
पश्चिम एशिया संकट से हिल गया उड्डयन सेक्टर, भारतीय एयरलाइनों ने 4,335 उड़ानें रद्द कीं
संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से एयरलाइनों को अपनी सेवाएं निलंबित करने या मार्ग बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
अमेरिका, इज़राइल और ईरान से जुड़े बढ़ते संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया क्षेत्र में हवाई क्षेत्र बंद होने से उड़ान संचालन पर बड़ा असर पड़ा है। चल रहे इस संघर्ष ने वैश्विक उड्डयन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। सरकार ने सोमवार को राज्यसभा को बताया कि अब तक भारतीय एयरलाइनों ने 4,335 और विदेशी एयरलाइनों ने 1,187 उड़ानें रद्द कर दी हैं।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया के कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है, जिससे एयरलाइनों को अपनी सेवाएं निलंबित करने या मार्ग बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा है। प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न का जवाब देते हुए मंत्री ने जोर दिया कि यात्रियों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
नायडू ने कहा, “पश्चिम एशिया में हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण अब तक कुल मिलाकर भारतीय एयरलाइनों ने लगभग 4,335 उड़ानें रद्द की हैं, जबकि विदेशी एयरलाइनों ने लगभग 1,187 उड़ानें रद्द की हैं।”
मंत्री ने कहा कि इस संकट के दौरान संचालन की सुरक्षा सर्वोपरि है और जब हवाई क्षेत्र ही बंद है तो वहां उड़ान संचालन करने का कोई कारण नहीं है।
नायडू ने बताया कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) प्रभावित देशों के नियामकों के साथ लगातार संपर्क में हैं।
उन्होंने कहा, “जब भी हमें संचालन के लिए स्लॉट उपलब्ध हुआ, हमने उड़ानें संचालित कीं। मैं बता सकता हूं कि इस संकट के दौरान भी लगभग 2,19,780 लोग यात्रा कर चुके हैं।”
नायडू ने यह भी कहा कि बाधाओं के बावजूद सुरक्षित उड्डयन संचालन बनाए रखने के लिए भारतीय अधिकारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ समन्वय कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “फिलहाल कुछ हवाई क्षेत्र अभी भी बंद हैं और हम यात्रियों की सुविधा के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। लेकिन सबसे पहले हवाई क्षेत्र का खुलना जरूरी है। यात्रा सुरक्षित होना चाहिए, तभी नियमित उड़ान संचालन संभव हो पाएगा।”

