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टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को एक्सटेंशन देने का फैसला टला, नोएल टाटा ने रखी 4 शर्तें

टाटा संस के बोर्ड की बैठक के दौरान टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा समूह के नए कारोबारों में हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाया.


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टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को लगातार तीसरी बार एक्सटेंशन देने को लेकर टाटा समूह में मतभेद गहरा गया है. टाटा संस के बोर्ड की बैठक में उनकी नियुक्ति को फैसला लिया जाना था लेकिन मतभेद के बाद एन. चंद्रशेखरन ने अपने तीसरे कार्यकाल पर चर्चा टालने की बात कही जिसे फिलहाल मान लिया गया है.

द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा संस के बोर्ड की बैठक के दौरान टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा समूह के नए कारोबारों में हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाया. इस पर लंबी चर्चा हुई. हालांकि अन्य बोर्ड सदस्यों ने चंद्रशेखरन के फिर से नियुक्ति का समर्थन किया और कहा कि ये नुकसान नई (ग्रीनफील्ड) परियोजनाओं में निवेश की वजह से है, जिन्हें परिपक्व होने में समय लगता है. नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन, टाटा ट्रस्ट्स की ओर से Tata Sons के बोर्ड में नामित सदस्य हैं. चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक है, यानी अभी उनके पास एक साल का समय बचा है.

एन. चंद्रशेखरन को तीसरी बार नियुक्ति के लिए स्पेशल रिजोल्यूशन पास करना होगा. साथ ही, 65 साल से अधिक उम्र के गैर-कार्यकारी पदों के लिए तय रिटायरमेंट नीति में छूट भी देनी होगी. चंद्रशेखरन जून में 63 साल के हो जाएंगे.

2017 में एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनने के बाद चंद्रशेखरन ने टाटा समूह में कई सुधार किए मसलन को कर्ज को कम किया, बैलेंस शीट मजबूत की और पूंजी खर्च में अनुशासन लाया है. हालांकि नोएल टाटा ने एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति से पहले चार शर्तें रखी हैं. इन शर्तों में पहले शर्त ये है कि आरबीआई के नियमों के मुताबिक टाटा संस को लिस्टेड कंपनी नहीं बनाया जाए. दूसरे शर्त में कंपनी पर कोई कर्ज न हो. तीसरी शर्त में जोखिम भरे निवेशों में जरूरत से ज्यादा पूंजी खर्च न किया जाए और चौथे शर्त में एयर इंडिया और बिग बास्केट जैसी अधिग्रहण वाली कंपनियों से होने वाले नुकसान पर काबू पाया जाए. बोर्ड की पुनर्नियुक्ति समिति की प्रमुख अनीता जॉर्ज ने चंद्रशेखरन के समर्थन में कहा कि नई परियोजनाओं में शुरुआती नुकसान सामान्य है और इसकी पहले से योजना बनाई जाती है.

इसके बाद जब कुछ सदस्यों ने इस मुद्दे पर मतदान की बात कही, तो चंद्रशेखरन ने कहा कि बेहतर होगा चर्चा को फिलहाल टाल दिया जाए, क्योंकि टाटा समूह जैसी संस्था तभी ठीक से काम कर सकती है जब टाटा संस और Tata Trusts फैसलों में एकजुट रहें.

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