होर्मुज को पार करने वाले हैं भारत के दो एलपीजी टैंकर, 20 जहाज अभी भी फंसे
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ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर प्रभावी रोक जारी है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि वह कुछ जहाजों को बातचीत के आधार पर सुरक्षित मार्ग दे रहा है। (फाइल फोटो)

होर्मुज को पार करने वाले हैं भारत के दो एलपीजी टैंकर, 20 जहाज अभी भी फंसे

इन दोनों टैंकरों में इतना एलपीजी है, जो पश्चिम एशिया युद्ध से पहले भारत की एक दिन की खपत से अधिक के बराबर माना जा रहा है।


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भारतीय एलपीजी टैंकर 'जग वसंत' और 'पाइन गैस', जो पहले फारस की खाड़ी में लंगर डाले हुए थे, अब आगे बढ़ रहे हैं और आज होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार करने की उम्मीद है। ये जहाज एक ऐसे मार्ग का उपयोग कर रहे हैं जो ईरान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र से होकर गुजरता है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग के जरिए तेहरान इस समुद्री चोकपॉइंट पर जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित कर सकता है।

शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, सोमवार दोपहर तक ये दोनों टैंकर ईरान के लारक और केशम द्वीपों के बीच के जलक्षेत्र के करीब पहुंच चुके थे। दोनों टैंकर एक-दूसरे के पास चलते हुए यह प्रसारित कर रहे थे कि वे भारतीय जहाज हैं, ताकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नजर रख रही ईरानी एजेंसियों के बीच उनकी पहचान को लेकर कोई भ्रम न रहे।

भारत-ईरान के बीच बातचीत

भारत ने अपने जहाजों के सुरक्षित पारगमन के लिए ईरान के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की है। इसी का परिणाम था कि कुछ दिन पहले 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' नाम के दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर पाए थे।

पिछले सप्ताह फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि भारत-ध्वज वाले जहाजों के लिए ईरान के साथ कोई “सामूहिक व्यवस्था” नहीं है और हर जहाज का पारगमन अलग-अलग परिस्थितियों में तय होता है। उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान के साथ बातचीत जारी है।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने CBS से कहा कि ईरान उन देशों के साथ “खुले तौर पर बातचीत” के लिए तैयार है जो अपने जहाजों के सुरक्षित मार्ग पर चर्चा करना चाहते हैं।

जहाजों का स्वामित्व और क्षमता

जग वसंत नाम का जहाज मुंबई स्थित ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी के स्वामित्व और संचालन में है और इसे भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) ने चार्टर किया है।

पाइन गैस नाम का जहाज मुंबई की सेवन आइलैंड्स शिपिंग कंपनी के स्वामित्व में है और इसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने चार्टर किया है।

दोनों जहाज रविवार रात से सोमवार सुबह के बीच भारत के लिए रवाना हुए माने जा रहे हैं।

'जग वसंत' की डेडवेट क्षमता लगभग 54,500 टन है, जबकि Pine Gas की क्षमता करीब 58,500 टन है। डेडवेट का मतलब है कि जहाज कुल कितना वजन (कार्गो, ईंधन, पानी, चालक दल आदि) ले जा सकता है।

इन दोनों टैंकरों में इतना एलपीजी है, जो पश्चिम एशिया युद्ध से पहले भारत की एक दिन की खपत से अधिक के बराबर माना जा रहा है।

भारत की ऊर्जा निर्भरता और संकट

होर्मुज़ जलडमरूमध्य का प्रभावी बंद होना भारत के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

भारत के लगभग 40% कच्चे तेल का आयात, 50% से अधिक LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस), और 90% LPG (रसोई गैस) इसी जलडमरूमध्य से होकर आता है।

भारत की वार्षिक एलपीजी खपत 3.3 करोड़ टन से अधिक है, जिसमें करीब 60% आयात पर निर्भरता है। चूंकि 90% एलपीजी पश्चिम एशिया से आता है, इसलिए होर्मुज़ के जरिए भारत की कुल एलपीजी खपत का लगभग 54% गुजरता है।

फंसे हुए जहाज

रविवार तक फारस की खाड़ी में भारत के 22 व्यापारिक जहाज फंसे हुए थे, जिनमें 611 नाविक सवार थे। इनमें बड़ी संख्या तेल और गैस टैंकरों की है।

इन जहाजों में कुल मिलाकर 3.2 लाख टन एलपीजी, 2 लाख टन एलएनजी , 16 लाख टन कच्चा तेल भारत के लिए ले जाया जा रहा है। Jag Vasant और Pine Gas के जलडमरूमध्य पार करने के बाद खाड़ी में फंसे भारतीय जहाजों की संख्या घटकर 20 रह जाएगी।

विदेश मंत्रालय (MEA) का कहना है कि भारत लगातार विभिन्न सरकारों के संपर्क में है और भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे।

ईरान का नियंत्रण और वैकल्पिक मार्ग

हालांकि ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर प्रभावी रोक जारी है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि वह कुछ जहाजों को बातचीत के आधार पर सुरक्षित मार्ग दे रहा है।

हाल के दिनों में जो जहाज खाड़ी से बाहर निकल पाए, उन्होंने पारंपरिक सीधे रास्ते की बजाय ईरान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र से होकर लंबा और घुमावदार रास्ता अपनाया।

यह मार्ग केशम और लारक द्वीपों के बीच से गुजरता है, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरान समुद्री यातायात को नियंत्रित कर रहा है।

Jag Vasant और Pine Gas भी इसी रास्ते का उपयोग करने वाले थे। नंदा देवी और शिवालिक सहित पाकिस्तान, तुर्की और ग्रीस के जहाजों ने भी हाल में यही मार्ग अपनाया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मार्ग का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि इन जहाजों को ईरान की अनुमति मिली हुई थी।

बढ़ता तनाव और जोखिम

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष, जो 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य हमलों से शुरू हुआ, के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है।

ईरान का दावा है कि यह जलडमरूमध्य केवल अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगियों से जुड़े जहाजों के लिए बंद है, जबकि अन्य देशों के लिए खुला है।

हालांकि, कुछ तटस्थ देशों के जहाजों पर भी हमलों की खबरें आई हैं, जिससे व्यापारिक कंपनियां, बीमा कंपनियां और जहाज इस उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में जाने से बच रहे हैं।

इस बीच, विभिन्न देश अपने जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर रहे हैं।

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