ईरान युद्ध के बीच वॉल स्ट्रीट में लौटी रौनक, ग्लोबल राहत के संकेत
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ईरान युद्ध के बीच वॉल स्ट्रीट में लौटी रौनक, ग्लोबल राहत के संकेत

ईरान जंग खत्म होने की उम्मीद से तेल की कीमतों में गिरावट आई है और उसकी वजह से वॉल स्ट्रीट में जोरदार तेजी दिखाई। इससे निवेशकों को राहत के संकेत मिले हैं।


मार्च के आखिर में वॉल स्ट्रीट में जोरदार तेजी देखने को मिली। तेल की कीमतों में गिरावट आई और शेयर बाजार ऊपर चढ़ गए। इसकी वजह यह उम्मीद है कि वैश्विक बाजारों को हिला देने वाला और ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित करने वाला युद्ध अब खत्म होने की ओर बढ़ सकता है।

अमेरिकी शेयर बाजार में मई के बाद सबसे बड़ी तेजी दर्ज की गई। माना जा रहा है कि अमेरिका और ईरान दोनों ही इस संघर्ष से निकलने का रास्ता ढूंढ रहे हैं। S&P 500 में 2.9% और नैस्डैक में 3.8% की बढ़त हुई। एयरलाइंस कंपनियों के शेयर बढ़े, जबकि तेल और ऊर्जा कंपनियों के शेयर गिर गए। कच्चा तेल करीब 101 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। तेल सस्ता होने से सरकारी बॉन्ड मजबूत हुए, डॉलर कमजोर पड़ा और सोने की कीमत बढ़ गई।

यह बदलाव तब आया जब खबर आई कि यूरोपीय संघ के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच बातचीत हुई। ईरान ने कहा कि वह युद्ध खत्म करना चाहता है, लेकिन इसके लिए भविष्य में हमलों से बचाव की पक्की गारंटी चाहिए।एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का मिशन युद्ध को लंबा खींच सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका जल्द ही वहां से निकल जाएगा और उसके बाद यह रास्ता अपने आप खुल जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार पिछले एक महीने से दबाव में था, इसलिए अब थोड़ी भी अच्छी खबर का बड़ा असर दिख रहा है। इसी वजह से शेयर बाजार में इतनी तेजी आई।हालांकि, कुछ जानकार मानते हैं कि असली मुद्दा अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य ही है। जब तक यह पूरी तरह सामान्य नहीं होता, तब तक हालात पूरी तरह सुधरना मुश्किल है। साथ ही, यह भी माना जा रहा है कि ईरान बिना किसी शर्त के पीछे नहीं हटेगा।

यह युद्ध अब पांचवें हफ्ते में पहुंच चुका है और इससे काफी नुकसान हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे कीमतें बढ़ीं और महंगाई व आर्थिक सुस्ती की चिंता भी बढ़ गई।आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो मार्च में लोगों का भरोसा (कंज्यूमर कॉन्फिडेंस) थोड़ा बढ़ा है, जो अच्छी बात है। हालांकि, फरवरी में नौकरियों के मौके कम हुए और भर्ती धीमी रही, जिससे पता चलता है कि जॉब मार्केट पहले से ही कमजोर हो रहा था।

विशेषज्ञों का कहना है कि हालात थोड़े स्थिर जरूर हो रहे हैं, लेकिन अभी पूरी तरह सुधार नहीं हुआ है। लोगों और निवेशकों का भरोसा तभी मजबूत होगा, जब मध्य पूर्व में तनाव कम होगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिलेगी।

कॉर्पोरेट जगत में भी कई बड़े सौदे हुए। एनवीडिया ने मार्वेल टेक्नोलॉजी में 2 अरब डॉलर का निवेश किया। कोरवीव ने 8.5 अरब डॉलर जुटाए। एली लिली, बायोजेन और यूनिलीवर जैसी कंपनियों ने भी बड़े अधिग्रहण किए।

अगर बाजार की बात करें तो S&P 500, नैस्डैक और डाउ जोंस सभी में अच्छी बढ़त हुई। डॉलर कमजोर हुआ, जबकि यूरो, पाउंड और येन मजबूत हुए। बिटकॉइन और ईथर जैसी क्रिप्टोकरेंसी भी ऊपर चढ़ीं। वहीं, अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन के बॉन्ड यील्ड में हल्की गिरावट दर्ज की गई।

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