भारत के EV बाजार में ओला और हीरो का संकट, कारण और भविष्य?
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भारत के EV बाजार में ओला और हीरो का संकट, कारण और भविष्य?

ओला और हीरो इलेक्ट्रिक के संकट ने यह साबित कर दिया कि कंपनियों को अपनी योजना और रणनीतियाँ सरकार की नीतियों और बाजार की वास्तविकताओं के अनुरूप बनानी चाहिए. यह संकट न केवल इन कंपनियों के लिए, बल्कि पूरे उद्योग के लिए एक चेतावनी है कि सरकारी नीतियों में अचानक बदलाव और उपभोक्ता की प्राथमिकताओं को नजरअंदाज करना कितना महंगा साबित हो सकता है.


भारत के घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाजार में 28 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद के बावजूद शीर्ष दो कंपनियां ओला इलेक्ट्रिक और हीरो इलेक्ट्रिक इस समय गंभीर संकट का सामना कर रही हैं. हाल ही में ओला ने एक हजार से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया. जबकि हीरो इलेक्ट्रिक ने दिवालियापन की अर्जी दी है. ओला की बाजार हिस्सेदारी 49 प्रतिशत से घटकर 33 प्रतिशत हो गई है और हीरो इलेक्ट्रिक का हिस्सा दिवालियापन से पहले 26 प्रतिशत से गिरकर महज 2 प्रतिशत रह गया है. ऐसे में यह जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर इसके पीछे क्या कारण हैं?

विफलता के कारण?

ओला और हीरो इलेक्ट्रिक दोनों ही हाई प्रोफ़ाइल कंपनियां थीं, जो भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए जानी जाती थीं. लेकिन अब ये कंपनियां अपने अस्तित्व को लेकर संघर्ष कर रही हैं. इसके पीछे के प्रमुख कारणों में अवास्तविक लाभप्रदता लक्ष्य, संचालन में गलतियां और सरकारी नीतियों में विफलताएं शामिल हैं. इस संकट ने न केवल इन कंपनियों को प्रभावित किया, बल्कि यह सवाल भी उठाया है कि भारत सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति कितनी स्थिर है और छोटे स्टार्ट-अप्स के लिए बड़ी कंपनियों से मुकाबला करना कितना कठिन हो सकता है, खासकर जब उनका बिजनेस मॉडल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर हो.

ओला इलेक्ट्रिक

ओला इलेक्ट्रिक ने शुरुआत में भारत के इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति की उम्मीदें जगाईं थीं. भावेश अग्रवाल के नेतृत्व में और सॉफ़्टबैंक जैसे प्रमुख निवेशकों के समर्थन से ओला ने 2024 में भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार का एक तिहाई हिस्सा कब्जा कर लिया था. ओला के “S1” स्कूटर और “फ्यूचरफैक्ट्री” को लेकर यह उम्मीद थी कि यह कंपनी Tesla जैसी क्रांति लेकर आएगी. लेकिन ओला ने अपनी योजनाओं में अवास्तविक लक्ष्य निर्धारित किए. जो अंततः समस्याओं की जड़ बन गए. ओला ने 2024 में 8,82,000 स्कूटर बेचने का लक्ष्य रखा था. लेकिन यह लक्ष्य समय के साथ घटकर 3,00,000 तक आ गया. इसके बाद कंपनी को अपने लाभप्रदता लक्ष्य को एक साल के लिए टालना पड़ा. क्योंकि सरकार की ओर से सब्सिडी में कटौती ने इसके आर्थिक समीकरणों को उलट दिया.

कर्मचारी छंटनी और घटती बाजार हिस्सेदारी

2024 के अंत तक, ओला की आकांक्षाओं और वास्तविकता के बीच अंतर और भी गहरा हो गया था. कंपनी ने लागत कम करने के लिए बड़े पैमाने पर छंटनी की योजना बनाई, जिसमें 400-500 कर्मचारियों (कुल कार्यबल का 10 प्रतिशत) को निकाला गया. इसके बाद इस महीने की शुरुआत में एक हजार से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया. ओला की इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में हिस्सेदारी Q1 FY25 में 49 प्रतिशत से घटकर Q2 में केवल 33 प्रतिशत रह गई.

संचालन संबंधी समस्या

ओला को अपने उत्पादों और सेवा नेटवर्क में कई समस्याओं का सामना करना पड़ा. ओला S1 स्कूटर के मालिकों ने सॉफ़्टवेयर बग, बैटरी की समस्या और पहियों के लॉक होने जैसी समस्याएं उठाई. इसके अलावा कंपनी की सेवा नेटवर्क में विस्तार के बावजूद, ग्राहकों को मरम्मत के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था. जबकि प्रतियोगी कंपनियों जैसे TVS और बजाज ने दशकों पुराने सेवा नेटवर्क से ग्राहकों को बेहतर सुविधा दी थी. केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने ओला के ग्राहक शिकायतों के निपटान को लेकर जांच भी शुरू की थी.

हीरो इलेक्ट्रिक

जहां ओला इलेक्ट्रिक को आंतरिक मुद्दों का सामना करना पड़ रहा था. वहीं, हीरो इलेक्ट्रिक का संकट और भी गहरा था और इसका मुख्य कारण सरकारी नीतियां थीं. हीरो इलेक्ट्रिक भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर क्षेत्र में एक प्रमुख कंपनी रही है. 2007 में, यह भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर बेचने वाली पहली कंपनी बनी थी. इसके ऑप्टिमा और फ्लैश जैसे मॉडल्स ने कंपनी को कई वर्षों तक बाजार में अग्रणी बनाए रखा. 2021 तक, यह भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार की सबसे बड़ी कंपनी बन चुकी थी.

सब्सिडी विवाद और गिरावट

हीरो इलेक्ट्रिक का संकट 2021 में शुरू हुआ, जब यह आरोप सामने आया कि कंपनी (अन्य कंपनियों के साथ) FAME-II योजना के तहत सब्सिडी का गलत उपयोग कर रही थी. FAME-II योजना के तहत सरकार इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को सब्सिडी देती है. लेकिन केवल उन्हीं कंपनियों को जो स्थानीयकरण मानकों का पालन करती हैं. लेकिन 2021-2022 में व्हिसलब्लोअर ने आरोप लगाया कि कई कंपनियां बिना स्थानीयकरण मानकों का पालन किए सरकारी सब्सिडी का लाभ उठा रही थीं. सरकारी जांच में यह पाया गया कि हीरो इलेक्ट्रिक ने महत्वपूर्ण घटक विदेशों से खरीदे थे. जबकि उसे सब्सिडी मिल रही थी. इसका परिणाम विनाशकारी था: सितंबर 2022 में भारी उद्योग मंत्रालय ने हीरो इलेक्ट्रिक को FAME सब्सिडी पोर्टल से प्रतिबंधित कर दिया.

दिवालियापन की ओर बढ़ता कदम

FAME-II योजना के तहत सब्सिडी में कटौती से हीरो इलेक्ट्रिक के उत्पादों की कीमतें बढ़ गईं, जिससे इसकी बिक्री प्रभावित हुई. इसके बाद 2023 के अंत तक कंपनी का एकमात्र विनिर्माण संयंत्र बंद था और उसके डीलर नेटवर्क में भी समस्याएं उत्पन्न हो गई थीं. डीलर यह दावा कर रहे थे कि कंपनी उन पर 400-500 करोड़ रुपये का बकाया है. इस सब के कारण कंपनी ने अंततः दिवालियापन की अर्जी दी.

सरकारी नीतियां और चुनौतियां

ओला और हीरो इलेक्ट्रिक के संकटों से यह स्पष्ट हो जाता है कि इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में सफलता के लिए केवल अच्छा उत्पाद और निवेश ही पर्याप्त नहीं होते. कंपनियों को सरकार की नीतियों, सब्सिडी योजनाओं और बाजार के वास्तविक हालातों का सही अनुमान लगाना होता है. 2023 में FAME-II योजना के तहत अचानक सब्सिडी में कटौती ने इस उद्योग में हलचल मचा दी. इसके परिणामस्वरूप कई कंपनियाँ अपनी योजनाओं को बदलने को मजबूर हुईं और कीमतों में वृद्धि के कारण बिक्री प्रभावित हुई.

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