एलपीजी संकट के बीच हॉर्मुज से दो जहाज भारत की ओर रवाना, 22 जहाज अब भी अटके
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जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में खड़े बाकी 22 जहाज इंतजार की स्थिति में हैं, जबकि भारत सरकार क्षेत्र के देशों के साथ समन्वय कर उनके सुरक्षित मार्ग को सुनिश्चित करने में जुटी है। (फाइल फोटो)

एलपीजी संकट के बीच हॉर्मुज से दो जहाज भारत की ओर रवाना, 22 जहाज अब भी अटके

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में कई भारतीय जहाज इंतजार की स्थिति में हैं, सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए संबंधित देशों से समन्वय कर रही सरकार


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दो भारतीय जहाज, जिनमें से प्रत्येक में 46,000 मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी भरी है और कुल मिलाकर 92,700 मीट्रिक टन गैस है, शनिवार (14 मार्च) तड़के होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर गए। इसके साथ ही युद्ध प्रभावित इस संकरे समुद्री मार्ग से सुरक्षित गुजरने वाले भारतीय जहाजों की संख्या तीन हो गई है।

जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में खड़े बाकी 22 जहाज अभी भी इंतजार की स्थिति में हैं। भारत सरकार क्षेत्र के विभिन्न देशों के साथ संपर्क में है ताकि इन जहाजों का सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया जा सके।

एलपीजी लेकर जा रहे जहाज शिवालिक और नंदा देवी अब गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। यह जानकारी नौवहन मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने मीडिया ब्रीफिंग में दी।

उन्होंने बताया कि इन जहाजों में कुल 92,700 टन एलपीजी है। शिवालिक के 16 मार्च को मुंद्रा पहुंचने की संभावना है, जबकि नंदा देवी अगले दिन कांडला बंदरगाह पर पहुंच सकता है।

पश्चिमी हिस्से में अब भी फंसे 22 जहाज

ये दोनों जहाज उन 24 जहाजों में शामिल थे जो क्षेत्र में युद्ध शुरू होने के बाद से जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए थे। इसके अलावा चार अन्य जहाज पूर्वी हिस्से में भी फंसे हुए थे।

इनमें से एक भारत का झंडा लिए तेल टैंकर जग प्रकाश, जो ओमान से अफ्रीका के लिए पेट्रोल लेकर जा रहा था, शुक्रवार को इस युद्ध प्रभावित मार्ग को पार कर गया।

राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि पश्चिमी हिस्से में फंसे 22 भारतीय झंडे वाले जहाजों में 6 एलपीजी जहाज, 1 तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) जहाज, 4 कच्चे तेल के टैंकर, 1 रासायनिक उत्पाद ले जाने वाला जहाज, 3 कंटेनर जहाज, 2 बल्क कैरियर जहाज शामिल हैं।

इसके अलावा एक ड्रेजर जहाज है और एक जहाज खाली है, जिसमें कोई माल नहीं है। तीन अन्य जहाज ड्राई डॉक में हैं, यानी नियमित रखरखाव के लिए बंदरगाह पर खड़े हैं।

अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले और इसके जवाब में तेहरान की कार्रवाई के बाद ईरान और ओमान के बीच स्थित इस संकरे समुद्री मार्ग में सैकड़ों जहाज फंस गए थे।

सुरक्षित आवाजाही के लिए समन्वय

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में भारत के कई जहाज अभी भी इंतजार की स्थिति में हैं।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जा सके और देश की ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे।

सिन्हा ने बताया कि कुल 28 भारतीय झंडे वाले जहाज फंसे हुए थे—24 पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में।

तेल टैंकर जग प्रकाश ओमान के सोहर बंदरगाह से पेट्रोल लेकर तंजानिया के टांगा बंदरगाह के लिए रवाना हुआ था और उसके 21 मार्च को वहां पहुंचने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि पश्चिमी हिस्से में फंसे 22 जहाजों पर 611 नाविक सवार हैं। भारतीय प्राधिकरण, जिनमें जहाजरानी महानिदेशालय भी शामिल है, स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

पूर्वी हिस्से में अभी भी तीन जहाज फंसे हुए हैं, जिन पर 76 नाविक मौजूद हैं।

एलपीजी जहाजों को प्राथमिकता

सिन्हा ने कहा कि भारत के सभी बंदरगाहों पर संचालन सामान्य है। प्रमुख बंदरगाहों और राज्य समुद्री बोर्डों को मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है, जिसके तहत एलपीजी लेकर आने वाले जहाजों को प्राथमिकता के आधार पर बर्थ दी जा रही है, क्योंकि देश में इस ईंधन की कमी देखी जा रही है।

उन्होंने बताया कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए छह जहाज भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचे और उन्हें सुरक्षित लंगर डालने की अनुमति दी गई।

बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय फारस की खाड़ी में समुद्री स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

उर्वरक भंडार को लेकर सरकार का भरोसा

रणधीर जायसवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बावजूद भारत में फिलहाल उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है, खासकर आगामी खरीफ 2026 सीजन के लिए।

उन्होंने बताया कि सरकार ने भंडार और उत्पादन क्षमता की समीक्षा की है और आने वाले महीनों में उपलब्धता को लेकर आश्वस्त है।

जायसवाल ने कहा कि इस समय भारत के पास उर्वरकों का पर्याप्त से भी अधिक भंडार है।

उन्होंने कहा कि यूरिया का भंडार पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है, जबकि डीएपी का भंडार पिछले साल के मुकाबले दोगुना है। एनपीके उर्वरकों की उपलब्धता भी पिछले वर्ष की तुलना में काफी बेहतर है।

उन्होंने यह भी बताया कि देश में यूरिया का उत्पादन वर्तमान खपत से अधिक रहने की संभावना है, क्योंकि रबी सीजन समाप्ति की ओर है।

अग्रिम रखरखाव से उत्पादन बढ़ा

जायसवाल ने बताया कि सरकार ने कुछ उर्वरक संयंत्रों के वार्षिक रखरखाव का काम पहले ही कर लिया था, जिससे उपलब्ध गैस के साथ अधिकतम उत्पादन संभव हो पाया है।

सरकार ने वैश्विक बाजार से समय रहते उर्वरक खरीदने के लिए भी कदम उठाए हैं।

उर्वरक विभाग ने पहले ही वैश्विक निविदाएं जारी कर दी थीं, जिन्हें अच्छा प्रतिसाद मिला है और मार्च के अंत तक विभिन्न स्रोतों से अधिकांश आपूर्ति मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि उर्वरक उत्पादन के लिए पर्याप्त कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त खरीद प्रक्रिया भी जारी है।

उर्वरक विभाग वैश्विक हालात और देश में मांग के रुझान पर लगातार नजर रख रहा है।

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