Blinkit पर दिल्ली पुलिस की FIR: ऑनलाइन बिक रहे थे अवैध और घातक चाकू
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Blinkit पर दिल्ली पुलिस की FIR: ऑनलाइन बिक रहे थे अवैध और घातक चाकू

हत्या के आरोपियों के खुलासे के बाद पुलिस ने खुद ग्राहक बनकर पकड़ा ब्लिंकिट का सच। डार्क स्टोर्स पर छापेमारी में जब्त हुए नियमों के खिलाफ बिक रहे 55 से ज्यादा चाकू।


Police Action Against Blinkit : दिल्ली में ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट (Blinkit) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पश्चिमी दिल्ली में हुए दो अलग-अलग मर्डर केस की जांच के दौरान पुलिस के हाथ चौंकाने वाले सुराग लगे हैं। गिरफ्तार आरोपियों ने कबूल किया कि हत्या में इस्तेमाल किए गए "बटन नाइफ" उन्होंने ब्लिंकिट ऐप से ऑर्डर किए थे। इस खुलासे ने दिल्ली पुलिस के होश उड़ा दिए और तुरंत कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस ने खुद ग्राहक बनकर चाकू का ऑर्डर दिया। जब डिलीवरी मिली और चाकू का माप लिया गया, तो वह तय कानूनी सीमा से कहीं अधिक बड़ा और घातक निकला। इसके बाद पुलिस ने दिल्ली के कई डार्क स्टोर्स पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस कार्रवाई में 55 से ज्यादा अवैध चाकू जब्त किए गए हैं, जो खुलेआम 699 रुपये में बेचे जा रहे थे।


पुलिस ने बिछाया जाल और पकड़ा सच
वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी के अनुसार मर्डर केस की तफ्तीश के दौरान जब आरोपियों ने ब्लिंकिट का नाम लिया, तो पुलिस ने इसकी पुष्टि के लिए जाल बिछाया। एक पुलिसकर्मी ने खुद ग्राहक बनकर ऐप से वही चाकू मंगवाया। ऑर्डर मिलने के बाद जब उसकी जांच की गई, तो वह अवैध पाया गया। सरकारी नियमों के मुताबिक, ऑनलाइन केवल वही चाकू बेचे जा सकते हैं जिनकी ब्लेड 7.62 सेमी लंबी और 1.72 सेमी चौड़ी हो। लेकिन पुलिस को मिले चाकू की लंबाई 8 सेमी और चौड़ाई 2.5 सेमी थी। यह आर्म्स एक्ट (Arms Act) के तहत सीधे तौर पर अपराध की श्रेणी में आता है।

डार्क स्टोर्स पर छापेमारी और बरामदगी
इस प्रमाण के मिलते ही दिल्ली पुलिस ने ब्लिंकिट के विभिन्न डार्क स्टोर्स पर छापा मारा। पुलिस ने अब तक 55 से अधिक ऐसे चाकू बरामद किए हैं जो सुरक्षा के नजरिए से बेहद खतरनाक हैं। जांच में सामने आया कि ये चाकू न केवल अवैध थे, बल्कि इनका इस्तेमाल अपराधों को अंजाम देने के लिए आसानी से किया जा रहा था। इस कार्रवाई ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स पर बिकने वाले प्रोडक्ट्स की सुरक्षा और उनकी मॉनिटरिंग पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

विवादों से पुराना नाता रहा है ब्लिंकिट का
यह पहली बार नहीं है जब ब्लिंकिट चर्चा में आया है। पिछले महीने ही कंपनी अपनी "10 मिनट डिलीवरी" की नीति को लेकर विवादों में थी। विशेषज्ञों और यूनियन का कहना था कि इतनी तेज डिलीवरी का दबाव राइडर्स की जान जोखिम में डालता है। तेलंगाना और अन्य राज्यों के वर्कर यूनियंस ने इसके खिलाफ प्रदर्शन की चेतावनी भी दी थी। उनकी मांग थी कि डिलीवरी के लिए समय की सख्त पाबंदियां हटाई जाएं और बेहतर वेतन सुनिश्चित किया जाए।

सरकार की सख्ती और बदलती टैगलाइन
जनवरी में केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट जैसी कंपनियों के साथ बैठक की थी। सरकार ने साफ कर दिया था कि मुनाफे से पहले डिलीवरी पार्टनर्स और नागरिकों की सुरक्षा होनी चाहिए। इस दबाव के बाद ब्लिंकिट ने अपनी चर्चित टैगलाइन बदल दी। पहले कंपनी "10 मिनट में डिलीवरी" का दावा करती थी, जिसे अब बदलकर "30,000+ प्रोडक्ट्स आपके दरवाजे पर" कर दिया गया है। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कंपनी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।


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