
मध्य पूर्व युद्ध से डगमगाया तेल बाजार, अमेरिकी कंपनियों ने ट्रंप को दी चेतावनी
ईरान युद्ध और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव से वैश्विक तेल बाजार और अस्थिर हो सकता है। अमेरिकी तेल कंपनियों ने ट्रंप सरकार को ऊर्जा संकट गहराने की चेतावनी दी।
अमेरिका की प्रमुख तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार को चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े युद्ध के कारण पैदा हुआ वैश्विक ऊर्जा संकट और भी गंभीर हो सकता है। उनका कहना है कि जब तक मध्य पूर्व में संघर्ष जारी रहेगा, तब तक अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।
अमेरिका की बड़ी तेल कंपनियों ExxonMobil और Chevron सहित कई कंपनियों के अधिकारियों ने हाल ही में अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और आंतरिक मंत्री डग बर्गम के साथ हुई बैठकों में यह चिंता व्यक्त की। The Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग जगत के नेताओं ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से आने वाले हफ्तों में वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर रह सकते हैं।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान से तेल बाजार प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाला समुद्री यातायात काफी धीमा हो गया है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है।
दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग एक-पांचवां हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है, जो पर्शियन गल्फ को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ता है। यहां किसी भी तरह का व्यवधान तेल बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव पैदा कर सकता है और आपूर्ति में कमी की आशंका बढ़ा देता है।
तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अन्य देशों से अपील की है कि वे इस जलमार्ग को व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित बनाए रखने के लिए अपने युद्धपोत तैनात करें। उन्होंने सुझाव दिया कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश इस प्रयास में शामिल हो सकते हैं, हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई स्पष्ट योजना या प्रतिबद्धता नहीं बताई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन जल्द ही उन देशों के गठबंधन की घोषणा कर सकता है जो इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान करेंगे। अभी यह चर्चा चल रही है कि यह मिशन क्षेत्र में मिसाइल हमले कम होने से पहले शुरू होगा या बाद में।
ईरान की ओर से बातचीत के संकेत नहीं
ट्रंप ने कहा है कि वह इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन ईरान की ओर से ऐसे संकेत नहीं मिले हैं।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनके देश ने न तो किसी बातचीत की मांग की है और न ही युद्धविराम की। उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तब दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही थी।
उन्होंने कहा हमें अमेरिकियों से बात करने का कोई कारण नजर नहीं आता, क्योंकि जब वे हम पर हमला करने का फैसला कर रहे थे तब हम उनसे बातचीत कर रहे थे। अराघची ने यह भी कहा कि जब तक अमेरिका यह स्वीकार नहीं करता कि वह ईरान के खिलाफ “गैरकानूनी युद्ध” लड़ रहा है, तब तक ईरान अपनी रक्षा जारी रखेगा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों देशों के बीच कोई कूटनीतिक संपर्क सक्रिय है या नहीं।
यूरोप भी नौसैनिक मिशन बढ़ाने पर विचार कर रहा
यूरोपीय देश भी समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा के विकल्प तलाश रहे हैं।यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री इस बात पर चर्चा करने वाले हैं कि रेड सी में चल रहे यूरोपीय नौसैनिक मिशन Aspides को बढ़ाकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य तक विस्तारित किया जाए या नहीं।
हालांकि जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा कि इस संबंध में तुरंत कोई निर्णय होने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि रेड सी में चल रहा मिशन अब तक खास प्रभावी साबित नहीं हुआ है और जर्मनी इसे खाड़ी क्षेत्र तक बढ़ाने को लेकर संदेह में है।
युद्ध तीसरे सप्ताह में
यह संघर्ष अब तीसरे सप्ताह में पहुंच चुका है और पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। व्हाइट हाउस की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक केविन हैसेट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग का अनुमान है कि यह युद्ध चार से छह सप्ताह तक चल सकता है। उन्होंने तेल की कीमतों में वृद्धि के बीच अमेरिकी नागरिकों से धैर्य रखने की अपील की है।
सरकारी और गैर-सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से अब तक लगभग 3,750 लोगों की मौत हो चुकी है।
अमेरिका स्थित Human Rights Activists News Agency के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में ही ईरान के भीतर 3,000 से अधिक लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा इज़राइल और खाड़ी देशों में भी कई लोगों की जान गई है, जबकि अमेरिका के 13 सैनिक भी मारे गए हैं।
मिसाइल और ड्रोन हमले तेज
क्षेत्र में सैन्य हमले लगातार बढ़ रहे हैं।अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के तेल निर्यात के महत्वपूर्ण केंद्र खार्ग द्वीप के सैन्य ठिकानों पर हमले के बाद ईरान ने इज़राइल और खाड़ी देशों पर जवाबी मिसाइल हमले किए। इराक में बगदाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और आसपास के क्षेत्रों पर पांच मिसाइलें गिरीं, जिसमें पांच लोग घायल हुए। यह जानकारी इराकी लेफ्टिनेंट जनरल साद मान ने दी।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने कहा कि उसने ईरान द्वारा छोड़ी गई मिसाइलों और ड्रोन को बीच रास्ते में ही मार गिराया। अधिकारियों के अनुसार दुबई के कुछ इलाकों में लोगों ने जोरदार धमाकों की आवाजें सुनीं, जब वायु रक्षा प्रणाली ने इन हमलों को रोक दिया।यूएई सरकार के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से उसकी रक्षा प्रणाली ने लगभग 1,600 ड्रोन और 300 से अधिक मिसाइलों को नष्ट किया है।
ईरान के विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि खार्ग द्वीप पर गिरने वाली मिसाइलें यूएई से दागी गई थीं, लेकिन अमीराती अधिकारियों ने इस आरोप को सख्ती से खारिज कर दिया।
खाड़ी के महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र पर असर
इस संघर्ष का असर अब क्षेत्र की ऊर्जा संरचना पर भी पड़ने लगा है।यूएई के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र फुजैराह में तेल लोडिंग का काम रविवार को फिर शुरू हुआ। इससे एक दिन पहले ड्रोन हमले और आग लगने की घटना के कारण वहां से तेल भेजना अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।
फुजैराह खाड़ी क्षेत्र का एक ऐसा महत्वपूर्ण निर्यात केंद्र है जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बायपास करता है। इसी कारण समुद्री मार्गों में व्यवधान के समय इसका रणनीतिक महत्व और बढ़ जाता है।

