
म्यूचुअल फंड को लगा 6 हजार करोड़ का नुकसान, इंडसइंड सबसे अधिक प्रभावित
अमेरिकी शेयर बाजार में उथल पुथल का असर भारतीय शेयर बाजार साफ तौर पर नजर आया। म्यूचुअल फंड प्रभावित रहे।
अमेरिकी शेयर मार्केट में हाहाकार का असर पूरी दुनिया के बाजारों पर नजर आ रहा है। एशियाई मार्केट का हाल तो बुरा रहा है। अगर बात भारत के शेयर बाजार की करें तो गिरावट देखा गया। खास बात यह है कि बैंक के शेयर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इंडसइंड बैंक में म्यूचुअल फंड निवेशकों को ₹6,000 करोड़ का नुकसान
इंडसइंड बैंक के शेयरों में 20% की भारी गिरावट (11 मार्च) के बाद म्यूचुअल फंड निवेशकों को ₹6,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। यह गिरावट बैंक द्वारा डेरिवेटिव लेनदेन के मूल्यांकन में बदलाव के कारण नेटवर्थ पर 2.4% प्रभाव की घोषणा के बाद आई।
म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स में आई गिरावट
फरवरी तक, 35 म्यूचुअल फंडों के पास इंडसइंड बैंक के कुल 20.88 करोड़ शेयर थे, जिनका मूल्य ₹20,670 करोड़ था। हालिया गिरावट के बाद इनकी कुल कीमत ₹14,600 करोड़ रह गई है।
प्रमुख म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स
ICICI प्रूडेंशियल MF – ₹3,779 करोड़
HDFC MF – ₹3,564 करोड़
SBI MF – ₹3,048 करोड़
अन्य प्रमुख निवेशक: UTI, Nippon India, Bandhan और Franklin Templeton MFs (₹740 करोड़ से ₹2,447 करोड़ तक का निवेश)
निवेश प्रवाह और स्टॉक प्रदर्शन
अप्रैल 2024 से जनवरी 2025 तक, इंडसइंड बैंक में ₹10,200 करोड़ का म्यूचुअल फंड निवेश आया।
फरवरी 2025 में लगभग ₹1,600 करोड़ की निकासी हुई।
अप्रैल 2024 के ₹1,576 प्रति शेयर के उच्चतम स्तर से अब तक 54% की गिरावट दर्ज की गई है।
नेटवर्थ पर असर और संभावित मुनाफे में गिरावट
2.4% का प्रभाव बैंक की नेटवर्थ पर ₹1,500 करोड़ के संभावित लाभ में कमी के रूप में दिख सकता है (Q4 FY25 में)।
हालांकि वित्तीय प्रभाव सीमित है, लेकिन बड़ा मुद्दा बैंक की विश्वसनीयता (credibility) है, जिसे सुधारने में कई तिमाहियों का समय लग सकता है।
इस स्थिति को सुधारने के लिए बैंक ने एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी से ऑडिट और समीक्षा कराने की घोषणा की है।
विश्लेषकों की राय और संभावित सुधार के संकेत
सेबी रजिस्टर्ड एनालिस्ट गौरव शर्मा ने कहा कि अगर और नकारात्मक घटनाएं होती हैं, तो बैंक के प्रदर्शन पर गंभीर असर पड़ सकता है।रिपोर्ट में बोर्ड की प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण बताया गया, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
सकारात्मक पक्ष की बात करें तो माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो में संपत्ति गुणवत्ता में सुधार, डिपॉजिट ग्रोथ में स्थिरता और पर्याप्त तरलता (liquidity) से निवेशकों की चिंताओं को दूर किया जा सकता है।यदि बैंक वित्तीय स्थिति में स्थिरता बनाए रखता है, तो यह घटना एक अस्थायी झटका साबित हो सकती है, न कि दीर्घकालिक समस्या।