मिडिल ईस्ट संकट से भारत की अर्थव्यवस्था और ट्रेड पर खतरा, नीति आयोग ने चेताया
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मिडिल ईस्ट संकट से भारत की अर्थव्यवस्था और ट्रेड पर खतरा, नीति आयोग ने चेताया

नीति आयोग में कहा कि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का भारत के व्यापार और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है. पूरे मिडिल ईस्ट का भारत के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट में करीब 12 फीसदी हिस्सेदारी है.


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अमेरिका - इजरायल (United States - Israel) और ईरान (Iran) के बीच तनाव से पश्चिम एशिया (Central Asia) और मिडिल ईस्ट (Middle Esat) में जारी क्राइसिस का आने वाले दिनों में भारत के ट्रेड और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है. नीति आयोग (Niti Aayog) ने अपनी एक रिपोर्ट में इसे लेकर चिंता जाहिर की है. इसकी वजह ये है कि पूरे खाड़ी क्षेत्र का भारत के कुल ट्रेड यानी एक्सपोर्ट - इंपोर्ट में 12 फीसदी हिस्सेदारी है.

पश्चिम एशिया संकट का असर

नीति आयोग ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही अक्टूबर- दिसंबर के लिए Trade Watch Quarterly का लेटेस्ट एडीशन रिपोर्ट जारी किया है. रिपोर्ट में नीति आयोग में कहा कि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का भारत के व्यापार और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है. पूरे मिडिल ईस्ट का भारत के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट में करीब 12 फीसदी हिस्सेदारी है. भारत अपने कुल आयात का 7.5 फीसदी UAE (United Arab Emirates) को एक्सपोर्ट करता है जबकि इंपोर्ट में 6.1 फीसदी हिस्सेदारी है. एक्सपोर्ट में सऊदी अरब (Saudi Arabia) का 2.36 फीसदी और इंपोर्ट में 3.9 फीसदी हिस्सेदारी है. दोनों ही देश भारत के प्रमुख ट्रेड पार्टनर हैं.

UAE है भारत के लिए री-एक्सपोर्ट हब

UAE भारत के लिए एक बड़ा री-एक्सपोर्ट हब है, जो भारत के व्यापार को यूरोप, अफ्रीका और अन्य देशों से जोड़ता है. भारत मिडिल ईस्ट से 33 फीसदी ईंधन तो आयात करता ही है साथ में कुल इंपोर्ट का 36 फीसदी फर्टिलाइजर, 32 फीसदी कीमती पत्थर (Precious Stones) और धातुओं (Metals) के इंपोर्ट लिए भी भारत इस क्षेत्र पर निर्भर है. इसके अलावा 12.7 फीसदी ऑर्गैनिक केमिकल्स (Organic Chemicals) और 11 फीसदी प्लास्टिक इंपोर्ट पर निर्भर है. नीति आयोग के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन पर इस तनाव का सीधा असर नहीं पड़ेगा लेकिन जेम्स एंड ज्वैलरी जैसे सेक्टर पर ज्यादा असर पड़ सकता है क्योंकि इस सेक्टर के बड़े ट्रेड का हिस्सा UAE से जुड़ा है.

मंडरा रहे संकट के बादल

नीति आयोग के मुताबिक, मिडिल ईस्ट संकट से भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव आ सकता है, जिससे डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत कमजोर हो सकती है. वैसे ही इस पूरे क्राइसिस के दौरान कच्चे तेल के दामों (Crude Oil Price) में उछाल और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली के चलते पहली बार एक डॉलर के मुकाबले रुपया 95 रुपये के लेवल को तोड़कर नीचे जा लुढ़का है.

भारत–GCC FTA पर असर

नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में एक और बड़ी बात कही है. आयोग का कहना है कि, पश्चिम एशिया में अस्थिरता और तनाव का असर भारत और खाड़ी देशों के बीच होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर भी पड़ रहा है. GCC (Gulf Cooperation Council) के साथ यह समझौता भारत के लिए बेहद अहम है, क्योंकि खाड़ी के देशों के बाजार तक भारत की पहुंच बढ़ेगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. लेकिन मौजूदा हालात के चलते इस समझौते में देरी हो सकती है, जिससे व्यापार विस्तार की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं.

मिडिल ईस्ट और सेंट्रल एशिया भारत के लिए सिर्फ एक ट्रेड पार्टनर नहीं, बल्कि एनर्जी, सप्लाई चेन और बाजार पहुंच का अहम केंद्र है. ऐसे में वहां का कोई भी भू-राजनीतिक संकट (Geo-Political Crisis) सीधे भारत की अर्थव्यवस्था, व्यापार और मुद्रा पर असर डाल सकता है. नीति आयोग के मुताबिक, अगर इस क्षेत्र में लंबे समय तक हालात तनावपूर्ण रहते हैं, तो इसका असर निवेश, निर्यात और आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है.

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