Budget 2026: सरकार के ये 3 फैसले बदल सकते हैं शेयर बाजार की चाल
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Budget 2026: सरकार के ये 3 फैसले बदल सकते हैं शेयर बाजार की चाल

Union Budget 2026: अगर बजट 2026 में सरकार टैक्स से जुड़ी इन मांगों पर ध्यान देती है तो शेयर बाजार में तेजी आ सकती है। निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और लंबे समय में बाजार को मजबूती मिलेगी।


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Budget 2026 India: हर साल की तरह इस बार भी केंद्रीय बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की उम्मीदों का आईना होगा। 1 फरवरी को जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट 2026 पेश करेंगी, तब मिडिल क्लास, किसान और निवेशक—सबकी नजरें एक ही सवाल पर टिकी होंगी कि क्या टैक्स का बोझ हल्का होगा या जेब पर फिर पड़ेगा असर? खासकर शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों के लिए यह बजट बेहद अहम माना जा रहा है। क्योंकि सरकार का एक फैसला बाजार की चाल पलट सकता है।

शेयर बाजार को क्यों है उम्मीद?

शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि अगर सरकार कुछ बड़े टैक्स से जुड़े फैसले लेती है तो बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है। टैक्स सिस्टम आसान होने से न सिर्फ घरेलू निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि विदेशी निवेशकों (FII) का विश्वास भी मजबूत होगा।

मुख्य मांग

शेयर बाजार के एक्सपर्ट्स और बड़े निवेशक सरकार से मुख्य रूप से तीन बड़े बदलाव चाहते हैं:-

LTCG टैक्स में ज्यादा छूट

विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा लोगों को निवेश के लिए प्रेरित करने के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स में छूट बढ़ानी चाहिए। अभी एक साल में 1.25 लाख रुपये तक की कमाई पर कोई LTCG टैक्स नहीं लगता। इससे ज्यादा कमाई पर 12.5% टैक्स देना होता है। मांग है कि टैक्स-फ्री लिमिट को 5 लाख रुपये किया जाए। इससे लंबे समय के निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

STCG टैक्स कम करने की मांग

निवेशक शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) टैक्स को भी कम करना चाहते हैं। मांग है कि 1.5 लाख रुपये तक की कमाई पर कोई STCG टैक्स न लगे। अभी STCG पर 20% टैक्स लगता है। इसे घटाकर 10% करने की मांग की जा रही है। इससे छोटे निवेशकों को बड़ी राहत मिल सकती है।

STT को खत्म या कम करने की मांग

सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) शेयरों की खरीद-बिक्री पर लिया जाता है। अभी STT की दरें शेयर खरीद-बिक्री पर 0.1%, डेरिवेटिव्स में 0.01% और इंट्राडे ट्रेडिंग में 0.025% हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रतिशत कम दिखता है, लेकिन बड़े लेन-देन में यह रकम काफी ज्यादा हो जाती है। इसलिए STT को कम या पूरी तरह खत्म करने की मांग हो रही है।

LTCG और STCG टैक्स क्या होता है?

LTCG (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन)

अगर कोई शेयर या निवेश 12 महीने बाद बेचा जाता है तो उस पर LTCG टैक्स लगता है।

STCG (शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन)

अगर कोई शेयर 12 महीने से पहले बेचा जाता है तो उस पर STCG टैक्स लगता है, जो अभी 20% है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा ट्रांजैक्शन टैक्स से बाजार की गतिविधियां कम हो सकती हैं और इससे सरकार की कमाई पर भी असर पड़ सकता है। जब STT लागू हुआ था, तब LTCG टैक्स शून्य था। उस समय STT सरकार के लिए कमाई का आसान जरिया था। लेकिन अब निवेशक हर ट्रांजैक्शन पर STT भी देते हैं और मुनाफे पर LTCG या STCG टैक्स भी यानी निवेशकों पर दो बार टैक्स लग रहा है। उनका मानना है कि अब STT को वापस लेना चाहिए, न कि बार-बार बढ़ाना।

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