ISI-Khalistani Module : दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े अंतरराज्यीय टेरर और जासूसी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह मॉड्यूल पाकिस्तान स्थित आईएसआई (ISI) और प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) के गुर्गों के सीधे संपर्क में था। पुलिस ने इनके पास से 9 सोलर पावर सीसीटीवी कैमरे बरामद किए हैं। ये कैमरे महत्वपूर्ण सुरक्षा और सैन्य प्रतिष्ठानों के पास चोरी-छिपे लगाए गए थे ताकि उनकी लाइव फीड सीधे पाकिस्तान भेजी जा सके। गिरफ्तार आरोपियों में से 8 पंजाब और 3 दिल्ली के रहने वाले हैं। इनके पास से भारी मात्रा में अवैध हथियार और कारतूस भी बरामद हुए हैं। पुलिस की इस मुस्तैदी से देश के संवेदनशील ठिकानों पर होने वाले संभावित ग्रेनेड हमलों और बड़ी आतंकी साजिश को टाल दिया गया है। यह नेटवर्क न केवल जासूसी कर रहा था, बल्कि हथियारों की तस्करी के जरिए आतंकी गतिविधियों के लिए फंड भी जुटा रहा था।
दो चरणों में चला स्पेशल सेल का बड़ा ऑपरेशन
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) से मिले इनपुट के आधार पर दो अलग-अलग ऑपरेशन चलाए। पहले ऑपरेशन में एनडीआर (NDR) की टीम ने दिल्ली और पंजाब से 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनके पास से 9 हाई-टेक सोलर सीसीटीवी कैमरे मिले हैं। ये कैमरे अंबाला, जालंधर, पठानकोट और बीकानेर जैसे संवेदनशील इलाकों में लगाए गए थे। इन कैमरों की फीड एक मोबाइल ऐप के जरिए सीधे सीमा पार बैठे हैंडलर्स को मिल रही थी। आरोपियों के पास से 3 विदेशी पिस्तौल और एक देसी कट्टा बरामद किया गया है।
सेना के कैंपों की रेकी और वीडियो शेयरिंग
दूसरे ऑपरेशन में एसडब्ल्यूआर (SWR) टीम ने पंजाब से 5 जासूसों को गिरफ्तार किया। ये आरोपी आर्मी और बीएसएफ (BSF) के कैंपों की रेकी कर रहे थे। ये लोग संवेदनशील ठिकानों के फोटो और वीडियो बनाकर एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए पाकिस्तान भेज रहे थे। पूछताछ में खुलासा हुआ कि पाकिस्तानी हैंडलर्स इन्हें ड्रग्स और हथियारों की तस्करी से मिले पैसों का लालच देकर भर्ती करते थे। इनका मुख्य मकसद सुरक्षा बलों की आवाजाही पर नजर रखना और भविष्य में धमाकों के लिए सटीक जानकारी जुटाना था।
हथियारों की तस्करी से टेरर फंडिंग
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस मॉड्यूल को चलाने के लिए यूपीआई (UPI) के जरिए फंड ट्रांसफर किया जा रहा था। हथियार तस्करी से होने वाली कमाई का एक हिस्सा आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल होता था। गिरफ्तार आरोपी मनप्रीत सिंह ने खुलासा किया कि उसने अब तक 7 विदेशी पिस्तौल और 56 कारतूस डिलीवर किए हैं। उसने जासूसी के लिए फर्जी आईडी पर सिम कार्ड भी अरेंज किए थे।
पढ़े लिखे युवा भी बने आईएसआई का मोहरा हैरानी की बात यह है कि इस जासूसी नेटवर्क में उच्च शिक्षित युवा भी शामिल थे। गिरफ्तार आरोपियों में अतुल राठी और रोहित के पास बिजनेस में मास्टर डिग्री है। अतुल ने अपनी पढ़ाई न्यूजीलैंड से पूरी की है। वहीं, अन्य आरोपी दीवार पर वॉलपेपर लगाने, खेती करने या डीजे चलाने का काम करते थे। ये सभी आरोपी पाकिस्तानी हैंडलर्स के बहकावे में आकर देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। पुलिस ने इनके पास से 24 मोबाइल फोन, दो चार पहिया वाहन और दो बाइक भी जब्त की हैं।