।
इंडिगो, लार्सन एंड टुब्रो (L&T), अदानी पोर्ट्स और मारुति सुजुकी के शेयरों में 3–6% तक गिरावट रही। वहीं भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर 2% से अधिक चढ़े, क्योंकि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते डिफेंस शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी।
एनएसई पर सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी ऑटो 2.2% गिरकर सबसे बड़ा नुकसान झेलने वाला सेक्टर रहा। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी ऑयल एंड गैस भी 2% से अधिक गिरे।
बाजार गिरने के 4 प्रमुख कारण
1) पश्चिम एशिया में युद्ध का बढ़ता तनाव
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद मध्य पूर्व में संघर्ष और तेज हो गया। 86 वर्षीय खामेनेई की कथित तौर पर अमेरिका और इज़रायल के मिसाइल हमलों में मौत हुई। उनके परिवार के चार सदस्य भी मारे गए।
इसके बाद ईरान ने पूरे मध्य पूर्व में जवाबी हमले किए, जिससे तेल समृद्ध क्षेत्र में व्यापक तनाव फैल गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चार सप्ताह तक चल सकता है। वहीं ईरान ने बातचीत से इनकार किया।
2) कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
ब्रेंट क्रूड 6% उछलकर 77.08 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 5.5% बढ़कर 70.71 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
दुनिया के 20% से अधिक तेल की आपूर्ति होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरती है। क्षेत्र में हमलों से आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।
ब्रिटेन के बैंक बार्कलेज ने ब्रेंट क्रूड का अनुमान बढ़ाकर 100 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है।
3) रुपये में गिरावट
ईरान-इज़रायल संघर्ष के चलते जोखिम लेने की भावना कमजोर हुई और तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे रुपया एक महीने में पहली बार 91 प्रति डॉलर के पार चला गया।
रुपया 0.5% गिरकर 91.47 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
4) विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को 7,536 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इससे बाजार की धारणा और कमजोर हुई। हालांकि घरेलू निवेशकों ने 12,293 करोड़ रुपये की खरीदारी की।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि घबराकर बिकवाली करना सही रणनीति नहीं है। पिछली कई बड़ी वैश्विक घटनाओं जैसे कोविड संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध और गाजा संघर्ष के छह महीने बाद बाजार सामान्य हो गए थे।
विशेषज्ञों के अनुसार गिरावट का उपयोग उच्च गुणवत्ता वाले शेयरों को धीरे-धीरे खरीदने के लिए किया जा सकता है, खासकर बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, कैपिटल गुड्स और डिफेंस सेक्टर में।
किन स्तरों पर रखें नजर?
विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी ने 25,300 का महत्वपूर्ण समर्थन स्तर तोड़ दिया है।
* तत्काल समर्थन: 25,000
* अगला प्रमुख समर्थन: 24,500–24,350
* प्रमुख रेजिस्टेंस: 25,400
* ऊपरी लक्ष्य: 25,600
विशेषज्ञों का सुझाव है कि 24,600–24,500 के दायरे में निफ्टी में खरीदारी की जा सकती है, जबकि स्टॉप लॉस 24,300 पर रखा जाए। अल्पकाल में बाजार पर बिकवाली का दबाव बना रह सकता है।

