
गाजियाबाद से खुलेगा पाकिस्तान का टेरर नेटवर्क, 22 गिरफ्तार
गाजियाबाद पुलिस ने कौशांबी से चल रहे एक बड़े जासूसी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। पाकिस्तान के इशारे पर सैन्य ठिकानों की रेकी और लाइव स्ट्रीमिंग की रची गई थी साजिश।
Suspected Terror Module From Ghaziabad : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित कौशांबी थाना क्षेत्र से शुरू हुई एक 'संदिग्ध गतिविधि' की जांच ने अब देश की सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। 14 मार्च को मिली एक खुफिया जानकारी के बाद पुलिस ने जब भोवापुर इलाके में छापेमारी की, तो पता चला कि यह केवल कुछ युवाओं की आवारागर्दी नहीं, बल्कि पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स द्वारा संचालित एक सुनियोजित जासूसी नेटवर्क है। इस मॉड्यूल का मुख्य काम भारतीय सैन्य ठिकानों, रेलवे स्टेशनों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की तस्वीरें और वीडियो सीमा पार भेजना था। अब तक इस मामले में 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें कई महिलाएं और नाबालिग भी शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क महज जासूसी नहीं, बल्कि एक बड़े आतंकी हमले की तैयारी कर रहा था।
सोलर सीसीटीवी कैमरों से लाइव स्ट्रीमिंग की साजिश
विशेष जांच दल (SIT) की पड़ताल में सबसे चौंकाने वाला खुलासा 'लाइव स्ट्रीमिंग' को लेकर हुआ है। यह मॉड्यूल दिल्ली-जम्मू रेलवे कॉरिडोर पर सोलर ऊर्जा से चलने वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना पर काम कर रहा था। इनका मकसद भारतीय सेना की मूवमेंट की सीधी फीड पाकिस्तान में बैठे आकाओं को देना था। दिल्ली कैंट और हरियाणा के सोनीपत में ऐसे कैमरे पहले ही लगाए जा चुके थे, जिन्हें बरामद कर लिया गया है। जांचकर्ताओं का मानना है कि उनकी लिस्ट में देश भर के करीब 50 महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान शामिल थे।
पाकिस्तान से जुड़े हैं नेटवर्क के तार
SIT की पूछताछ में इस पूरे ऑपरेशन का कमांड स्ट्रक्चर सामने आया है। इस नेटवर्क को पाकिस्तान से सुहेल मलिक, नौशाद अली और समीर उर्फ शूटर हैंडल कर रहे थे। ये हैंडलर्स सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए युवाओं को भर्ती करते थे। गिरफ्तार किए गए 6 आरोपियों में से 4 पहले ही जम्मू-कश्मीर के पुलवामा की यात्रा कर चुके थे, जहाँ उन्होंने संवेदनशील जानकारी जुटाई थी। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि यह नेटवर्क घाटी में एक और बड़े आत्मघाती हमले की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा था।
भर्ती का तरीका और 'हनीट्रैप' का इस्तेमाल
इस नेटवर्क ने भर्ती के लिए उन युवाओं को निशाना बनाया जिनके पास तकनीकी कौशल था, जैसे सीसीटीवी मैकेनिक या मोबाइल रिपेयरिंग का काम करने वाले। उन्हें एक असाइनमेंट के बदले 5,000 से 20,000 रुपये तक दिए जाते थे। शक कम करने के लिए महिलाओं और नाबालिगों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस नेटवर्क में 'इरम उर्फ महक' नाम की महिला को मुख्य रिक्रूटर के रूप में पहचाना गया है। वहीं, मथुरा से गिरफ्तार मीरा नाम की ई-रिक्शा चालक महिला का संबंध पाकिस्तान के सरफराज उर्फ सरदार से मिला है।
ओटीपी और सिम सप्लाई का समानांतर खेल
जांच में एक और खतरनाक पहलू 'ओटीपी और सिम सप्लाई रैकेट' का सामने आया है। आरोपी भारतीय सिम कार्ड्स के ओटीपी विदेश भेजते थे, जिससे पाकिस्तानी हैंडलर्स भारतीय नंबरों पर वॉट्सऐप और टेलीग्राम अकाउंट चला सकें। पैसे के लेन-देन के लिए जन सेवा केंद्रों और छोटे दुकानदारों के खातों का इस्तेमाल किया जाता था ताकि मुख्य आरोपियों तक पुलिस न पहुँच सके। फिलहाल एनआईए (NIA), एटीएस (ATS) और दिल्ली-हरियाणा पुलिस मिलकर समीर उर्फ शूटर की तलाश कर रही है, जो इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
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