इजरायल-ईरान युद्ध: भारतीयों के लिए वैकल्पिक हवाई रास्ते और महंगा होता सफ़र
मिडिल ईस्ट का एयरस्पेस बंद होने से विमानन कंपनियों ने बदले अपने रास्ते। डॉ. सुभाष गोयल ने बताया कि इथोपिया और श्रीलंका के जरिए कैसे सुरक्षित लौट रहे हैं भारतीय।
Israel/USA Vs Iran : इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। युद्ध के कारण ईरान और आसपास के क्षेत्रों का एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) खतरनाक हो गया है। इस वजह से भारत से यूरोप और अमेरिका जाने वाली उड़ानों को अपने पुराने रास्ते बदलने पड़े हैं। एविएशन एक्सपर्ट डॉ. सुभाष गोयल के अनुसार, सुरक्षा कारणों से अब विमान सीधे युद्ध क्षेत्र के ऊपर से नहीं उड़ रहे हैं। यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुँचाने के लिए विमानन कंपनियां अब लंबी दूरी के और वैकल्पिक रास्तों का सहारा ले रही हैं। हालांकि इससे यात्रा के समय और खर्च में बढ़ोतरी हुई है। लेकिन यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर यह सबसे प्रभावी कदम माना जा रहा है।
इथोपियन एयरलाइन: अफ्रीका के रास्ते सुरक्षित सफर
डॉ. सुभाष गोयल ने बताया कि वर्तमान में 'इथोपियन एयरलाइन' भारतीयों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। यह एयरलाइन यात्रियों को अफ्रीका के रास्ते यूरोप और अमेरिका ले जा रही है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह रूट मिडिल ईस्ट और ईरान के हवाई क्षेत्र को पूरी तरह से बायपास कर देता है। इस रूट के जरिए विमान सीधे अफ्रीकी महाद्वीप के ऊपर से उड़ते हुए पश्चिम की ओर जाते हैं। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों से इथोपियन एयरलाइन की हर रोज कई फ्लाइट्स संचालित हो रही हैं। जो यात्री खाड़ी देशों के तनावपूर्ण एयरस्पेस से बचना चाहते हैं, वे अब इस वैकल्पिक मार्ग को सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
श्रीलंकन एयरलाइन: दक्षिण भारत के लिए मुख्य विकल्प
दक्षिण भारत के यात्रियों के लिए श्रीलंका एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट हब बनकर उभरा है। कोलंबो के रास्ते श्रीलंकन एयरलाइन यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुँचा रही है। कोच्चि, तिरुवनंतपुरम, बेंगलुरु और चेन्नई से श्रीलंका के लिए काफी फ्लाइट्स उपलब्ध हैं। डॉ. गोयल के अनुसार, जो लोग मिडिल ईस्ट जाने से डर रहे हैं, वे वाया श्रीलंका होकर यात्रा कर रहे हैं। यह रूट पूरी तरह से दक्षिण में स्थित है और युद्ध के प्रत्यक्ष दायरे से बाहर है। श्रीलंका एयरलाइन ने अपनी उड़ानों की संख्या भी बढ़ा दी है ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। यह रूट उन यात्रियों के लिए भी कारगर है जो इजरायल या उसके आसपास के देशों तक पहुंचना चाहते हैं।
मिडिल ईस्ट टूरिज्म ठप, साउथ ईस्ट एशिया सुरक्षित
पर्यटन के क्षेत्र पर बात करते हुए डॉ. गोयल ने कहा कि मिडिल ईस्ट का टूरिज्म पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। इस क्षेत्र के लिए होने वाली लगभग सभी पुरानी बुकिंग्स कैंसिल हो चुकी हैं। लोग अब खाड़ी देशों की यात्रा करने से कतरा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने राहत भरी खबर देते हुए बताया कि दक्षिण-पूर्व एशिया (South East Asia) अभी भी सुरक्षित है। सिंगापुर, मलेशिया, वियतनाम, थाईलैंड और जापान जैसे देशों में पर्यटकों का आना-जाना जारी है। इन देशों के पर्यटन पर युद्ध का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। इसके अलावा पश्चिमी तट के रास्ते अमेरिका जाने वाली उड़ानें भी पूरी तरह सुरक्षित हैं। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि गर्मियों की छुट्टियों तक स्थिति में सुधार हो सकता है।
मस्कट और चार्टर्ड विमानों का बढ़ता उपयोग
मस्कट (ओमान) वर्तमान में युद्ध क्षेत्र के दक्षिण में होने के कारण अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा रहा है। डॉ. गोयल ने साझा किया कि उनकी टीम ने हाल ही में मस्कट से भारत के लिए विशेष चार्टर्ड विमानों का सफल संचालन किया है। मस्कट का एयरस्पेस फिलहाल सीधा निशाना नहीं है, इसलिए वहां से सुरक्षित निकासी संभव हो पा रही है। इसके अलावा रॉयल जॉर्डन एयरलाइन भी मुंबई से अपनी सेवाएं दे रही है। यह एयरलाइन यात्रियों को अम्मान के रास्ते वैकल्पिक मार्ग प्रदान कर रही है। हालांकि इन रास्तों पर प्रेशर बहुत ज्यादा है, लेकिन एयर इंडिया और कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी धीरे-धीरे इन सुरक्षित गलियारों का उपयोग बढ़ा रही हैं।
समय और लागत पर वैकल्पिक मार्गों का प्रभाव
वैकल्पिक रूट्स का उपयोग करने से यात्रा की दूरी काफी बढ़ गई है। अफ्रीका के रास्ते जाने पर उड़ान का समय 2 से 4 घंटे तक बढ़ गया है। समय बढ़ने के साथ ही विमानों में ईंधन की खपत भी ज्यादा हो रही है। इसी वजह से विमानन कंपनियों ने हवाई किराए और सरचार्ज में बढ़ोतरी की है। डॉ. गोयल ने स्पष्ट किया कि हालांकि चार्जेस बढ़े हैं, लेकिन इथोपियन जैसी एयरलाइंस अभी भी घरेलू एयरलाइंस की तुलना में संतुलित किराया वसूल रही हैं। यात्रियों के लिए समय से ज्यादा सुरक्षा महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाले दिनों में यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो भारत सरकार एयरफोर्स के जरिए विशेष रिलीफ फ्लाइट्स भी शुरू कर सकती है।
पश्चिमी तट और दक्षिण-पूर्व एशिया के सुरक्षित गलियारे
अच्छी बात यह है कि दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर जाने वाले रास्ते पूरी तरह सुरक्षित हैं। सिंगापुर, मलेशिया, जापान और वियतनाम जाने वाली उड़ानों को अपना रूट बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ी है। साथ ही, जो लोग भारत से सीधे अमेरिका के पश्चिमी तट की ओर उड़ान भर रहे हैं, वे भी सुरक्षित हैं। युद्ध का मुख्य प्रभाव केवल उन रूट्स पर है जो ईरान, इराक या इजरायल के एयरस्पेस का उपयोग करते थे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक शांति बहाल नहीं होती, तब तक ये वैकल्पिक रूट ही अंतरराष्ट्रीय यात्रा का मुख्य आधार बने रहेंगे। यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी यात्रा से पहले एयरलाइंस से रूट और समय की पुष्टि जरूर कर लें।
विदेश में पढ़ने वाले छात्रों के बदले प्लान
युद्ध की स्थिति ने विदेश में शिक्षा ले रहे भारतीय छात्रों की चिंता भी बढ़ा दी है। डॉ. सुभाष गोयल ने बताया कि यूक्रेन संकट के बाद अब मिडिल ईस्ट तनाव ने अभिभावकों को डरा दिया है। इसी वजह से छात्र अब यूरोप की जगह ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे सुरक्षित देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हवाई किराया बढ़ने से छात्रों का यात्रा बजट भी पूरी तरह बिगड़ गया है। जो छात्र पहले यूरोप जाना चाहते थे, वे अब कनाडा या अमेरिका के सुरक्षित रूट्स की तलाश कर रहे हैं। युद्ध के कारण छात्रों के करियर और उनकी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

