
डिजिटल अरेस्ट का खौफ :15 करोड़ की ठगी और 700 खातों का चक्रव्यूह
ग्रेटर कैलाश के बुजुर्ग दंपती को 17 दिन तक वीडियो कॉल पर रखा बंधक। ठगी की रकम को 700 खातों में घुमाया, पुलिस ने बचाए 1.90 करोड़। पढ़ें पूरी इनसाइड स्टोरी।
Digital Arrest : सोचिए, आप अपने ही घर में बैठे हों, न दरवाजे पर ताला है और न ही बाहर कोई पहरेदार, फिर भी आप 'कैद' हैं। डर ऐसा कि आप किसी को फोन तक नहीं कर सकते। दिल्ली के ग्रेटर कैलाश (GK) में रहने वाले एक NRI बुजुर्ग डॉक्टर दंपती के साथ ठीक ऐसा ही हुआ। साइबर ठगों ने उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर ऐसा डराया कि उनकी जीवन भर की कमाई पूरे 14.85 करोड़ रुपये ठग ली।हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में 1.90 करोड़ रुपये फ्रीज करने में सफलता पाई है, लेकिन इस केस की परतें जितनी खुल रही हैं, पुलिस भी उतनी ही हैरान है।
17 दिन, वीडियो कॉल और खौफ का साया
शिकार बने 79 वर्षीय डॉ. ओम तनेजा और उनकी 77 वर्षीय पत्नी डॉ. इंदिरा तनेजा। ठगों ने 24 दिसंबर से 9 जनवरी तक, यानी पूरे 17 दिनों तक उन्हें एक अदृश्य जेल में रखा। कहानी शुरू हुई एक फोन कॉल से। ठगों ने खुद को TRAI का और बड़ी जांच एजेंसियों का अधिकारी बताया। कहा गया "आपके आधार और बैंक खाते से गैरकानूनी काम हो रहे हैं। आप पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस है।" बुजुर्ग दंपती घबरा गए। इसके बाद शुरू हुआ वीडियो कॉल का खेल। उन्हें कैमरा ऑन रखकर घर में ही बैठने को मजबूर किया गया। डराया गया कि अगर किसी से बात की या घर से निकले, तो सीधे जेल होगी। डर के मारे कांपते हुए डॉक्टर दंपती ने वो किया जो ठग चाहते थे अपनी मेहनत की कमाई उनके हवाले कर दी।
700 खातों का मकड़जाल : पुलिस को घुमाने की थी
पूरी तैयारीजब पुलिस ने पैसों का पीछा (Money Trail) करना शुरू किया, तो उनके सामने एक बेहद जटिल नेटवर्क था। ठगों ने पुलिस को चकमा देने के लिए 'म्यूल अकाउंट्स' (किराये के बैंक खाते) का एक विशाल जाल बुना था।
पहला पड़ाव: डॉक्टर के खाते से पैसा निकलते ही गुजरात, असम, पश्चिम बंगाल, यूपी, महाराष्ट्र और दिल्ली के 7 प्राइमरी खातों में गया।
दूसरा पड़ाव: यहाँ से पैसा रुकने के बजाय, तुरंत बिजली की रफ्तार से 200 से 300 अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
कुल खाते: जांच में पता चला कि पैसे को ट्रेस होने से बचाने के लिए 700 से ज्यादा खातों में घुमाया गया।
गुवाहाटी से गुजरात तक तार
दिल्ली पुलिस की जांच में पैसों की आवाजाही का चौंकाने वाला रूट सामने आया है:
26 दिसंबर: 1.99 करोड़ रुपये असम के गुवाहाटी भेजे गए।
29-30 दिसंबर: 4 करोड़ रुपये गुजरात के वडोदरा ट्रांसफर हुए।
जनवरी की शुरुआत: पैसा दिल्ली के मयूर विहार और मुंबई के नेपियन सी रोड जैसे इलाकों के खातों में भी पहुँचा।
पुलिस और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) ने दिन-रात एक कर इन खातों को ट्रैक किया और अंततः 1.90 करोड़ रुपये ब्लॉक करने में कामयाबी हासिल की। हालांकि, मुख्य आरोपी अभी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं, लेकिन शिकंजा कसा जा रहा है।
जरूरी बात: आप कैसे बचें?
(Digital Arrest जैसी कोई चीज नहीं होती) यह खबर सिर्फ एक जानकारी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। साइबर अपराधी अब तकनीकी नहीं, बल्कि 'मनोवैज्ञानिक खेल' (Mind Games) खेल रहे हैं।
दिमाग में बिठा लें: भारतीय कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' नाम की कोई चीज नहीं है। कोई भी पुलिस, सीबीआई या ईडी आपको वीडियो कॉल पर अरेस्ट नहीं करती।
धमकी से न डरें: अगर कोई कहे कि आपके नाम पर ड्रग्स मिले हैं या मनी लॉन्ड्रिंग हुई है, तो समझ जाइए वह फ्रॉड है।
कॉल काटें: ऐसे वीडियो कॉल पर बने रहने की जरूरत नहीं है। तुरंत फोन काटें।
रिपोर्ट करें: डरे नहीं, बल्कि तुरंत 1930 (साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर कॉल करें।डॉक्टर तनेजा के साथ जो हुआ, वह दुखद है, लेकिन सतर्क रहकर हम और आप अगला शिकार बनने से बच सकते हैं।

