युद्ध के बावजूद क्यों नहीं बढ़ रही सोने की कीमतें?, बाजार में सुस्ती का आलम क्यों है?
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विशेषज्ञों के मुताबिक युद्ध शुरू होने के बाद से सोना एक सीमित दायरे में ही कारोबार कर रहा है।

युद्ध के बावजूद क्यों नहीं बढ़ रही सोने की कीमतें?, बाजार में सुस्ती का आलम क्यों है?

पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमला करने और फिर युद्ध भड़कने के बाद सोने की कीमतों में बड़ी तेजी के बजाय मामूली गिरावट या स्थिरता देखने को मिली है।


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पश्चिम एशिया में गहराते संघर्ष के बीच सोने की कीमतों के चढ़ने की जो आशंका जताई जा रही थी, वैसा फिलहाल देखने को नहीं मिल रहा है। युद्ब के वजूद सोने की कीमतों में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही है। आमतौर पर युद्ध या वैश्विक संकट के समय सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है और इसकी कीमतें बढ़ जाती हैं, लेकिन हाल के दिनों में बाजार में इसका उलटा रुझान देखने को मिला है।

हाल के दिनों में क्या रहा रुझान

सर्राफा बाजार में शुक्रवार शाम सोने का भाव लगभग 1,58,399 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। इससे पहले 27 फरवरी को, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से पहले, सोने का भाव करीब 1,59,097 रुपये प्रति 10 ग्राम था। यानी युद्ध शुरू होने के बाद कीमतों में बड़ी तेजी के बजाय मामूली गिरावट या स्थिरता देखने को मिली है।

एक सीमित दायरे में कारोबार

विशेषज्ञों के मुताबिक युद्ध शुरू होने के बाद से सोना एक सीमित दायरे में ही कारोबार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 300 डॉलर प्रति औंस के दायरे में बनी हुई है। वहीं भारत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोना लगभग 10,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर रहा है।

कच्चे तेल में उछाल, लेकिन सोना शांत

पश्चिम एशिया में तनाव और Strait of Hormuz के बंद होने की आशंका के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। West Texas Intermediate (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल लगभग 60 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है।

डॉलर की मजबूती बना बड़ा कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय दुनिया भर के निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने के बजाय डॉलर को प्राथमिकता दे रहे हैं। हाल के हफ्तों में अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है, जिससे सोने की कीमतों में तेज बढ़त देखने को नहीं मिल रही है।

आगे क्या हो सकता है

विश्लेषकों के अनुसार आने वाले समय में सोने की कीमतें बाजार के माहौल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेंगी। यदि बाजार में बिकवाली बढ़ती है तो सोना 5 से 20 प्रतिशत तक सस्ता हो सकता है।

हालांकि यदि वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ते हैं, तो सोने की मांग बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में साल के अंत तक सोने की कीमतें मौजूदा स्तर से 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।

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