
ईरान युद्ध के चक्कर में एयरलाइनों ने बढ़ा दिए किराए, उड्डयन सेक्टर पर सीधा असर
पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण एयरलाइनों का संचालन और जटिल हो गया है। एयरलाइनों को अब क्षेत्र से बचते हुए लंबा रास्ता लेकर उड़ान भरनी पड़ रही है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण तेल बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ट्रेडर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध का वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर क्या असर पड़ेगा। इस अस्थिरता का असर अब विमानन उद्योग पर भी पड़ने लगा है।
हवाई यात्रा महंगी हुई
एशिया और प्रशांत क्षेत्र की कई एयरलाइनों ने जेट ईंधन की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी और संभावित आपूर्ति संकट की आशंका के चलते टिकट कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं या फ्यूल सरचार्ज लगा दिया है।
पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण एयरलाइनों का संचालन और जटिल हो गया है। एयरलाइनों को अब क्षेत्र से बचते हुए लंबा रास्ता लेकर उड़ान भरनी पड़ रही है।
इन डायवर्ज़न के कारण विमानों को अतिरिक्त ईंधन ले जाना पड़ता है और अचानक रूट बदलने की स्थिति के लिए भी तैयार रहना पड़ता है, जिससे ईंधन की खपत और संचालन लागत दोनों तेजी से बढ़ जाती हैं।
हजारों यात्री फंसे, हजारों उड़ानें रद्द
क्षेत्र में कई उड़ानें रद्द या देरी से चलने के कारण हजारों यात्री फंस गए हैं।
एविएशन एनालिटिक्स कंपनी Cirium Ltd के अनुसार 28 फरवरी से 10 मार्च के बीच पश्चिम एशिया से आने-जाने वाली 43,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। इससे वैश्विक विमानन व्यवस्था पर भारी असर पड़ा है।
मध्य पूर्व के एयरस्पेस से बचने वाली उड़ानों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है, खासकर एशिया और यूरोप के बीच के मार्गों पर। इससे टिकट कीमतें और अधिक बढ़ रही हैं।
एयरलाइनों ने किराया और फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया
एयर एशिया
दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी लो-कॉस्ट एयरलाइन AirAsia ने किराए बढ़ाने और फ्यूल सरचार्ज समायोजित करने की घोषणा की है। हालांकि उसने बढ़ोतरी की सटीक राशि नहीं बताई है।
एयरलाइन का कहना है कि वह बाज़ार की स्थिति पर लगातार नज़र रखेगी और जरूरत पड़ने पर आगे भी कदम उठाएगी।
एयर इंडिया
Air India और उसकी लो-कॉस्ट सहायक कंपनी Air India Express ने घोषणा की है कि वे 12 मार्च से हर घरेलू टिकट पर 399 रुपये का फ्यूल सरचार्ज लगाएंगी।
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में तेज़ वृद्धि से एयरलाइनों की लागत बढ़ गई है।
कंपनी ने बताया कि जेट ईंधन की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी के कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर चरणबद्ध तरीके से यह सरचार्ज लागू किया जाएगा।
पहले चरण में 12 मार्च से हर घरेलू टिकट पर 399 रुपये का सरचार्ज लगेगा। यही सरचार्ज SAARC देशों की उड़ानों पर भी लागू होगा।
एयर न्यूजीलैंड
Air New Zealand ने 10 मार्च को कहा कि वह किराए में बढ़ोतरी करेगी, हालांकि बढ़ोतरी की सटीक राशि नहीं बताई गई।
एयरलाइन ने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो आगे और कीमतें बढ़ सकती हैं। कंपनी ने अपनी कमाई का पूर्वानुमान भी फिलहाल रोक दिया है।
हॉन्गकॉन्ग एयरलाइंस
Hong Kong Airlines ने भी 12 मार्च से कई मार्गों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिया है। मालदीव, नेपाल और बांग्लादेश की उड़ानों पर सरचार्ज 35% बढ़ाकर HK$100 कर दिया गया है।
ऑस्ट्रेलिया और उत्तरी अमेरिका जैसे लंबी दूरी के मार्गों पर सरचार्ज HK$150 बढ़ाकर कुल HK$739 कर दिया गया है।
जापान एयरलाइंस
Japan Airlines, जो पहले से ही अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज लगाती है, ने कहा है कि वह 1 अप्रैल से पहले इसमें बदलाव करने की योजना नहीं बना रही है।
क्वांटस
ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी एयरलाइन Qantas ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में औसतन करीब 5% बढ़ोतरी की घोषणा की है।
एयरलाइन के अनुसार पिछले दो हफ्तों में जेट ईंधन की कीमतें 150% तक बढ़ गई हैं, जिससे संचालन लागत बहुत बढ़ गई है।
स्पाइसजेट
भारतीय एयरलाइन SpiceJet ने चेतावनी दी है कि यदि ईंधन की कीमतें ऊंची रहीं तो एयरलाइनों के पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
कंपनी के संस्थापक अजय सिंह ने कहा कि एयरलाइनों को फ्यूल सरचार्ज लगाना ही पड़ेगा। उन्होंने सरकार से जेट ईंधन पर टैक्स कम करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि 90 डॉलर प्रति बैरल का तेल मूल्य एयरलाइनों के लिए टिकाऊ नहीं है।
युद्ध के कारण तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव
मध्य पूर्व युद्ध के कारण तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता देखी जा रही है। ब्रेंट क्रूड 11 सेंट बढ़कर 87.91 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि
WTI क्रूड 7 सेंट बढ़कर 83.52 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) युद्ध से पैदा हुई आपूर्ति बाधाओं को संतुलित करने के लिए इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में आपातकालीन तेल भंडार जारी करने का प्रस्ताव दे सकती है।
पहले 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गया तेल
सोमवार को तेल की कीमतों में लगभग 30% की तेज़ बढ़ोतरी हुई और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। उस दौरान ब्रेंट क्रूड 119.50 डॉलर, WTI 119.48 डॉलर तक पहुंच गया जो 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था।
यह उछाल इस आशंका से आया कि अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ता युद्ध मध्य पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर सकता है, खासकर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।
विमानन उद्योग पर संकट का खतरा
तेल बाजार की इस उथल-पुथल से निवेशक भी चिंतित हैं। ईंधन की लागत बढ़ने और यात्रा बाधित होने की आशंका से एयरलाइन कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई।
Deutsche Bank के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो विमानन उद्योग को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो दुनिया भर में एयरलाइनों को हजारों विमानों को ग्राउंड करना पड़ सकता है, और कमजोर वित्तीय स्थिति वाली कंपनियां संचालन भी बंद कर सकती हैं।
विश्लेषकों ने 2005 का उदाहरण भी दिया जब हरिकेन कैटरीना और रीटा के बाद जेट ईंधन की कीमतों में तेज़ उछाल ने विमानन उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाया था।

