
ईरान को मिली बड़ी राहत, ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से कच्चे तेल के दामों में कमी संभव
पिछले दो हफ्तों में यह तीसरी बार है जब अमेरिकी ट्रेजरी ने अपने विरोधी देशों से जुड़े तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है.
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के बड़े फैसले के चलते कच्चे तेल के दामों में तेजी पर ब्रेक लग सकती है. अमेरिकी सरकार ने समुद्र के रास्ते खरीदे जाने वाले ईरानी तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट दे दी है. यह कदम अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल को काबू में करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ( Scott Bessent) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि इस फैसले से लगभग 14 करोड़ बैरल तेल वैश्विक बाजार में आ सकता है, जिससे सप्लाई पर जारी दबाव कम होगा. ट्रेजरी विभाग की वेबसाइट पर जारी लाइसेंस के मुताबिक, अगर पहले से तय बिक्री या डिलीवरी पूरी करनी हो तो इस छूट के तहत ईरानी तेल अमेरिका में आयात किया जा सकता है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में ऐसा आयात होगा या नहीं, क्योंकि 1979 की क्रांति के बाद लगे प्रतिबंधों के कारण अमेरिका ने लंबे समय से ईरानी तेल से दूरी बना रखी है. यह छूट 19 अप्रैल तक लागू रहेगी और इसमें क्यूबा, उत्तर कोरिया और क्रीमिया जैसे क्षेत्रों को शामिल नहीं किया गया है.
हालांकि, ईरान के तेल मंत्रालय ने अमेरिकी दावे का खंडन किया है. मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास के बयान में कहा गया,“फिलहाल ईरान के पास अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए कोई अतिरिक्त तैरता हुआ कच्चा तेल उपलब्ध नहीं है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव का बयान खरीदारों को भरोसा दिलाने और बाजार की भावना संभालने के लिए दिया गया लगता है.” ईरान की इस प्रतिक्रिया से पहले से अस्थिर बाजार में और घबराहट बढ़ सकती है, क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष चौथे सप्ताह में प्रवेश करने वाला है और कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं.
पिछले दो हफ्तों में यह तीसरी बार है जब अमेरिकी ट्रेजरी ने अपने विरोधी देशों से जुड़े तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है. इसका मकसद ऊर्जा कीमतों को काबू में रखना है, जो 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जो 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है. इससे पहले अमेरिका ने रूसी तेल पर भी कुछ प्रतिबंधों में ढील दी थी. शुक्रवार को जारी सामान्य लाइसेंस के तहत उन जहाजों पर लदे ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की अनुमति दी गई, जो पहले से लोड हो चुके थे. बेसेन्ट ने कहा, “असल में हम तेहरान के खिलाफ अभियान जारी रखते हुए कीमत कम रखने के लिए ईरानी तेल का इस्तेमाल करेंगे.”
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से तेल की कीमतों में लगभग 50% की बढ़ोतरी हुई है. तेहरान ने जवाबी हमलों में इजरायल और खाड़ी देशों को निशाना बनाया, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं.
ईरान और पड़ोसी खाड़ी देशों की एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है, जबकि ईरान ने प्रभावी रूप से Strait of Hormuz को बंद कर दिया है, जहां से दुनिया के लगभग 20% तेल और एलएनजी की सप्लाई होती है. हालांकि जानकारों का मानना है कि जब तक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दोबारा नहीं खुलता, तब तक इन कदमों से कीमतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. जानकारों का मानना है कि, अगर संघर्ष जारी रहा तो कच्चा तेल जल्द 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है और एक महीने से ज्यादा तनाव रहने पर 150 डॉलर तक भी पहुंच सकता है.

