क्या विधानसभा चुनाव के बाद महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? सरकार ने दिया ये जवाब
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क्या विधानसभा चुनाव के बाद महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? सरकार ने दिया ये जवाब

क्या 4 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव के प्रक्रियाओं के खत्म होने के बाद पेट्रोल डीजल महंगा होने वाला है? क्या चुनाव के खत्म होने के बाद सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं?


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पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने की चर्चाएं फिर से तेज हो गई है. इस बात के आसार हैं कि जल्द ही पेट्रोल डीजल के दामों में बढ़ोतरी देखी जा सकती है. 4 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव के चलते सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल के लिए आम लोगों पर महंगे पेट्रोल डीजल का बोझ नहीं डाला है. लेकिन ब्रोकरेज हाउस कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का कहना है कि जल्द पेट्रोल डीजल के दामों में बदलाव देखने को मिल सकता है. ब्रोकरेज हाउस का कहना है कि पश्चिम एशिया में अभी तक शांति बहाली या इस दिशा में कोई समझौता नहीं हुआ है. ऐसे में राज्यों में चुनाव के बाद पेट्रोल डीजल की कीमतें बढ़ाई जा सकती है.

Brent crude oil फिलहाल 103 से 104 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज अभी भी बंद है. ईरान के साथ कोई शांति समझौता ना होने के चलते अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में अपनी जंगी जहाजों को लगाकर ब्लाकेड लगा रखा है. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के महत्व को आप इसी से समझ सकते हैं कि रोजाना वैश्विक खपत का 20 फीसदी और भारत के कुल खपत का 40 फीसदी कच्चा तेल इस रास्ते से सप्लाई की जाती है. तो Strait Of Hormuz से भारत अपने कुल खपत का 56 फीसदी LNG और 83 फीसदी एलपीजी भी इंपोर्ट करता है.

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का मानना है कि कच्चे तेल की रिफाइनिंग करने वाली कंपनियों को कीमतों में उछाल के चलते भारी नुकसान हो रहा है. हर महीने इन कंपनियों पर २७००० करोड़ रुपये का बोझ पड़ा है. ऐसे में इन कंपनियों को हो रहे नुकसान की भरपाई करने के लिए कीमतों को बढ़ाना बेहद जरूरी है जिससे मांग में थोड़ी नरमी आए. कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का कहना है कि 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के खत्म होने तक अगर पश्चिम एशिया में कोई शांति बहाली नहीं हुई तो पेट्रोल डीजल की कीमतों में 25-28 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जा सकती है.

कोटक की बात सच हुई और अगर पेट्रोल डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई तो आम लोगों को महंगाई का तगड़ा झटका लग सकता है. डीजल के दामों में बढ़ोतरी से माल ढुलाई महंगी हो सकती है. इससे साग-सब्जी, दूध, आपके रसोई का राशन तो महंगा होगा ही साथ में आपके बच्चों के स्कूल का ट्रांसपोर्ट बिल से लेकर आपके लिए टू-व्हीलर से लेकर कार की सवारी भी महंगी हो सकती है.

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने पेट्रोल डीजल के दामों में बढ़ोतरी होने के संकेत दे दिए. लेकिन जैसा कि आप जानते हैं विधानसभा चुनाव के लिए आज पश्चिम बंगाल में पहले चरण का और तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर मतदान हो रहा है. 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का चुनाव है. ऐसे में जैसे कोटक ही ये रिपोर्ट आई केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय हरकत में आ गई. पेट्रोलियम मंत्रालय ने पेट्रोल डीजल के दामों में बढ़ोतरी की खबरों को फेक न्यूज करार दे दिया. मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, हम ये स्पष्ट करना चाहते हैं कि सरकार के पास पेट्रोल डीजल के दामों में बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है.

मंत्रालय ने कहा, इस प्रकार की खबरों के जरिए नागरिकों के बीच में डर और घबराहट पैदा करने की कोशिश की जा रही है. ऐसी खबरें शरारतपूर्ण और भ्रामक है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा भारत इकलौता ऐसा देश हैं जहां पिछले चार सालों में पेट्रोल डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई गई है. सरकार ने यह भी बताया कि उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कई कदम उठाये गए हैं जिसमें पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 प्रति लीटर की कटौती शामिल है.

हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय ये बताना भूल गया कि बीते पांच वर्षों में कच्चे तेल के दामों में तेज गिरावट और रूस से सस्ते दामों पर कच्चे तेल खरीदने के बावजूद उसने आम लोगों को कोई राहत नहीं दी और इस दौरान पेट्रोल डीजल पर भारी भरकम एक्साइज ड्यूटी लगाकर मोटा राजस्व कमाया. वित्त वर्ष 2020-21 से लेकर 2025-26 के 9 महीने तक केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर एक्साइज ड्यूटी लगाकर 17.81 लाख करोड़ रुपये वसूले हैं. जाहिर है पेट्रोल डीजल सरकार के लिए कामधेनू गाय से कम नहीं रही है. ऐसे में सरकार भले ही फिलहाल वोटरों को लुभाने के लिए दाम नहीं बढ़ाने की बात कर रही है. पर सवाल उठता है क्या सरकार अपने रूख पर कायम रहेगी या नहीं?

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