
चांदी में रिकॉर्ड तेजी : Comex पर पहली बार 100 डॉलर प्रति औंस के पार, क्या करे निवेशक?
विशेषज्ञों का मानना है कि नए निवेश के लिए बेहतर होगा कि कीमतों में कुछ समय का ठहराव या गिरावट आने का इंतजार किया जाए, बजाय इसके कि रिकॉर्ड ऊंचाई पर जल्दबाजी में एंट्री ली जाए
कॉमेक्स बाजार पर चांदी ने इतिहास रच दिया है। 23 जनवरी को शाम 4:25 बजे (GMT) चांदी पहली बार 100 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गई। यह अपने पिछले बंद भाव से 4.24 प्रतिशत की बढ़त है। चांदी के दाम इसलिए तेजी से बढ़ रहे हैं क्योंकि दुनिया में राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है, डॉलर कमजोर हो रहा है और उद्योगों में चांदी की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है। इन वजहों से निवेशक चांदी में पैसा लगा रहे हैं और इसी कारण इसके दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।
एमसीएक्स पर भी रिकॉर्ड स्तर
भारत में एमसीएक्स (MCX) पर चांदी के घरेलू वायदा भाव शुक्रवार को सुबह 11:21 बजे रिकॉर्ड 3,41,300 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए। बाद में यह 3,39,217 रुपये पर कारोबार करती दिखी, जो पिछले बंद भाव 3,32,393 रुपये से 2.05 प्रतिशत अधिक है।
इससे पहले 22 जनवरी को एमसीएक्स पर चांदी 3,38,804 रुपये के स्तर पर पहुंची थी।
इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) ने शाम 6:30 बजे के रेट सत्र में चांदी की कीमत 3,17,705 रुपये प्रति किलोग्राम तय की, जो पिछले 24 घंटों में लगभग 6 प्रतिशत की बढ़त दर्शाती है।
चांदी के दाम बढ़ने में लगा समय
चांदी में तेज़ी का आलम ये रहा कि जैसे-जैसे कीमत बढ़ी, चांदी की रफ्तार और तेज होती चली गई। चांदी के दाम बढ़ने में कितना समय लगा, इसे इस आंकड़े से समझ सकते हैं-
20 से 30 डॉलर: 145 दिन
30 से 40 डॉलर: 145 दिन
40 से 50 डॉलर: 39 दिन
50 से 60 डॉलर: 12 दिन
60 से 70 डॉलर: 13 दिन
70 से 80 डॉलर: 6 दिन
80 से 90 डॉलर: 15 दिन
90 से 100 डॉलर: 10 दिन
100 डॉलर का स्तर क्यों अहम है?
ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म VT Market के एपीएसी क्षेत्र के सीनियर मार्केट एनालिस्ट जस्टिन खू के अनुसार,“कॉमेक्स पर चांदी का 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचना एक मजबूत मनोवैज्ञानिक पड़ाव है। यह तेजी भू-राजनीतिक अनिश्चितता, मुद्रा अवमूल्यन, मजबूत औद्योगिक मांग और नए ऑल-टाइम हाई पर ब्रेकआउट के बाद आई सट्टा गतिविधियों का नतीजा है।”
चांदी में तेजी की वजहें
चांदी की कीमतों में उछाल के पीछे कई अहम कारण हैं- ऐतिहासिक शॉर्ट स्क्वीज, खुदरा निवेशकों की मजबूत भागीदारी, चीन द्वारा चांदी और धातुओं के निर्यात पर सख्ती
और आपूर्ति को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताएं।
इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक राजनीतिक अनिश्चितता ने भी सुरक्षित निवेश के तौर पर चांदी की मांग बढ़ाई है।
ट्रंप के बयानों से बदला बाजार मूड
बाजार की धारणा उस वक्त बदली जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोतों का एक बेड़ा मध्य पूर्व की ओर रवाना हो रहा है और अमेरिका ईरान पर कड़ी नजर रखे हुए है।
इससे एक दिन पहले ट्रंप ने दावा किया था कि नाटो के साथ हुए एक संभावित समझौते से अमेरिका को ग्रीनलैंड तक स्थायी पहुंच मिल सकती है, हालांकि इसके विवरण अब तक स्पष्ट नहीं हैं।
वहीं, यूरोपीय संघ पर प्रस्तावित टैरिफ से पीछे हटने के बाद 22 जनवरी को चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट भी देखने को मिली थी।
फेड की बैठक पर टिकी नजर
अब निवेशकों की नजर 27–28 जनवरी को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति बैठक पर है। बाजार एक और ब्याज दर कटौती की संभावना को कीमतों में शामिल कर रहा है, जिससे कीमती धातुओं को और समर्थन मिल सकता है।
निवेशकों के लिए सलाह: खरीदें, रखें या बेचें?
जस्टिन खू निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। उनका कहना है, “इन स्तरों पर कीमतों में उतार-चढ़ाव काफी तेज हो सकता है। अल्पकालिक ट्रेडर आंशिक मुनाफावसूली या स्टॉप-लॉस सख्त करने पर विचार कर सकते हैं।”
दीर्घकालिक निवेशकों के लिए चांदी अब भी मौद्रिक अस्थिरता के खिलाफ एक मजबूत हेज और ऊर्जा व तकनीक क्षेत्रों से जुड़ी संरचनात्मक मांग का लाभ उठाने वाला विकल्प बनी हुई है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि नए निवेश के लिए बेहतर होगा कि कीमतों में कुछ समय का ठहराव या गिरावट आने का इंतजार किया जाए, बजाय इसके कि रिकॉर्ड ऊंचाई पर जल्दबाजी में एंट्री ली जाए।
आगे का आउटलुक
23 जनवरी को प्रकाशित ऑगमोंट बुलियन की रिपोर्ट के मुताबिक,“जब तक चांदी 90.5 डॉलर (करीब 3,00,000 रुपये) के स्तर से ऊपर बनी रहती है, तब तक इसके 99–100 डॉलर (लगभग 3,45,000 रुपये) की ओर बढ़ने की संभावना बनी हुई है। गिरावट पर खरीदारी की रुचि बनी रह सकती है, न कि किसी बड़े ट्रेंड रिवर्सल का संकेत।”

