Reliance Crude Oil
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ट्रंप के सख्त रूख के बाद मुकेश अंबानी के रिलायंस ने रूसी तेल खरीदने की खबरों का किया खंडन

कंपनी की ओर से ये बयान तब आया है जब ब्लूमबर्ग ने दावा किया था कि रूसी तेल से भरे तीन जहाज जामनगर रिफाइनरी की ओर बढ़ रहे हैं.


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देश के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Limited) ने कंपनी के जामनगर रिफाइनरी में रूसी तेल के जहाज आने की खबरों को झूठा करार दिया है. कंपनी ने कहा कि ऐसी खबरों से उसकी छवि को नुकसान हो रहा है. प

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट के जरिए अपना बयान जारी करते हुए लिखा, ब्लूमबर्ग की न्यूज रिपोर्ट, जिसमें कहा गया है कि “रूसी तेल से भरे तीन जहाज रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी की ओर जा रहे हैं”, पूरी तरह गलत है. कंपनी ने कहा, रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी को पिछले लगभग तीन हफ्तों से रूसी तेल की कोई खेप नहीं मिली है और जनवरी 2026 में भी रूसी कच्चे तेल की किसी डिलीवरी की कोई उम्मीद नहीं है.

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपना बयान में आगे कहा, हमें इस बात का गहरा दुख है कि निष्पक्ष पत्रकारिता का दावा करने वालों ने जनवरी में रूसी तेल खरीदने से जुड़े हमारे इनकार को नजरअंदाज किया और हमारी छवि को नुकसान पहुंचाने वाली गलत खबर प्रकाशित की. कंपनी की ओर से ये बयान तब आया है जब ब्लूमबर्ग ने दावा किया था कि रूसी तेल से भरे तीन जहाज जामनगर रिफाइनरी की ओर बढ़ रहे हैं. रिलायंस ने कहा कि यह रिपोर्ट गलत है और कंपनी की तरफ से दिए गए खंडन को नजरअंदाज किया गया.

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति (Donald Trump) ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर और ज्यादा टैरिफ लगाने की धमकी दी है. उन्होंने कहा, अगर भारत रूस से तेल खरीदता रहा तो भारतीय निर्यात पर ज्यादा टैरिफ लगाए जा सकता है.

हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं कि रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से सस्ते दामों पर कच्चा तेल आयात किया. रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत सरकारी रिफाइनिंग कंपनियों ने क्रूड ऑयल को रिफाइ करने के बाद ऊँचे दामों पर इंटरनेशनल मार्केट में पेट्रोल डीजल एक्सपोर्ट किया. लेकिन ये दीगर बात है कि भारत के उपभोक्ताओं के नाम पर रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदा गया लेकिन उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिला.

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