होली पर खुला शेयर बाज़ार : ईरान युद्ध से हाहाकार, सेंसेक्स 1700 अंक टूटा
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होली पर खुला शेयर बाज़ार : ईरान युद्ध से हाहाकार, सेंसेक्स 1700 अंक टूटा

शेयर बाजार में ब्लैक वेडनेसडे! ईरान युद्ध के चलते सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम। रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा और क्रूड ऑयल की कीमतों में लगी आग। जानें ताजा अपडेट।


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War Impact On Share Market : मिडिल ईस्ट में जारी ईरान युद्ध का भीषण असर अब भारतीय शेयर बाजार पर दिखने लगा है। बुधवार सुबह बाजार खुलते ही निवेशकों में अफरा-तफरी मच गई और सेंसेक्स-निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गए। मंगलवार को होली की छुट्टी के बाद जब आज बुधवार 4 मार्च को बाजार खुला, तो ग्लोबल मार्केट से मिले बेहद खराब संकेतों ने घरेलू निवेशकों का मनोबल तोड़ दिया। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 1,700 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ 78,500 के स्तर के नीचे फिसल गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 500 अंकों से ज्यादा टूटकर 24,350 के करीब कारोबार करता दिखा।


युद्ध के कारण दुनियाभर के बाजारों में जोखिम बढ़ गया है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। बाजार में आई इस सुनामी के कारण चंद मिनटों में निवेशकों की संपत्ति में भारी सेंध लगी है। बैंकिंग, ऑटो और कंज्यूमर गुड्स जैसे सेक्टरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी जा रही है। बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक युद्ध की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, बाजार में इसी तरह की भारी अस्थिरता बनी रह सकती है। रुपये की रिकॉर्ड गिरावट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार की कमर तोड़ दी है।

बाजार में चौतरफा बिकवाली, रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर
बुधवार सुबह 9:17 बजे तक निफ्टी 50 करीब 2.06% यानी 517.30 अंक गिरकर 24,344.05 पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, सेंसेक्स 2.17% की गिरावट के साथ 78,596.45 पर आ गया। बाजार की इस गिरावट में केवल आईटी सेक्टर ही कुछ हद तक संभलता नजर आया। इन्फोसिस, बीईएल और एचसीएल टेक जैसे चंद शेयर ही हरे निशान में ट्रेड कर रहे थे। दूसरी ओर, एलएंडटी के शेयरों में बड़ी गिरावट आई और यह पिछले चार सत्रों में 12% तक टूटकर एक महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी भारी बिकवाली का दबाव बना हुआ है।

शेयर बाजार के साथ-साथ मुद्रा बाजार से भी बुरी खबर आई है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 55 पैसे की भारी गिरावट के साथ 92.02 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला। यह पहली बार है जब रुपया 92 के पार निकला है। विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने और युद्ध के कारण डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव बढ़ा है। रुपये की इस कमजोरी से भारत का आयात महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है।

कच्चे तेल में लगी आग और एशियाई बाजारों का हाल
ईरान युद्ध का सबसे बड़ा असर कमोडिटी मार्केट पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें उछलकर $82.77 प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं, जो जुलाई 2024 के बाद का उच्चतम स्तर है। पिछले चार दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 17% की तेजी आई है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार संतुलन के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। ट्रेड रूट में पैदा हुए व्यवधान ने सप्लाई चेन को भी प्रभावित किया है।

भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया के शेयर बाजारों में आज मातम छाया हुआ है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 7% तक गोता लगा गया। जापान का निक्केई 3.23% और हांगकांग का हैंगसेंग 1.5% की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। वॉल स्ट्रीट पर भी मंगलवार रात भारी उतार-चढ़ाव देखा गया था, जहां डाओ जोन्स निचले स्तरों से सुधरने के बावजूद 400 अंक गिरकर बंद हुआ। ग्लोबल मार्केट की यह बेचैनी संकेत दे रही है कि युद्ध का आर्थिक खर्च अब दुनिया को भुगतना पड़ रहा है।

खर्च और घाटे का बढ़ता बोझ
बाजार की इस गिरावट में सबसे चिंताजनक पहलू युद्ध का 'आर्थिक खर्च' है। जैसा कि युद्ध अब लंबा खींचता दिख रहा है, अमेरिका और उसके सहयोगियों का रक्षा बजट तेजी से खत्म हो रहा है। सस्ते ईरानी ड्रोन्स को गिराने के लिए महंगे पैट्रियट मिसाइलों का उपयोग पश्चिमी देशों की तिजोरी खाली कर रहा है। निवेशकों को डर है कि यदि यह संघर्ष और फैला तो वैश्विक मंदी दस्तक दे सकती है। भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

आज की गिरावट ने पिछले कई महीनों की बढ़त को साफ कर दिया है। सोमवार को निफ्टी 24,603 के स्तर पर बंद हुआ था, लेकिन आज की गिरावट ने इसे तकनीकी रूप से कमजोर कर दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को फिलहाल नई खरीदारी से बचना चाहिए और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करना चाहिए। युद्ध की अनिश्चितता और कच्चे तेल का बढ़ता बोझ आने वाले दिनों में सेंसेक्स को और नीचे धकेल सकता है।


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