जनवरी में 2.75% रही खुदरा महंगाई दर, CPI मांपने का नया ढांचा लागू, Airfare - OTT - E-Com खर्च भी अब शामिल
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जनवरी में 2.75% रही खुदरा महंगाई दर, CPI मांपने का नया ढांचा लागू, Airfare - OTT - E-Com खर्च भी अब शामिल

नई CPI Basket में तकनीक के बढ़ते असर को देखते हुए अब OTT सेवाएं, ऑनलाइन कीमतें, मोबाइल प्लान, हवाई किराया और ई-कॉमर्स डेटा भी CPI में जोड़ा गया है.


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जनवरी 2026 में खुदरा महंगाई दर 2.75 फीसदी रही है. खाने-पीने की चीजों के दामों में इजाफा और कीमती धातु जैसे सोने-चांदी के दामों में उछाल के चलते खुदरा महंगाई दर में बढ़ोतरी आई है. जनवरी 2026 से खुदरा महंगाई दर का आंकड़ा नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित है. कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स जारी करने करने के लिए बेस ईयर को 2012 की जगह 2024 कर दिया गया है और इसे तैयार करने के लिए Household Consumption Expenditure Survey 2023-24 को आधार बनाया गया है.

पुराने सीरीज के मुताबिक दिसंबर 2025 में खुदरा महंगाई दर 1.33 फीसदी थी. जनवरी महीने में महंगाई में इजाफा देखने को मिला है फिर भी यह पिछले 12 महीनों से लगातार आरबीआई के 4% लक्ष्य से नीचे बनी हुई है. हालांकि नए सीरीज के तहत महंगाई को मांपने का तरीका बदल गया है.

खाने-पीने की चीजों का असर

नई CPI टोकरी में खाने-पीने की चीजों का हिस्सा कम कर दिया गया है. खाद्य महंगाई दर जनवरी 2026 में करीब 2.13% रही है. CPI में इनका हिस्सा अब 36.75% है, जो पहले करीब 46% था. फूड बास्केट के वजन कम होने के मतलब है कि खाने-पीने की चीजों में उछाल या गिरावट के चलते महंगाई दर के आंकड़ों में तेज उछाल या गिरावट नहीं आएगी. इससे RBI को महंगाई नियंत्रण में मदद मिल सकती है.

लोगों के खर्च का बदला पैटर्न

नई CPI 2023-24 के उपभोक्ता खर्च सर्वे पर आधारित है. पिछले 10 साल में घरेलू खर्च लगभग दोगुना हुआ है. चावल-गेहूं जैसे अनाज पर खर्च कम हुआ है. फल, सब्जी, दूध, मांस और मछली पर खर्च बढ़ा है. यह बदलाव गांव और शहर दोनों में दिख रहा है.

नई चीजें शामिल, पुरानी हटाई गईं

नई CPI टोकरी में तकनीक के बढ़ते असर को देखते हुए अब OTT सेवाएं, ऑनलाइन कीमतें, मोबाइल प्लान, हवाई किराया और ई-कॉमर्स डेटा भी CPI में जोड़ा गया है. इसके अलावा जो नई चीजें जो जोड़ी गईं है उसके मुताबिक ग्रामीण आवास, वैल्यू-एडेड डेयरी उत्पाद, जौ और उससे बने उत्पाद, पेन-ड्राइव व एक्सटर्नल हार्ड डिस्क, देखभाल करने वाले (अटेंडेंट), बेबीसिटर और व्यायाम उपकरण भी शामिल है. नई CPI सीरीज से जिन चीजों को हटाया गया है उसमें वीसीआर/वीसीडी/डीवीडी प्लेयर और उनके किराये, रेडियो, टेप रिकॉर्डर, सेकेंड-हैंड कपड़े, सीडी/डीवीडी ऑडियो-वीडियो कैसेट और कोयर/रस्सी शामिल है. गांवों और शहरों में डेटा इकट्ठा करने का दायरा भी बढ़ाया गया है, ताकि महंगाई का आंकड़ा ज्यादा सही दिखे. नई CPI सीरीज का मकसद लोगों के असली खर्च को बेहतर तरीके से दिखाना है. अब बाजार और नीति-निर्माता शुरुआती आंकड़ों पर नजर रखेंगे, ताकि समझा जा सके कि इन बदलावों से भारत में महंगाई की दिशा आने वाले समय में कैसी रहेगी.

महंगाई मांपने का तरीका बदला

दरअसल भारत में महंगाई मापने का तरीका अब बदल गया है. सरकार ने CPI 2024 सीरीज़ लागू की है, जिससे यह समझना आसान होगा कि आम लोगों के रोज़मर्रा के खर्च में कीमतें कैसे बदल रही हैं. नई सीरीज़ में 2024 को बेस ईयर (100) माना गया है और इसे लोगों के ताज़ा खर्च के पैटर्न के आधार पर तैयार किया गया है.

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI वह पैमाना है जिससे पता चलता है कि घरों द्वारा खरीदी जाने वाली चीज़ों और सेवाओं की कीमतें समय के साथ कितनी बढ़ी या घटी हैं. इसी के साल-दर-साल बदलाव से महंगाई दर निकाली जाती है. नई सीरीज़ को हाउसहोल्ड कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर सर्वे 2023-24 के आधार पर अपडेट किया गया है, ताकि यह आज की जीवनशैली और खर्च की आदतों को सही तरह दिखा सके.

नई व्यवस्था में कवरेज भी बढ़ाया गया है. अब CPI में 1,465 ग्रामीण बाजार, 1,395 शहरी बाजार (434 शहरों में) और 12 बड़े शहरों के ऑनलाइन बाजार शामिल हैं. बाजार की कीमतें हर महीने और ऑनलाइन कीमतें हर हफ्ते जुटाई जाती हैं. खास बात यह है कि अब डेटा टैबलेट-आधारित डिजिटल सिस्टम से लिया जा रहा है, जिससे आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी. CPI 2024 में कई अहम बदलाव किए गए हैं। कुल आइटम की संख्या 299 से बढ़ाकर 358 कर दी गई है, जिसमें सामान और सेवाओं दोनों का दायरा बढ़ा है. नई सीरीज़ में ग्रामीण हाउसिंग को भी शामिल किया गया है और घर से जुड़े खर्च का वजन करीब 11.76% रखा गया है. वहीं मुफ्त मिलने वाली सरकारी सुविधाओं को CPI में शामिल नहीं किया गया, क्योंकि इस सूचकांक में केवल वही खर्च गिने जाते हैं जिन पर लोग वास्तव में पैसा खर्च करते हैं.

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