भारत ईरान से क्या खरीदता और बेचता है? ट्रंप के 25% टैरिफ का क्या पड़ेगा असर
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भारत ईरान से क्या खरीदता और बेचता है? ट्रंप के 25% टैरिफ का क्या पड़ेगा असर

Iran India exports: भारत पर पहले से ही 50% टैरिफ का भार है। अगर भारत ईरान से व्यापार जारी रखता है तो कुल टैरिफ 75% तक पहुंच सकता है।


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India-Iran trade: जब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कहती है 'या तो मेरे नियम मानो या भारी टैक्स भरो' तो भारत जैसे देश की रणनीति पर सवाल उठना लाजिमी है। 1.68 अरब डॉलर के व्यापार, चाबहार पोर्ट और मिडिल-ईस्ट एशिया पर अब अमेरिकी दबाव का असर दिख रहा है। क्या भारत अपने आर्थिक और भू-राजनीतिक हितों को बचा पाएगा या ट्रंप के 25% टैरिफ़ के आगे झुक जाएगा? ईरान ने हमेशा भारत से कहा है कि उसे 'मजबूत बने रहना चाहिए', ताकि अमेरिका के दबाव के सामने झुकने की जरूरत न पड़े। यह बयान नवंबर 2019 में ईरान के तत्कालीन विदेश मंत्री जावेद ज़ारिफ ने दिया था और वर्तमान स्थिति में यह उतनी ही प्रासंगिक है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि तत्काल प्रभाव से, ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को अमेरिका के साथ किए जाने वाले सभी व्यापार पर 25% टैरिफ देना होगा। यह आदेश अंतिम और निर्णायक है।

भारत पहले ही झेल रहा है टैरिफ का दबाव

भारत पर पहले से ही 50% टैरिफ का भार है। अमेरिका ने शुरू में भारत पर 25% टैरिफ़ लगाया था। फिर रूस से तेल खरीदने पर रोक के लिए 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया। अगर भारत ईरान से व्यापार जारी रखता है तो कुल टैरिफ 75% तक पहुंच सकता है। यह केवल भारत का ही मामला नहीं है, ईरान के साथ व्यापार करने वाले अन्य देशों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत-ईरान का व्यापार

वर्तमान में भारत और ईरान के बीच कुल व्यापार 1.68 अरब डॉलर का है। भारत से ईरान को मुख्य निर्यात जैविक रसायन – 512.92 मिलियन डॉलर, फल, मेवे और खट्टे फल 311.60 मिलियन डॉलर है। आयात में खनिज ईंधन, तेल और डिस्टिलिशन प्रॉडक्ट्स (पेट्रोलियम, शराब, इत्र) 86.48 मिलियन डॉलर है। दोनों देशों के बीच साल 2018-19 में कुल व्यापार 17.03 अरब डॉलर, 2019-20 में 4.77 अरब डॉलर और अब 1.68 अरब डॉलर रह गया है। इसलिए 2019 में ज़ारिफ ने भारत को मज़बूत रीढ़ रखने और अमेरिकी दबाव में नहीं झुकने की सलाह दी थी।

चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय रूट

भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह के जरिए अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया के देशों से सीधे व्यापार करता है। इससे भारत को पाकिस्तान के रूट पर निर्भर नहीं होना पड़ता है। इसी रूट से भारत रूस और यूरोप के देशों से जुड़ता है, लंबे और महंगे समुद्री मार्गों पर निर्भर नहीं होना पड़ता। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर भारत ट्रंप के दबाव में आकर ईरान से व्यापार बंद करता है तो ईरान चीन के करीब जा सकता है, जिससे भारत व्यापारिक मार्गों से कट सकता है। ईरान की स्थिरता भारत के लिए बेहद जरूरी है। चाबहार बंदरगाह और आईएनएसटीसी भारत क्षेत्रीय और आर्थिक हितों के लिए अहम हैं।

चाबहार पोर्ट: भारत के लिए रणनीतिक महत्व

भारत और ईरान ने 2015 में चाबहार बंदरगाह के विकास में सहयोग के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इसका मकसद चाबहार को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाना था। यह पोर्ट मानवीय मदद और व्यापार को आसान बनाता है। हाल ही में अमेरिका ने छह महीने की छूट दी, ताकि भारत पोर्ट पर संचालन जारी रख सके। लेकिन ट्रंप का 25% टैरिफ ऐलान भारत के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है।

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