
US-Iran War: भारत में हवाई सफर हो सकता है महंगा, विमान ईंधन की कीमतें बढ़ी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अब आपकी जेब पर पड़ने वाला है। खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है।
USA-Israel Vs Iran : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध ने अब वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। खाड़ी देशों में छिड़ी इस जंग का असर भारतीय विमानन क्षेत्र पर पड़ने वाला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से हवाई ईंधन (ATF) महंगा हो गया है। इसके चलते भारत में हवाई टिकटों के दाम जल्द ही बढ़ सकते हैं। विमानन कंपनियों के लिए ईंधन सबसे बड़ा खर्च होता है। अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊँची बनी रहीं, तो एयरलाइंस इसका बोझ यात्रियों पर डालेंगी। आने वाले दिनों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूटों पर किराया बढ़ सकता है। स्कूलों की छुट्टियां शुरू होने वाली हैं और यह यात्रा का व्यस्त सीजन है। ऐसे समय में किराए में बढ़ोतरी मध्यम वर्ग के बजट को बिगाड़ सकती है। ट्रैवल प्लेटफॉर्म वांडरऑन के सीईओ गोविंद गौड़ ने भी इस पर चिंता जताई है।
हवाई किराए में 15 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर स्थिति नहीं सुधरी, तो घरेलू हवाई किराए में 10 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय रूटों पर एयरस्पेस बंद होने के कारण पहले ही कीमतें बढ़ी हुई हैं। दिल्ली से मुंबई और बेंगलुरु से दिल्ली जैसे व्यस्त रूटों पर इसका सबसे ज्यादा असर दिखेगा। मुंबई से हैदराबाद जाने वाले यात्रियों को भी अब ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से तेल की कीमतें बढ़ी हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 72.48 डॉलर से बढ़कर अब 80 डॉलर के करीब पहुँच गई है। फेडरेशन ऑफ एविएशन इंडस्ट्री की डॉ. वंदना सिंह के अनुसार, एयरलाइंस के कुल खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक होती है। इसलिए तेल की कीमतों में जरा सा भी बदलाव टिकट दरों को सीधे प्रभावित करता है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता खतरा
ईरान ने चेतावनी दी है कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमला करेगा। यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माना जाता है। भारत का लगभग 50 प्रतिशत तेल आयात इसी रास्ते से होकर आता है। दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल भी इसी मार्ग से गुजरता है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार इस रास्ते पर टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है। अब जहाजों को लंबे रास्तों से घूमकर आना पड़ रहा है। इससे माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है और समय भी ज्यादा लग रहा है। भारत के प्रमुख महानगरों में एटीएफ की कीमतें 1 लाख रुपये प्रति किलोलीटर तक पहुँच गई हैं। एयरलाइंस कंपनियां अब बहुत कम मार्जिन पर काम कर रही हैं। ऐसे में उनके पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
ट्रैवल सीजन में यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी
फिलहाल कुछ ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स का कहना है कि घरेलू कीमतें अभी स्थिर हैं। यात्रा ऑनलाइन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भरत मलिक के मुताबिक अभी तक सिस्टम में बड़ी बढ़ोतरी नहीं दिखी है। लेकिन आने वाले हफ्तों में अनिश्चितता का माहौल बना रहेगा। गर्मी की छुट्टियों के कारण इस दौरान विमानों में यात्रियों की संख्या काफी ज्यादा रहती है। पिकयौरट्रेल के सीईओ हरि गणपति ने इसे एयरलाइंस के लिए 'कैच-22' जैसी स्थिति बताया है। एयरलाइंस को तय करना होगा कि वे कितना बोझ खुद उठाएं और कितना ग्राहकों पर डालें। अगर टिकट बहुत महंगे हुए, तो लोग हवाई यात्रा से परहेज भी कर सकते हैं। खाड़ी क्षेत्र में लंबा खिंचने वाला युद्ध वैश्विक संकट खड़ा कर सकता है। भारतीय यात्रियों को अब ऊंचे किराए और कम डिस्काउंट के लिए तैयार रहना चाहिए।
Next Story

