ट्रेड डील पर बड़ी प्रगति, 5 दिन में पहले चरण पर हस्ताक्षर करेगा अमेरिका
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ट्रेड डील पर बड़ी प्रगति, 5 दिन में पहले चरण पर हस्ताक्षर करेगा अमेरिका

भारत और अमेरिका अगले 4–5 दिनों में व्यापार समझौते के पहले चरण पर संयुक्त बयान जारी कर सकते हैं। इससे भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ 18% तक घट सकता है।


लगातार बढ़ती आलोचनाओं के बीच भारत और अमेरिका अपने द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) के पहले चरण को लेकर अगले चार से पांच दिनों में एक संयुक्त बयान को अंतिम रूप देकर उस पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार (5 फरवरी) को दी।

पीयूष गोयल ने कहा कि इस संयुक्त बयान के बाद अमेरिका की ओर से एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) जारी किए जाने का रास्ता साफ होगा, जिसके तहत भारतीय उत्पादों पर लगने वाला आयात शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत किया जा सकता है। फिलहाल भारतीय निर्यात पर अमेरिका में 25 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ लागू है। इसके अलावा, रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी लगाया गया है।

संयुक्त बयान के बाद कानूनी समझौता

मंत्री ने बताया कि संयुक्त बयान पर जल्द हस्ताक्षर किए जाएंगे, जबकि व्यापार समझौते के पहले चरण से जुड़ा कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता मार्च के मध्य तक पूरा होने की संभावना है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि मार्च के मध्य तक कानूनी समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे, जिसके बाद तय किए गए टैरिफ बदलाव लागू हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि कानूनी दस्तावेज पर हस्ताक्षर होने के बाद भारत भी समझौते के पहले चरण के तहत कुछ अमेरिकी उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती करेगा।

मौजूदा चरण में निवेश प्रतिबद्धता नहीं

पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के इस पहले चरण में किसी भी तरह की निवेश प्रतिबद्धता शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि फिलहाल बातचीत का फोकस व्यापार को आसान बनाने और टैरिफ को तर्कसंगत करने पर है, न कि पूंजी निवेश पर।

क्यों अहम है यह समझौता

यह प्रस्तावित व्यापार समझौता ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका ने इस साल की शुरुआत में भारत के खिलाफ कड़े टैरिफ लगाए थे। अमेरिका ने भारत द्वारा रूस से ऊर्जा आयात और व्यापार असंतुलन को इसका कारण बताया था।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का पहला चरण इन दंडात्मक शुल्कों को वापस लेने, निर्यातकों को स्थिरता देने और व्यापारिक तनाव को और बढ़ने से रोकने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इसके साथ ही यह समझौता भविष्य में एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार करार की नींव भी रखेगा।

विपक्ष की आपत्तियां

इस बीच कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस व्यापार समझौते को लेकर चिंता जताई है। विपक्ष का दावा है कि अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क घटाने से घरेलू उद्योगों और कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने 4 फरवरी को सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रधानमंत्री के दबाव में इस समझौते की घोषणा सिर्फ सुर्खियां बटोरने और तात्कालिक डैमेज कंट्रोल के लिए की गई। उन्होंने दावा किया कि जब समझौते की पूरी जानकारी सामने आएगी, तब भारतीय किसानों को होने वाला नुकसान साफ तौर पर दिखेगा।

हालांकि, पीयूष गोयल ने बुधवार को इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस व्यापार समझौते में पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।

फिलहाल, जब तक समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर नहीं हो जाते और उसकी शर्तें सार्वजनिक नहीं होतीं, तब तक इस करार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इस समझौते को अब तक का “सबसे बड़ा” व्यापार समझौता भी बताया जा रहा है।

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