
ट्विशा मौत मामले की जांच तेज, सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही एसआईटी
भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में एसआईटी ने तेज की कार्रवाई, फरार वकील पति की तलाश जारी और कोर्ट ने जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा।
Twisha Sharma Suspicious Death : भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में रहने वाली 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस के हाथ एक महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज लगा है, जिसके आधार पर विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच तेज कर दी है। इस वीडियो में ट्विशा मौत से ठीक पहले अपने ससुराल की सीढ़ियां चढ़कर छत की तरफ जाती हुई दिखाई दे रही हैं। इसके कुछ ही देर बाद, उनके वकील पति समर्थ सिंह सहित तीन अन्य पुरुष उन्हें प्राथमिक उपचार (CPR) देकर होश में लाने की नाकाम कोशिश करते और फिर उनके शव को नीचे की मंजिल पर ले जाते नजर आ रहे हैं। इस फुटेज में मृतका की सास भी घटनास्थल पर मौजूद दिख रही हैं, जिससे एसआईटी अब पूरी घटना की टाइमलाइन का मिलान कर रही है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में मृतका के पति समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह (सेवानिवृत्त जज) के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज है। घटना के बाद से ही फरार आरोपी पति की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
अदालत में जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित
इस मामले ने उस वक्त कानूनी मोड़ ले लिया जब आरोपी समर्थ सिंह की तरफ से स्थानीय अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई।
बचाव पक्ष के दावे: दाखिल की गई अर्जी में दावा किया गया है कि ट्विशा का मनोचिकित्सकीय इलाज और काउंसलिंग चल रही थी। इसके साथ ही उन पर कुछ चिकित्सीय और व्यवहारिक बदलावों के आरोप भी लगाए गए हैं।
अदालत की कार्रवाई: स्थानीय अदालत ने सोमवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद समर्थ सिंह की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले, कोर्ट उनकी मां गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दे चुका है।
पुलिस की सख्त कानूनी कार्रवाई जारी
मिसरोद के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) और एसआईटी प्रमुख रजनीश कश्यप के मुताबिक, एम्स (AIIMS) भोपाल की प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी के चलते दम घुटना सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही बचाव पक्ष की ओर से जमानत अर्जी में मृतका के स्वास्थ्य और व्यवहार को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन एसआईटी पूरी तरह से एफआईआर (FIR) में दर्ज धाराओं, सीसीटीवी साक्ष्यों और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर ही अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है। फरार आरोपी की तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
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