
बजट 2026 में कितने बदल गए SGB के टैक्स नियम? , निवेशकों पर भारी है नया बजट प्रस्ताव
बजट 2026 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) से जुड़े टैक्स नियमों में एक अहम बदलाव किया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अब कैपिटल गेन टैक्स में छूट केवल तभी मिलेगी, जब SGB को इश्यू के समय खरीदा गया हो और मैच्योरिटी तक रखा गया हो।
बजट 2026 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) के टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। 1 अप्रैल 2026 से कैपिटल गेन टैक्स में छूट केवल उन्हीं निवेशकों को मिलेगी, जो SGB को जारी होने के समय खरीदते हैं और मैच्योरिटी तक होल्ड करते हैं। सेकेंडरी मार्केट से SGB खरीदने वालों को अब कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। इसका असर उन निवेशकों पर पड़ेगा, जो अब तक सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए SGB पर टैक्स-फ्री मुनाफ़ा लेते थे।
सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए SGB पर अब कैपिटल गेन टैक्स की छूट नहीं मिलेगी। सेकेंडरी मार्केट वह बाज़ार है, जहां ऐसे बॉन्ड RBI द्वारा तय की जाने वाली तारीख़ से ट्रेड किए जा सकते हैं। SGB से जुड़ा यह नया टैक्स नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।
नया नियम लागू होने के बाद क्या होगा?
नया नियम लागू होने के बाद, सेकेंडरी मार्केट से SGB खरीदने वाले निवेशकों को भारी टैक्स चुकाना पड़ सकता है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर 12.5% की दर से टैक्स लगेगा और इसमें इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि, पहले की तरह SGB पर मिलने वाला ब्याज सभी निवेशकों के लिए टैक्सेबल रहेगा।
उदाहरण के ज़रिये समझिए सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए SGB पर 20 लाख रुपये का LTCG होने पर, 1 अप्रैल 2026 के बाद किसी व्यक्ति को लगभग 2.60 लाख रुपये इनकम टैक्स देना होगा, जबकि मौजूदा नियमों के तहत इस पर टैक्स शून्य है।
बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने SGB टैक्सेशन पर कहा कि, “यह प्रस्ताव किया जाता है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) पर कैपिटल गेन टैक्स से छूट केवल उसी स्थिति में दी जाएगी, जब ऐसे बॉन्ड किसी व्यक्ति द्वारा मूल इश्यू के समय सब्सक्राइब किए गए हों और उन्हें मैच्योरिटी तक लगातार होल्ड किया गया हो।”
सेकेंडरी मार्केट से SGB खरीदने वाले निवेशकों पर असर
टैक्समैन ने अपनी यूनियन बजट 2026–27 रिपोर्ट में बताया है कि पहले के नियमों के तहत, सेकेंडरी मार्केट से SGB खरीदने और बाद में उन्हें रिडीम करने वाला व्यक्ति भी टैक्स छूट का लाभ ले सकता था।
संशोधित प्रावधान के तहत, अब यह छूट केवल उसी मूल निवेशक (ओरिजिनल सब्सक्राइबर) को मिलेगी, जिसने बॉन्ड को इश्यू की तारीख़ से लेकर मैच्योरिटी तक होल्ड किया हो। इससे टैक्स छूट का दायरा काफ़ी सीमित हो गया है और सेकेंडरी मार्केट निवेशकों तथा समय से पहले रिडेम्पशन के मामलों में टैक्स का नतीजा बदल जाएगा। ऐसे मामलों में होने वाला कैपिटल गेन अब टैक्सेबल होगा।

