1 डॉलर के लिए अब 95 रुपये खर्च करने पड़ेंगे, सीतारमण बोलीं- सब चंगा सी
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वर्तमान वित्त वर्ष में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 10% तक कमजोर हो चुका है। (प्रतीकात्मक चित्र)

1 डॉलर के लिए अब 95 रुपये खर्च करने पड़ेंगे, सीतारमण बोलीं- सब चंगा सी

पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद रुपये में 4.1% की गिरावट आई है और 27 मार्च को यह 94.82 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ।


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सोमवार को अंतर-दिवसीय कारोबार में रुपया 95 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया और अंत में 94.78 (प्रोविजनल) पर बंद हुआ। ईरान युद्ध के तेज़ होने से वैश्विक बाजारों में हलचल मची, जिससे रुपये में उतार-चढ़ाव और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी।

फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, USD/INR में दिनभर में 1.65 रुपये (165 पैसे) का उतार-चढ़ाव देखने को मिला, क्योंकि पश्चिम एशिया संकट 31वें दिन में पहुंच गया और ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी रही।

इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 93.62 पर खुला और बाद में 93.57 तक मजबूत हुआ। यह पिछले बंद स्तर से 1.28 रुपये की बढ़त थी। यह बढ़त भारतीय रिजर्व बैंक के उस फैसले के बाद आई, जिसमें बैंकों के लिए नेट ओपन पोजिशन (NOP-INR) की सीमा 100 मिलियन डॉलर तय की गई।

27 मार्च 2026 के सर्कुलर के अनुसार, RBI ने बैंकों के लिए यह सीमा तय की है, जिसका पालन 10 अप्रैल तक करना होगा।

हालांकि, यह मजबूती ज्यादा देर नहीं टिक सकी और रुपया गिरकर दिन के दौरान 95.22 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया।

दिन के अंत में रुपया 94.78 (प्रोविजनल) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद 94.85 के मुकाबले 7 पैसे की मामूली बढ़त है।

शुक्रवार को रुपया 89 पैसे गिरकर 94.85 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ था।

CR Forex Advisors के एमडी अमित पाबरी के अनुसार,“इस कमजोरी की मुख्य वजह वैश्विक हालात हैं। अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की उम्मीदें खत्म हो गई हैं, जिससे निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर जा रहे हैं। इससे डॉलर मजबूत और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं, जैसे रुपया, कमजोर हो रही हैं।”

ट्रेडर्स का कहना है कि मजबूत डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी रुपये पर दबाव बना रही हैं। सुरक्षित निवेश (safe haven) की मांग के कारण डॉलर इंडेक्स 100 के ऊपर बना हुआ है, जिससे रुपये की रिकवरी सीमित हो रही है।

ब्रेंट क्रूड (वैश्विक तेल बेंचमार्क) 2.60% बढ़कर 114.97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जिससे सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।

घरेलू शेयर बाजार में भी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1,635.67 अंक गिरकर 71,947.55 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 488.20 अंक गिरकर 22,331.40 पर आ गया।

एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को 4,367.30 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

इस बीच, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत है और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले रुपया “पूरी तरह ठीक” प्रदर्शन कर रहा है।

28 फरवरी 2026 से शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद रुपये में 4.1% की गिरावट दर्ज की गई है और 27 मार्च को यह 94.82 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि रुपये की कीमत बाजार द्वारा तय होती है और कई कारकों से प्रभावित होती है। उन्होंने कहा, “सरकार और RBI रुपये की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।”

वर्तमान वित्त वर्ष में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 10% तक कमजोर हो चुका है।

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