रुपये में आई ऐतिहासिक गिरावट, डॉलर पहुंचा 93 के पार, ईरान-इजरायल युद्ध ने बिगाड़ा खेल!
x

रुपये में आई ऐतिहासिक गिरावट, डॉलर पहुंचा 93 के पार, ईरान-इजरायल युद्ध ने बिगाड़ा खेल!

शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 93.28 पर गिर गया। इस साल रुपया एशियाई मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया है।


Doller vs Rupee: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए शुक्रवार का दिन एक बड़ा झटका लेकर आया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर गिर गया है। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये ने पहली बार 93 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को रुपया 64 पैसे यानी 0.69% टूटकर 93.28 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 92.63 पर बंद हुआ था।

एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बना रुपया

साल 2026 की शुरुआत से ही रुपये पर दबाव बना हुआ है। इस साल अब तक रुपया 3.64% तक गिर चुका है, जिससे यह अपने एशियाई समकक्षों के बीच सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक बन गया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों को डरा दिया है, जिसका सीधा असर उभरते बाजारों की करेंसी पर दिख रहा है।

ईरान-इजरायल जंग और कच्चे तेल का उबाल

रुपये की इस दुर्गति के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी तेजी है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 10.9% उछलकर 119.1 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। यह उछाल तब आया जब इजरायल ने ईरान के 'साउथ पार्स' गैस फील्ड पर हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि उनके ऊर्जा केंद्र अब राडार पर हैं।

हालांकि, शुक्रवार सुबह तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी देखी गई और यह 107.2 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने बाजार को थोड़ा शांत करने की कोशिश की है, जिसमें कहा गया है कि वे फिलहाल ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर आगे हमले या सैनिकों की तैनाती नहीं चाहते।

भारत पर क्या होगा असर?

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली का कहना है कि जब तक तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के पास नहीं आतीं, रुपया असुरक्षित बना रहेगा। कच्चे तेल की कीमतों में 10% की वृद्धि भारत की आर्थिक विकास दर (GDP) में 15 बेसिस पॉइंट की गिरावट ला सकती है और महंगाई को 30 बेसिस पॉइंट तक बढ़ा सकती है।

इससे भारत का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) और राजकोषीय घाटा दोनों बढ़ने का खतरा है। अब बाजार की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप पर टिकी हैं। अगर RBI बाजार में डॉलर नहीं बेचता है, तो रुपये की गिरावट और गहरा सकती है।

अब आगे क्या होगा?

इनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, रुपया फिलहाल 92.8 के ऊपर ट्रेड कर रहा है, जो लगातार दबाव का संकेत है। अगर डॉलर का भाव 93.00 के ऊपर बना रहता है, तो यह जल्द ही 93.20 से 93.40 के स्तर तक जा सकता है। रुपये के लिए फिलहाल 92.70 पर एक छोटा सपोर्ट दिख रहा है, लेकिन वैश्विक जोखिमों को देखते हुए फिलहाल रिकवरी मुश्किल लग रही है।

Read More
Next Story