शेयर बाजार में लगातार पांचवें महीने गिरावट, निवेशकों को भारी नुकसान
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शेयर बाजार में लगातार पांचवें महीने गिरावट, निवेशकों को भारी नुकसान

Share Market News: इस समय शेयर बाजार निराश कर रहा है। पिछले पांच महीने से शेयर मार्केट में ज्यादातर कारोबारी दिन में गिरावट दर्ज की गई है।


Sensex Nifty News: फरवरी के आखिरी कारोबारी दिन भी शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। यह लगातार पांचवां महीना है जब बाजार में गिरावट आई है। निफ्टी के औपचारिक रूप से शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब इसमें लगातार पांच महीने तक गिरावट देखी गई है। सितंबर 2023 से बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है, जिससे निवेशकों के करीब 85 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं।

इतिहास में पहली बार इतनी लंबी गिरावट

अगर इतिहास पर नजर डालें, तो निफ्टी में चार या उससे अधिक महीनों तक गिरावट केवल छह बार हुई है। सबसे लंबी गिरावट सितंबर 1994 से अप्रैल 1995 के बीच दर्ज की गई थी, जब निफ्टी लगातार आठ महीनों तक गिरकर 31.4% नीचे आ गया था। हालांकि, यह निफ्टी के आधिकारिक लॉन्च से पहले की बात है। निफ्टी की औपचारिक शुरुआत 22 अप्रैल 1996 को हुई थी। इसके बाद सबसे लंबी गिरावट जुलाई से नवंबर 1996 के बीच देखी गई थी, जब निफ्टी 26% तक गिर गया था। मौजूदा गिरावट तुलनात्मक रूप से कम है, क्योंकि पिछले पांच महीनों में यह 11.68% तक सीमित रही है।

निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट

सितंबर 2023 में बाजार अपने चरम पर था, लेकिन तब से अब तक भारी गिरावट देखी गई है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 85 लाख करोड़ रुपये घटकर 393 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

निफ्टी: अपने उच्चतम स्तर से 14% गिर चुका है।

निफ्टी नेक्स्ट 50: करीब 25% तक नीचे आया है।

स्मॉलकैप और माइक्रोकैप शेयर: 24-25% तक गिर चुके हैं, जिससे वे बियर मार्केट में प्रवेश कर चुके हैं।बियर मार्केट वह स्थिति होती है जब बाजार में लगातार गिरावट हो रही होती है और निवेशकों का विश्वास डगमगा जाता है।

क्या गिरावट जारी रहेगी?

ट्रेडर्स और एनालिस्ट्स भविष्य को लेकर चिंतित हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह गिरावट समाप्त हो चुकी है, या आगे और गिरावट देखने को मिलेगी? इस गिरावट के कारण शेयरों का मूल्यांकन अब आकर्षक हो गया है। 22,500 के नीचे निफ्टी निवेशकों के लिए अच्छा अवसर प्रदान कर सकता है।RBI के नरम रुख के कारण वित्तीय शेयरों में निवेश को अच्छा विकल्प माना जा रहा है।ब्रोकरेज हाउस के पसंदीदा सेक्टर: कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी, हेल्थकेयर और टेलीकॉम।

FII की निकासी और भविष्य की संभावनाएं

अक्टूबर 2024 से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयरों और बॉन्ड से 20 अरब डॉलर से अधिक की निकासी की है, जो हाल के इतिहास में सबसे बड़ी निकासी में से एक है। वैश्विक अनिश्चितता, घरेलू मांग में गिरावट और लगातार FDI निकासी के कारण मुद्रा और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) प्रवाह में अस्थिरता बनी रह सकती है।हालांकि, उनका अनुमान है कि आमतौर पर 4-9 महीनों के भीतर FII की निकासी अपने चरम पर पहुंच जाती है।वित्त वर्ष 2026 में बढ़ते पूंजीगत व्यय और संभावित कर कटौती के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि में सुधार होने की उम्मीद है।

मौजूदा गिरावट कितनी गंभीर?

हालांकि यह गिरावट सबसे लंबी मासिक गिरावट है, लेकिन यह पिछली बड़ी गिरावटों की तुलना में कम गंभीर है।

1994-95: निफ्टी में 31.4% की गिरावट।

1996: निफ्टी 26% गिरा।

2008: वैश्विक वित्तीय संकट में भारी गिरावट।

2020: COVID-19 महामारी के कारण तेज गिरावट।

मौजूदा गिरावट पिछली गिरावटों की तुलना में कम गंभीर है, लेकिन बाजार की दिशा अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। निवेशकों को सतर्क रहने और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी जाती है।


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