
कपसाड़ कांड: दबाव पड़ा तब कहीं जाकर प्रशासन ने अगवा लड़की को ढूंढ़ा, आरोपी गिरफ़्तार
Kapsad incident: इस घटना को लेकर शनिवार को पूरे दिन राजनीतिक माहौल गर्म रहा। कई राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता कपसाड़ गांव जाने की कोशिश करने लगे।
Mother murdered and daughter kidnapped in Meerut: एक गांव, एक परिवार और एक रात, जिसने सब कुछ बदल दिया। मेरठ के कपसाड़ गांव में हुई एक दर्दनाक घटना ने न सिर्फ एक मां की जान ले ली, बल्कि पूरे इलाके को गुस्से, डर और राजनीति के तूफान में झोंक दिया। लेकिन कपसाड़ कांड में सवाल सिर्फ अपराध का नहीं है, बल्कि उस प्रशासनिक रवैये का भी है, जिसने शुरुआती दिनों में मामले को दबाए रखने की कोशिश की। पीड़ित परिवार को विपक्षी नेताओं और मीडिया से दूर रखा गया, गांव की सीमाएं सील कर दी गईं और सच तक पहुंचने की हर राह पर पहरा बिठा दिया गया। जब शासन और प्रशासन पर दबाव बना तो तीन दिन बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और अपहृत युवती को सुरक्षित बरामद किया।
मेरठ के कपसाड़ गांव में हुए सनसनीखेज मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले के मुख्य आरोपी पारस सोम को पुलिस ने शनिवार देर शाम गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही मेरठ और सहारनपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अपहृत युवती रूबी को हरिद्वार से सुरक्षित बरामद कर लिया गया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी से पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि पूरी घटना कैसे और किन लोगों की मदद से हुई।
क्या है पूरा मामला?
गुरुवार को कपसाड़ गांव में सुनीता नाम की महिला की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद आरोपी पारस सोम ने अपने साथियों के साथ सुनीता की बेटी रूबी का अपहरण कर लिया था। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और लगातार दो दिनों तक हंगामा चलता रहा।
राजनीतिक दलों का विरोध-प्रदर्शन
इस घटना को लेकर शनिवार को पूरे दिन राजनीतिक माहौल गर्म रहा। कई राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता कपसाड़ गांव जाने की कोशिश करने लगे, लेकिन पुलिस ने हालात बिगड़ने से रोकने के लिए सभी सीमाओं को सील कर दिया।
सपा सांसद रामजी लाल सुमन और विधायक अतुल प्रधान को काशी टोल प्लाजा पर पुलिस ने रोक लिया। इस दौरान पुलिस और नेताओं के बीच धक्कामुक्की और तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद दोनों वहीं धरने पर बैठ गए।
वहीं, आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद भी गाजियाबाद से बाइक पर सवार होकर काशी टोल पहुंचे, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे नहीं जाने दिया। उनके साथ भी धक्का-मुक्की हुई और बाद में उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ धरना-प्रदर्शन किया। विधायक अतुल प्रधान की पत्नी और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान को भी सिवाया टोल प्लाजा पर रोक लिया गया। इस दौरान उनकी भी पुलिस से कहासुनी हुई।
कांग्रेस नेताओं को भी रोका गया
पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम, राष्ट्रीय सचिव प्रदीप नरवाल और सांसद तनुज पूनिया को भी काशी टोल प्लाजा पर रोक दिया गया। इन नेताओं ने करीब तीन घंटे तक धरना दिया।
भाजपा नेताओं ने परिजनों से की मुलाकात
दूसरी तरफ पूर्व विधायक संगीत सोम और भाजपा नेता सुनील भराला गांव पहुंचे और मृतका सुनीता के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

