ईरान युद्ध का असर, जेट फ्यूल महंगा और आसमान पर हवाई किराए
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ईरान युद्ध का असर, जेट फ्यूल महंगा और आसमान पर हवाई किराए

ईरान युद्ध के कारण जेट फ्यूल महंगा होने से दुनियाभर में हवाई टिकटों के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। कई अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर किराया दोगुना हो गया है और एयरलाइंस ने फ्यूल सरचार्ज भी बढ़ा दिया है।


वैश्विक विमानन उद्योग के लिए हालात लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं। ईरान के खिलाफ इजराइल-अमेरिका युद्ध के दो हफ्ते पूरे हो चुके हैं और इसका असर अब दुनिया भर की एयरलाइनों पर साफ दिखाई दे रहा है। युद्ध के कारण जेट फ्यूल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे एयरलाइंस के संचालन खर्च बढ़ गए हैं।

इसके चलते भारत सहित दुनिया भर की एयरलाइंस ने कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर टिकट की कीमतें बढ़ा दी हैं और नए फ्यूल सरचार्ज भी जोड़ दिए हैं। पहले जिन भारत-अमेरिका उड़ानों के टिकट 45,000 से 1,00,000 रुपये के बीच मिल जाते थे, वे अब कुछ मामलों में 1.3 लाख से 2.25 लाख रुपये तक पहुंच गए हैं। इसकी मुख्य वजह ईंधन की बढ़ती कीमतें और संघर्ष क्षेत्र से बचने के लिए लंबा हवाई मार्ग अपनाना है।

हवाई किराए में तेज उछाल

हाल के दिनों में कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मार्गों पर टिकट के दाम तेजी से बढ़े हैं:

बेंगलुरु – लंदन: 80,000 रुपये से बढ़कर लगभग 1.20 लाख रुपये

बेंगलुरु – न्यूयॉर्क: 1 लाख से बढ़कर करीब 2 लाख रुपये

बेंगलुरु – फ्रैंकफर्ट: 80,000 से बढ़कर 1.9 लाख रुपये

बेंगलुरु – दुबई: 12-15 हजार से बढ़कर करीब 22 हजार रुपये

बेंगलुरु – सिंगापुर: 20 हजार से बढ़कर लगभग 40 हजार रुपये

बेंगलुरु – मलेशिया: 20 हजार से बढ़कर 30 हजार रुपये

हैदराबाद – मस्कट: किराया 40 हजार रुपये तक

हैदराबाद – दुबई: 8-15 हजार से बढ़कर 40-50 हजार रुपये

एयरलाइंस इन बढ़ती लागतों को अधिक बेस किराए और फ्यूल सरचार्ज के रूप में यात्रियों पर डाल रही हैं।

एविएशन फ्यूल की कीमतों में उछाल

भारत में मार्च की शुरुआत में सरकारी तेल कंपनियों ने एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में लगभग 5 से 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। इससे Delhi में ATF की कीमत करीब 90,000 रुपये प्रति किलोलीटर के आसपास पहुंच गई।विशेषज्ञों के अनुसार भारत में ATF की कीमतें अंतरराष्ट्रीय मानकों से जुड़ी होती हैं, खासकर खाड़ी क्षेत्र के जेट फ्यूल बाजार से। इसलिए क्षेत्रीय स्तर पर कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे भारत की एयरलाइंस पर पड़ता है।

विश्लेषकों का कहना है कि Saudi Arabia, United Arab Emirates, Kuwait और Bahrain जैसे बड़े निर्यात केंद्रों में उत्पादन और लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण जेट फ्यूल की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं।

टैक्स ढांचा भी बढ़ा रहा दबाव

भारत में ATF पर केंद्र और राज्य सरकारें टैक्स लगाती हैं। केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्यों का वैट ATF की बेस कीमत के प्रतिशत के रूप में तय होता है। Delhi जैसे बड़े हवाई केंद्रों पर वैट दरें 20 से 25 प्रतिशत तक होती हैं।इस वजह से अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने पर टैक्स का वास्तविक बोझ भी बढ़ जाता है, जिससे एयरलाइंस पर लागत का दबाव और बढ़ जाता है।

एयरलाइंस ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज

भारत की प्रमुख एयरलाइन Air India ने 12 मार्च से नए फ्यूल सरचार्ज लागू किए हैं। इसके तहत घरेलू और South Asian Association for Regional Cooperation (SAARC) मार्गों पर प्रति टिकट 399 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है।पश्चिम एशिया मार्गों पर करीब 10 डॉलर का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जबकि लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इससे अधिक सरचार्ज लागू किया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार दक्षिण-पूर्व एशिया के मार्गों पर सरचार्ज 60 डॉलर तक और अफ्रीका के मार्गों पर 90 डॉलर तक पहुंच गया है। यूरोप के लिए यह करीब 125 डॉलर और उत्तरी अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया के मार्गों पर 200 डॉलर तक हो सकता है।

इंडिगो और अकासा एयर का फैसला

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo ने भी 14 मार्च से नया फ्यूल सरचार्ज लागू किया है। कंपनी के अनुसार घरेलू और छोटे मार्गों पर यह करीब 425 रुपये से शुरू होकर यूरोप की लंबी दूरी की उड़ानों पर 2,300 रुपये तक हो सकता है।इसी तरह Akasa Air ने भी 15 मार्च से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर 199 से 1,300 रुपये तक का फ्यूल सरचार्ज लागू करने की घोषणा की है।

बदले हवाई मार्ग, बढ़ा खर्च

कई एयरलाइंस अब पश्चिम एशिया के कुछ हवाई क्षेत्रों से बचकर उड़ानें भर रही हैं। इससे उड़ानों का मार्ग लंबा हो गया है और ईंधन की खपत भी बढ़ गई है। उदाहरण के तौर पर Delhi और Mumbai से New York या Newark जाने वाली उड़ानों के किराए कई मामलों में पहले से दोगुने हो चुके हैं।

विदेशी एयरलाइंस भी बढ़ा रहीं किराया

यूरोपीय एयरलाइन समूह Air France-KLM ने भी जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए लंबी दूरी की उड़ानों के टिकट लगभग 50 यूरो तक महंगे करने की घोषणा की है। इसी तरह Thai Airways ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने की बात कही है।

भारत के बड़े शहरों पर असर

इस स्थिति का असर भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबादर खास तौर पर दिखाई दे रहा है।खासतौर पर केंपेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से उड़ान भरने वाली कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों के टिकट अचानक महंगे हो गए हैं।

मध्य पूर्व यात्रा में गिरावट

युद्ध के बाद सुरक्षा चिंताओं के कारण मध्य पूर्व जाने वाले यात्रियों की संख्या भी घट गई है। बेंगलुरु की ट्रैवल एजेंसी स्काईवे इंटरनेशनल ट्रैवल्स के निदेशक एस. महालिंगैया के अनुसार दुबई मार्ग की कई उड़ानें प्रभावित हुई हैं और कुछ सेवाएं लगभग बंद हो गई हैं।उनका कहना है कि मध्य पूर्व की उड़ानों में कमी के कारण यूरोपीय एयरलाइंस का दबदबा बढ़ गया है, जिससे टिकट की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है।

ट्रैवल एजेंसियों पर भी असर

युद्ध से ट्रैवल एजेंसियों का कारोबार भी प्रभावित हुआ है। बड़ी संख्या में टिकट रद्द किए जा रहे हैं और कई मार्गों पर किराए दोगुने तक हो गए हैं।बेंगलुरु की ट्रैवल एजेंसी रिचवी रिच हॉलीडेज के मैनेजर विनीत कुमार के अनुसार दुबई एयरपोर्ट से उड़ानों की कमी के कारण यात्रियों का लेओवर समय भी काफी बढ़ गया है।

हैदराबाद से उड़ानें रद्द

हैदराबाद से खाड़ी देशों के लिए कुल 29 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, जिनमें 13 आगमन और 16 प्रस्थान शामिल हैं।इनमें से इंडिगो ने ही खाड़ी के कई शहरों के लिए 19 उड़ानें रद्द की हैं। हैदराबाद–दुबई मार्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। पहले जहां इस मार्ग का किराया 8,000 से 15,000 रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 40,000 से 50,000 रुपये तक पहुंच गया है।

इसी तरह मस्कट से हैदराबाद की उड़ानों का किराया भी 30,000 से 40,000 रुपये तक पहुंच गया है, जबकि युद्ध से पहले यह लगभग 7,000 से 15,000 रुपये हुआ करता था। कुल मिलाकर, ईंधन की कीमतों में उछाल, बदले हुए हवाई मार्ग और उड़ानों के रद्द होने से वैश्विक विमानन उद्योग पर भारी दबाव है और फिलहाल यात्रियों को महंगी हवाई यात्रा का सामना करना पड़ रहा है।

(द फेडरल कर्नाटक और द फेडरल तेलंगाना से इनपुट के साथ।)

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