
टैरिफ पर भारत-अमेरिका रिश्तों में दरार, रघुराम राजन बोले- अब जागने का मौका
अमेरिका के 50% टैरिफ को आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने मोदी सरकार के लिए बड़ा सबक बताया। उन्होंने कहा भारत को सुधारों और विविध व्यापार रणनीति की ज़रूरत है।
भारत के पूर्व रिज़र्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने के फैसले को नरेंद्र मोदी सरकार के लिए जागने का संकेत बताया है। उनका कहना है कि इतने ऊंचे शुल्क दरें इस बात का सबूत हैं कि दोनों देशों के रिश्ते में गंभीर दरार आ चुकी है।डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत को दंडित करने के लिए टैरिफ का दूसरा 25% हिस्सा लागू किया, जो बुधवार (27 अगस्त) से प्रभावी हो गया।
'किसी एक देश पर निर्भर मत बनो'
एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में वर्षीय अर्थशास्त्री राजन ने कहा कि भारत को किसी एक देश पर ज़्यादा निर्भर नहीं होना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि भारत को विदेशी व्यापार में विविधता लानी होगी और साथ ही आर्थिक सुधारों पर ध्यान देना होगा, ताकि युवाओं के लिए रोज़गार सृजन हेतु 8 से 8.5% की विकास दर हासिल की जा सके।
उन्होंने कहा “यह एक वेक-अप कॉल है। हमें किसी भी एक देश पर ज़्यादा निर्भर नहीं होना चाहिए। हमें पूर्व की ओर, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका सभी के साथ मिलकर आगे बढ़ना होगा। लेकिन असली ज़रूरत उन सुधारों की है, जो हमें 8–8.5% की विकास दर दिला सकें और हमारे युवाओं को रोजगार दे सकें।”
व्यापार, निवेश और वित्त बन गए हथियार
राजन ने चेताया कि आज की दुनिया में व्यापार, निवेश और वित्त को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना था कि भारत को नुकसान इस कारण भी है क्योंकि मूलभूत टैरिफ दरें 25% तय की गई हैं, जबकि एशिया के अन्य देशों पर इससे कहीं कम दरें लागू हैं।
उन्होंने कहा “भारतीय टैरिफ 25% पर तय किए गए हैं, जबकि एशिया के कई देशों में यह दर बहुत कम है। इससे भारत को नुकसान है। इससे साफ है कि संबंध अब टूट चुके हैं। राजन ने यह भी याद दिलाया कि उन्होंने 2013 से 2016 तक मोदी और मनमोहन सिंह, दोनों प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में आरबीआई गवर्नर के रूप में सेवा दी थी।
ट्रंप का टैरिफ पावर-प्ले
राजन ने समझाया कि ट्रंप इतने ऊंचे शुल्क क्यों लगाना चाहते हैं।उनके मुताबिक, ट्रंप यह मानते हैं कि करंट अकाउंट या ट्रेड डेफिसिट इस बात का सबूत है कि दूसरे देश अमेरिका का फायदा उठा रहे हैं, जबकि हकीकत में सस्ते सामान से अमेरिकी उपभोक्ता लाभान्वित होते हैं।
उन्होंने कहा कि यह कदम “न्याय” से ज्यादा “पावर-प्ले” है। यह अमेरिका का वह तरीका है जिसमें वह अपनी सैन्य ताकत की बजाय आर्थिक दबाव का इस्तेमाल करता है।
रूसी तेल पर भारत को सोचना होगा
रघुराम राजन ने यह भी कहा कि भारत को रूस से तेल खरीदने के फायदे और ऊंचे टैरिफ से होने वाले नुकसान का संतुलन करके देखना चाहिए।उनके अनुसार, तेल रिफाइनर कंपनियां तो मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन निर्यातकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा अगर इसका फायदा बहुत बड़ा नहीं है, तो हमें सोचना चाहिए कि क्या इन खरीदों को जारी रखना सही है। भारत को अपनी विदेश नीति और व्यापार रणनीति को संतुलित करते हुए सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे। सिर्फ एक देश पर भरोसा करना जोखिमभरा है और रूस से तेल खरीद का लाभ-हानि संतुलन करके आगे की रणनीति तय करनी होगी।