LPG सिलेंडर के बाद अब पेट्रोल-डीजल होगा महंगा! कच्चा तेल 100 डॉलर के करीब, एक हफ्ते में 30% बढ़ी कीमतें
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LPG सिलेंडर के बाद अब पेट्रोल-डीजल होगा महंगा! कच्चा तेल 100 डॉलर के करीब, एक हफ्ते में 30% बढ़ी कीमतें

अमेरिका इजरायल के ईरान पर हमले के बाद से लगातार कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है ऐसे में पेट्रोल डीजल के महंगा होने का डर सताने लगा है.


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क्या पेट्रोल डीजल महंगा होगा? सरकारी तेल कंपनियों ने रसोई गैस (LPG) के दामों में बढ़ोतरी कर दी है. राजधानी दिल्ली में पहले एलपीजी सिलेंडर के लिए जहां 853 रुपये देने पड़ रहे थे उसके रिफिल कराने पर अब 913 रुपये देने होंगे. यानी 60 रुपये एलपीजी सिलेंडर रिफिल कराना महंगा हो गया है. एलपीजी सिलेंडर के महंगे होने के साथ ही अब सवाल उठ रहा कि क्या अब पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने की बारी है?

1 हफ्ते में 30 फीसदी महंगा हुआ कच्चा तेल

दरअसल अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को एक हफ्ते बीच चुके हैं. ये युद्ध अब खतरनाक मोड़ ले रहा जिसके चलते शुक्रवार को कच्चे तेल के दामों में तेज उछाल देखने को मिला है और अब 100 डॉलर प्रति बैरल छूने के कगार पर है. ब्रेंट पर क्रूड ऑयल की कीमतें 94.51 डॉलर प्रति बैरल के हाई तक जा पहुंची है जो फिलहाल 93 डॉलर पर कारोबार कर रहा है. इससे ये स्पष्ट है कि सरकारी तेल कंपनियों के लिए क्रूड ऑयल खरीदना महंगा हो चुका है. एक हफ्ते में क्रूड ऑयल की कीमतों में 30 फीसदी की बढ़ोतरी आ चुकी है. ऐसे में पेट्रोल डीजल के दामों में बढ़ोतरी की संभावना तेज होती जा रही है.

पेट्रोल-डीजल के दामों का इतिहास

पेट्रोल डीजल की कीमतों के इतिहास पर नजर डालें तो फरवरी 2022 में जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने से पहले कच्चा तेल 91.77 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था. उस समय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 95.51 रुपये लीटर और डीजल 86.67 रुपये प्रति लीटर में मिल रहा था. लेकिन युद्ध के चलते कच्चे तेल के दामों में तेज इजाफा देखने को मिला और ये 120 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर जा पहुंचा. तब सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम बढ़ाकर 105.41 रुपये और डीजल के कीमतें बढ़ाकर 96.67 रुपये प्रति लीटर कर दी. महंगे पेट्रोल डीजल के चलते महंगाई में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली जिसके बाद केंद्र सरकार ने पेट्रोल डीजल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी में कटौती करने का फैसला किया. 21 मई 2022 को सरकार ने पेट्रोल पर 8 रुपये और डीजल पर 6 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर दी जिससे पेट्रोल डीजल के दामों में कमी आ गई.

50% सस्ता हुआ क्रूड ऑयल पर आम आदमी को राहत नहीं

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी रहा लेकिन कच्चे तेल के दामों में भारी कमी आ गई. वहीं रूस ने भारत को सस्ते दामों पर कच्चा तेल बेचना शुरू कर दिया. 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले वोटरों को लुभाने के लिए मोदी सरकार ने पेट्रोल डीजल के दामों में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी तब क्रूड ऑयल की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल थी. लेकिन इसके बाद इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें घटने लगी और ये 60 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर आ गया. यानी 2022 के हाई से क्रूड ऑयल प्राइस में लगभग 50 फीसदी की कमी आ गई लेकिन पेट्रोल डीजल के दामों में केवल 10 फीसदी की कमी की गई. जाहिर है इस दौरान केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने सस्ते क्रूड ऑयल का लाभ आम लोगों को नहीं दिया बल्कि भरपूर मुनाफा बनाकर अपनी जेब भरा.

5 वर्षों में वसूले 18 लाख करोड़ ड्यूटी

केंद्र सरकार पेट्रोल पर बेसिक एक्साइज ड्यूटी, स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी, एडिशनल एक्साइज ड्यूटी और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर सेस के नाम पर 21.90 रुपये प्रति लीटर टैक्स वसूली रही है जबकि डीजल पर 17.80 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से टैक्स वसूला जा रहा है.

पेट्रोल डीजल के महंगे होने की बारी

कच्चे तेल के महंगे होने की गणित को इस प्रकार भी समझ सकते हैं. अगर कच्चे तेल के दामों में एक डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी होती है तो सालाना भारत पर 2 बिलियन डॉलर यानी 18500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ जाता है. युद्ध के चलते कच्चा तेल करीब 30 फीसदी महंगा हो चुका है. भारत अपने कुल खपत का 85-90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में सरकारी तेल कंपनियों के लिए क्रूड ऑयल इंपोर्ट करने की लागत बढ़ जाएगी. बहरहाल अमेरिका इजरायल के ईरान पर हमले के बाद से लगातार कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है ऐसे में पेट्रोल डीजल के महंगा होने का डर सताने लगा है. हालांकि सरकार चाहे तो पेट्रोल डीजल पर अपने टैक्स वसूली में कमी कर महंगाई के बोझ से आम लोगों को राहत दे सकती है. पर सवाल उठता है क्या वो ऐसा करेगी या फिर आम लोगों पर इसका बोझ डालेगी?

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