
फ्री सीट नियम पर एयरलाइंस नाराज़, महंगा होगा किराया, सरकार से फैसले वापस लेने की मांग
नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा को लिखे पत्र में FIA ने कहा कि इस निर्देश का एयरलाइंस पर बड़ा आर्थिक असर पड़ेगा और उन्हें नुकसान की भरपाई के लिए टिकट किराया बढ़ाना पड़ सकता है.
घरेलू एयरलाइंस का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने विमान में 60 फीसदी सीटों के सिलेक्शन पर कोई चार्ज नहीं वसूलने के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अपने आदेश को वापस लेने की मांग की है. FIA ने कहा है कि मंत्रालय के इस आदेश से देश के सिविल एविएशन सेक्टर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
आमतौर पर मनमाना एयरलाइंस सीट चुनने के लिए यात्रियों से 200 रुपये से लेकर 2100 रुपये तक चार्ज लेती हैं. यह चार्ज की स्थिति, आगे की पंक्ति, या ज्यादा लेग स्पेस जैसी सुविधाओं पर निर्भर करता है. यह विवाद उस घोषणा के कुछ दिन बाद सामने आया है, जिसमें नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा था कि सिविल एविएशन सेक्टर के रेगुलेटर डीजीसीए
(DGCA) को निर्देश दिया गया है कि हर उड़ान में कम से कम 60% सीटें बिना शुल्क के चयन के लिए उपलब्ध कराई जाएं, ताकि यात्रियों को उचित सुविधा मिल सके.
एयरलाइंस ने कहा बढ़ेगा किराया
पीटीआई के मुताबिक गुरुवार को नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा को लिखे पत्र में FIA ने कहा कि इस निर्देश का एयरलाइंस पर बड़ा आर्थिक असर पड़ेगा और उन्हें नुकसान की भरपाई के लिए टिकट किराया बढ़ाना पड़ सकता है. संगठन ने कहा कि इसका मतलब यह होगा कि जो यात्री सीट पहले से चुनना नहीं चाहते, उन्हें भी ज्यादा किराया देना पड़ेगा. FIA ने कहा कि सीट चयन से मिलने वाली फीस एयरलाइंस की वैध आय का हिस्सा है, खासकर तब जब ईंधन, मेंटेनेंस और एयरपोर्ट चार्ज लगातार बढ़ रहे हैं.
एयरलाइंस ने कहा कि, भारत का एविएशन सेक्टर पहले से कम मुनाफे पर चल रहा है. ऐसे में अतिरिक्त सेवाओं से मिलने वाली आय जरूरी है. लेकिन सरकार का दखल बाजार आधारित कीमत तय करने की प्रक्रिया को प्रभावित करेगा. संगठन ने यह भी कहा कि एयरलाइंस से बिना चर्चा के ऐसा फैसला लेना गलत है. और इससे भविष्य में और कड़े नियमों की आशंका बढ़ेगी. एयरलाइंस ने मंत्रालय को बताया है कि जेट फ्यूल की कीमत बढ़ रही है. पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उड़ानों पर असर पड़ा है. कई रूट महंगे हो गए हैं इस वजह से एयरलाइंस पहले से ही आर्थिक दबाव में हैं.

