सैम ऑल्टमैन की चेतावनी: इंसानों से सस्ती होगी AI, नौकरियों पर बड़ा संकट
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सैम ऑल्टमैन की चेतावनी: इंसानों से सस्ती होगी AI, नौकरियों पर बड़ा संकट

OpenAI CEO सैम ऑल्टमैन ने फोर्ब्स को बताया कि AI अब इंसानी श्रम से अधिक ऊर्जा-कुशल है। भविष्य में बड़े पैमाने पर नौकरियों और संसाधनों के बदलाव की दी चेतावनी।


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AI And Job's Future : ओपनएआई (OpenAI) के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य को लेकर चौंकाने वाले दावे किए हैं। फोर्ब्स को दिए एक इंटरव्यू में ऑल्टमैन ने कहा कि एआई अब मानव श्रम की तुलना में अधिक सस्ता और ऊर्जा-कुशल होने की राह पर है। उनका तर्क है कि एआई मॉडल चलाने की लागत, विशेष रूप से 'इनफरेंस' (आउटपुट जनरेशन) चरण में, समान बौद्धिक कार्य करने के लिए आवश्यक मानवीय ऊर्जा से काफी कम है। ऑल्टमैन के अनुसार, जहां इंसानी बुद्धिमत्ता को विकसित होने में दशकों की जैविक 'ट्रेनिंग' और जीवनभर की ऊर्जा लगती है, वहीं एआई सिस्टम प्रति-यूनिट बौद्धिक आउटपुट के मामले में अत्यधिक कुशल होते जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यह बदलाव वैश्विक नौकरियों और संसाधनों की मांग में बड़ी उथल-पुथल ला सकता है।


सैम ऑल्टमैन का मानना है कि एआई का अर्थशास्त्र तेजी से बदल रहा है। उनका कहना है कि आने वाले समय में एआई टूल्स का इस्तेमाल इतना बढ़ जाएगा कि यह प्रति कार्य (Per Task) सस्ता होने के बावजूद कुल वैश्विक ऊर्जा खपत को बढ़ा सकता है। यह तकनीक न केवल काम करने के तरीके को बदलेगी, बल्कि दुनिया भर के देशों के लिए संसाधनों के आवंटन की नई रणनीतिक चुनौतियां भी पेश करेगी।

नौकरियों पर असमान प्रभाव
ऑल्टमैन ने स्पष्ट किया कि एआई का नौकरियों पर 'बड़ा प्रभाव' पड़ेगा, लेकिन यह एक समान नहीं होगा। कुछ भूमिकाएं पूरी तरह से ऑटोमेट हो जाएंगी, जबकि कुछ में आंशिक बदलाव आएगा। उन्होंने यूट्यूबर्स का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे अतीत में नई श्रेणियों के काम उभरे, वैसे ही भविष्य में भी नए करियर सामने आएंगे। उनके अनुसार, अब कोडिंग जैसे कौशल के बजाय अनुकूलन क्षमता (Adaptability), लचीलापन और एआई टूल्स के उपयोग में दक्षता अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।

भारत: एआई का सबसे उभरता हुआ बाजार
इंटरव्यू में ऑल्टमैन ने भारत को एआई अपनाने के मामले में सबसे गतिशील बाजारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि भारत इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर एप्लीकेशन तक हर स्तर पर निवेश कर रहा है। वर्तमान में भारत ओपनएआई के कोडिंग उत्पादों के लिए सबसे तेजी से बढ़ने वाला बाजार है और जल्द ही यह कंपनी का सबसे बड़ा बाजार बन सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि पारंपरिक इंटरनेट सेवाओं की तुलना में एआई सेवाएं प्रदान करना महंगा है, इसलिए कंपनियों को भारत जैसे बाजारों में इसे आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के तरीके खोजने होंगे।

शिक्षा प्रणाली में बदलाव की जरूरत
'कॉग्निटिव ऑफलोडिंग' या इंसानी सोच में कमी की चिंताओं पर ऑल्टमैन ने कहा कि असली जोखिम तकनीक नहीं, बल्कि हमारी पुरानी शिक्षा प्रणाली है। यदि शिक्षण पद्धतियां नहीं बदलीं, तो छात्र एआई पर अत्यधिक निर्भर हो सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य की शिक्षा प्रणाली को इस तरह डिजाइन किया जाना चाहिए जहां एआई टूल्स की उपलब्धता को सामान्य माना जाए, लेकिन छात्रों से महत्वपूर्ण सोच, रचनात्मकता और समस्या समाधान की मांग की जाए।

सुरक्षा और निजी एआई एजेंट
एआई-संचालित व्यक्तिगत एजेंटों के व्यापक उपयोग में ऑल्टमैन सुरक्षा और गोपनीयता को सबसे बड़ी बाधा मानते हैं। उनका कहना है कि वर्तमान सिस्टम अभी इतने विश्वसनीय नहीं हैं कि उन्हें संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा सौंपा जा सके। 'प्रॉम्प्ट इंजेक्शन' जैसे हमलों का जोखिम अभी भी बना हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक बार मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार हो जाने के बाद, इन पर्सनल एजेंटों को तेजी से अपनाया जाएगा।


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