Strait Of Hormuz : मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आ रहा 'शेनलोंग' (Shenlong Suezmax) टैंकर सुरक्षित मुंबई पहुंच गया है। यह जहाज अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के दौरान होर्मुज की खाड़ी पार करने वाला पहला जहाज है। लाइबेरिया के झंडे वाला यह टैंकर गुरुवार को मुंबई पोर्ट के जवाहर द्वीप टर्मिनल पर सफलतापूर्वक लग गया है। इस मिशन का नेतृत्व एक भारतीय कैप्टन ने किया जिन्होंने युद्धग्रस्त क्षेत्र में अदम्य साहस का परिचय दिया। वर्तमान में ईरान और इजरायल के बीच जारी हवाई हमलों ने वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मचा रखा है। इस तनावपूर्ण माहौल में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं। भारत के लिए यह टैंकर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की आधी तेल आपूर्ति इसी मार्ग पर निर्भर है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में 'अदृश्य' हुआ जहाज
सऊदी अरब के रास तनुरा पोर्ट से यह जहाज 1 मार्च को रवाना हुआ था। समुद्री रडार के आंकड़ों के मुताबिक 8 मार्च को जहाज अचानक गायब हो गया था। दरअसल चालक दल ने सुरक्षा के लिहाज से जहाज के सिग्नल बंद कर दिए थे। इसे समुद्री रक्षा की भाषा में 'गोइंग डार्क' तकनीक कहा जाता है। दुश्मन के रडार और ईरानी मिसाइलों से बचने के लिए यह कदम उठाया गया था। लगभग 24 घंटे तक जहाज बिना किसी ट्रैकिंग के खतरनाक पानी में आगे बढ़ता रहा। जोखिम भरे क्षेत्र को पार करने के बाद जहाज पुनः ट्रैकिंग सिस्टम पर दिखाई दिया।
कैप्टन सुक्षांत सिंह संधू का सफल नेतृत्व
इस चुनौतीपूर्ण समुद्री सफर की कमान कैप्टन सुक्षांत सिंह संधू के हाथों में थी। जहाज पर भारत और पाकिस्तान सहित कुल 29 चालक दल के सदस्य सवार थे। शेनलोंग शिपिंग लिमिटेड का यह जहाज 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल ढो रहा था। एथेंस स्थित डायनाकॉम टैंकर मैनेजमेंट कंपनी इस विशालकाय जहाज का संचालन कर रही है। कैप्टन संधू की रणनीतिक सूझबूझ ने करोड़ों डॉलर के कार्गो को सुरक्षित बचा लिया। भारतीय बंदरगाह पर पहुंचते ही चालक दल का जोरदार स्वागत किया गया।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर युद्ध का साया
ईरान और इजरायल के बीच जारी जंग में अब तक 2,000 लोग मारे गए हैं। अमेरिकी और इजरायली हमलों ने ईरान के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। जवाब में ईरान ने भी खाड़ी में मौजूद व्यापारिक जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं। अब तक कुल 14 व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इसे 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा झटका बताया है। ऐसी स्थिति में 'शेनलोंग' का मुंबई पहुंचना भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत है।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल
युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह से चरमरा गई है। गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतें 5 प्रतिशत तक उछलकर 100 डॉलर के पार गईं। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह आर्थिक केंद्रों को भी निशाना बना सकता है। अमेरिका ने स्थिति संभालने के लिए रणनीतिक भंडार से तेल निकालने की घोषणा की है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ी नजर रखेगा। भारत के लिए यह मार्ग जीवन रेखा की तरह काम करता है। 'शेनलोंग' की सफलता ने भविष्य की तेल आपूर्ति के लिए नया रास्ता दिखाया है।