युद्ध का असर: भारत में LPG कीमतों में भारी उछाल, 60% आयात पर मंडराया खतरा
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युद्ध का असर: भारत में LPG कीमतों में भारी उछाल, 60% आयात पर मंडराया खतरा

मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सप्लाई चैन बाधित, रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के आदेश। जानें क्यों ₹60 महंगा हुआ आपका सिलेंडर और क्या है स्टॉक की असल स्थिति।


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Israel/US Vs Iran War Impact On Indian LPG Market : ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़े भीषण युद्ध का असर अब सीधा भारत की रसोई तक पहुँच गया है। खाड़ी देशों में सप्लाई चेन बाधित होने और तेल उत्पादन पर असर पड़ने से भारत में ऊर्जा संकट की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। इसी क्रम में बीती रात से रसोई गैस (LPG) की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में सीधे ₹60 का इजाफा किया गया है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर के दाम भी बढ़ गए हैं। मिडल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच इस अचानक हुई बढ़ोतरी ने देश की जनता के बीच चिंता पैदा कर दी है। लोग सोशल मीडिया पर गैस की किल्लत और सरकार द्वारा राशनिंग (Rationing) शुरू करने की अफवाहों से डरे हुए हैं। हालांकि, पेट्रोलियम फेडरेशन ने इन खबरों को पूरी तरह से भ्रामक और गलत बताया है।


कीमतों में क्यों हुआ इजाफा? एक्सपर्ट ने बताया कारण
ऑल इंडिया एलपीजी फेडरेशन के प्रेसिडेंट चंद्र प्रकाश के अनुसार, कीमतों में यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों का परिणाम है। भारत में LPG की दरें पिछले 12-15 वर्षों से 'इंपोर्ट पैरिटी रेट' (Import Parity Rate) के आधार पर तय होती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में अचानक आए उछाल के कारण तेल कंपनियों को यह कदम उठाना पड़ा है। घरेलू सिलेंडर के दाम लंबे समय के बाद बढ़ाए गए हैं, जबकि कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें हर महीने बाजार के अनुसार घटती-बढ़ती रहती हैं। खाड़ी देशों में जारी तनाव ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा क्षेत्र में दबाव पैदा किया है, जिसका असर भारतीय दरों पर भी पड़ा है।

क्या देश में LPG की कमी है? जानें स्टॉक की हकीकत
जनता के बीच फैली किल्लत की खबरों पर चंद्र प्रकाश ने स्पष्ट किया कि देश में LPG की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के सभी रजिस्टर्ड ग्राहकों, चाहे वे उज्ज्वला योजना के हों या सामान्य, सबको सुचारू रूप से गैस मिलती रहेगी। सप्लाई चेन में कुछ बाधाएं जरूर आई हैं, लेकिन सरकार ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के सख्त आदेश दिए हैं। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि तीनों सरकारी तेल कंपनियां और निजी कंपनियां मिलकर घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दें। उपभोक्ताओं को पैनिक बुकिंग (Panic Booking) न करने की सलाह दी गई है। स्टॉक की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सप्लाई चैन को दुरुस्त करने के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए जा रहे हैं।

क्या सरकार कर रही है गैस की राशनिंग?
सोशल मीडिया पर चल रही राशनिंग की खबरों पर चंद्र प्रकाश ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राशनिंग जैसा कोई भी बड़ा प्लान नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर कुछ कदम उठाए गए हैं। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, एक घरेलू उपभोक्ता को महीने में औसतन एक सिलेंडर की जरूरत होती है। इसलिए, दुरुपयोग रोकने के लिए एक सिलेंडर मिलने के 25 दिन बाद ही दूसरी बुकिंग का नियम प्रभावी किया गया है। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि संकट के समय में कोई गलत तत्व गैस का स्टॉक न कर सके या इसका कालाबाजारी न हो। यह राशनिंग नहीं बल्कि संसाधनों का किफायती और सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने की एक प्रक्रिया है।

युद्ध का गहरा असर: 60% गैस आयात पर निर्भर है भारत
भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत से अधिक LPG विदेशों से आयात करता है। मिडिल ईस्ट में जारी जंग ने इस आयात मार्ग को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। यही कारण है कि सरकार अब स्वदेशी रिफाइनरियों पर जोर दे रही है। चंद्र प्रकाश ने विश्वास दिलाया कि महानगरों में PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की सप्लाई भी बिना रुके जारी है। औद्योगिक और घरेलू दोनों क्षेत्रों में ऊर्जा की मांग को पूरा करने के लिए सरकार हाई अलर्ट पर है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे पेट्रोलियम पदार्थों का किफायती इस्तेमाल करें। फिलहाल, सरकार की प्राथमिकता यह है कि युद्ध के लंबे खिंचने की स्थिति में भी आम आदमी की रसोई पर इसका ज्यादा असर न पड़े।


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