पेट्रोल पर प्रीमियम मार: दाम ₹2.35 बढ़े, पर नॉर्मल तेल क्यों है सस्ता?
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पेट्रोल पर 'प्रीमियम' मार: दाम ₹2.35 बढ़े, पर 'नॉर्मल' तेल क्यों है सस्ता?

मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच प्रीमियम पेट्रोल महंगा, लेकिन सामान्य पेट्रोल के दाम स्थिर; क्या राज्यों में होने वाले चुनाव हैं असली वजह? जानें तेल के खेल का पूरा सच।


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Premium Petrol Got Costlier : मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। भारत में भी इसका असर दिखने लगा है, जहाँ सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने शुक्रवार को प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में ₹2.09 से ₹2.35 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 'नॉर्मल' पेट्रोल और डीजल की कीमतें टस से मस नहीं हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (इंडियन बास्केट) $146 प्रति बैरल के करीब पहुंच चुका है, फिर भी आम आदमी के इस्तेमाल वाले ईंधन के दाम स्थिर हैं। बाजार विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस 'स्थिरता' के पीछे विशुद्ध रूप से चुनावी गणित काम कर रहा है। देश के कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार नहीं चाहती कि ईंधन की बढ़ती कीमतें मतदाताओं के मूड पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डालें।


चुनाव और ईंधन: क्यों नहीं बढ़े आम आदमी के लिए दाम?
भारत में ईंधन की कीमतें तकनीकी रूप से 'डी-रेगुलेटेड' (बाजार आधारित) हैं, लेकिन इतिहास गवाह है कि बड़े चुनावों से पहले अक्सर इनके दाम थम जाते हैं। फिलहाल देश के कई महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतें सीधे तौर पर महंगाई और जनता की जेब से जुड़ी होती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को डर है कि अगर सामान्य पेट्रोल की कीमतें बढ़ाई गईं, तो इसका असर माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन पर पड़ेगा, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाएंगी। चुनावी मौसम में 'महंगाई' सबसे बड़ा मुद्दा होता है, जिसे विपक्षी दल हथियार बना सकते हैं। यही वजह है कि तेल कंपनियों ने सारा बोझ केवल 'प्रीमियम पेट्रोल' पर डाला है, जिसका उपयोग करने वाला वर्ग (लग्जरी कार मालिक) सीमित है और चुनावों पर उसका प्रभाव कम पड़ता है।

तेल कंपनियों का 'मार्जिन' और घाटे की भरपाई
कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद सामान्य पेट्रोल के दाम न बढ़ाना तेल कंपनियों के लिए घाटे का सौदा है। हालांकि, कंपनियां इस घाटे की भरपाई अपने 'बफर स्टॉक' और प्रीमियम ईंधन पर बढ़े हुए मार्जिन से करने की कोशिश कर रही हैं। चूंकि प्रीमियम पेट्रोल (जैसे XP95, Speed, Power) लग्जरी सेगमेंट में आता है, यहाँ कंपनियां कीमतें बदलने के लिए स्वतंत्र हैं। दिल्ली में अब प्रीमियम पेट्रोल ₹112 तक पहुंच गया है, जबकि सामान्य पेट्रोल ₹94.77 पर ही टिका हुआ है।

क्या चुनाव के बाद बढ़ेंगे दाम?
यह अंदेशा जताया जा रहा है कि जैसे ही राज्यों में चुनाव संपन्न होंगे, तेल कंपनियां सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी शुरू कर सकती हैं। फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान 'वोटर सेंटीमेंट' को सुरक्षित रखने पर है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद आम ईंधन की कीमतों को फ्रीज रखना एक सोची-समझी राजनीतिक ढाल है।

प्रमुख शहरों में 'नॉर्मल' पेट्रोल के दाम (पुराने रेट पर बरकरार)
नई दिल्ली: ₹94.77 प्रति लीटर

मुंबई: ₹103.44 प्रति लीटर

कोलकाता: ₹105.45 प्रति लीटर

चेन्नई: ₹100.85 प्रति लीटर


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