गाजियाबाद सुसाइड केस: 3 बहनों की मौत में डिजिटल विड्रॉल का खौफनाक एंगल
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गाजियाबाद सुसाइड केस: 3 बहनों की मौत में 'डिजिटल विड्रॉल' का खौफनाक एंगल

गाजियाबाद केस की फॉलो-अप जांच में बड़ा खुलासा। 3 सगी बहनों से शादी करने वाले पिता के घर में था भारी तनाव। कोरियन ऐप्स से दूरी बनी सुसाइड का मुख्य ट्रिगर।


Ghaziabad Three Sisters Suicide : गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की सामूहिक आत्महत्या के मामले में अब चौंकाने वाली परतें खुल रही हैं। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि यह केवल एक घरेलू विवाद नहीं था। यह मामला एक गहरे मनोवैज्ञानिक संकट और परिवार के अजीबोगरीब ढांचे से जुड़ा है। जाँच अधिकारियों ने पाया कि लड़कियां 'डिजिटल विड्रॉल' का शिकार थीं। उनके लिए कोरियन ऐप्स और ऑनलाइन दोस्त ही असली दुनिया बन चुके थे। जब पिता ने कर्ज चुकाने के लिए उनके मोबाइल बेचे, तो उनका मानसिक संतुलन पूरी तरह डगमगा गया। अब पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या पिता की तीन शादियों (जो आपस में सगी बहनें हैं) ने घर के माहौल को इतना बोझिल बना दिया था कि बेटियों ने अपनी मांओं से दूरी बना ली।


डिजिटल विड्रॉल सिंड्रोम: क्या वर्चुअल दुनिया ही बनी काल?

साइबर विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों की टीम इस केस में एक नए एंगल से काम कर रही है। जांच में पता चला है कि तीनों बहनें दिन के 12 से 14 घंटे कोरियन एंटरटेनमेंट और ऑनलाइन गेमिंग में बिताती थीं। पुलिस के अनुसार, जब मोबाइल फोन छीने गए, तो लड़कियों के व्यवहार में भारी बदलाव आया था। वे 'डिजिटल विड्रॉल' (Digital Withdrawal) का शिकार हो गई थीं। उनके लिए अपनी पहचान केवल उन विदेशी दोस्तों तक सीमित थी, जिनसे वे संपर्क नहीं कर पा रही थीं। घटना वाली रात जब वे मां के फोन से उन ऐप्स को नहीं खोल पाईं, तो उन्हें लगा कि उनकी पूरी पहचान खत्म हो गई है।


तीन पत्नियों का रहस्य: घर की बंद दीवारों के पीछे का सच

पुलिस ने अब चेतन गुर्जर की तीनों पत्नियों सुजाता, हीना और टीना के बयान दर्ज किए हैं। जांच में पुष्टि हुई है कि ये तीनों सगी बहनें हैं और एक ही छत के नीचे रहती हैं। पड़ोसियों ने बताया कि घर के अंदर का माहौल हमेशा तनावपूर्ण रहता था। चेतन स्टॉक मार्केट में करोड़ों के घाटे के कारण अक्सर हिंसक व्यवहार करता था। सुसाइड नोट में किसी भी मां का जिक्र न होना इस बात की पुष्टि करता है कि घर में संवादहीनता (Communication Gap) चरम पर थी। लड़कियां अपनी मांओं को अपना रक्षक नहीं मानती थीं, जिससे वे पूरी तरह अपने पिता और इंटरनेट पर निर्भर हो गईं।


आर्थिक तंगी और 2 करोड़ का कर्ज: मौत का ट्रिगर

जांच में यह भी साफ हुआ है कि चेतन ने केवल बिजली बिल भरने के लिए ही मोबाइल नहीं बेचे थे। उस पर कई लेनदारों का भारी दबाव था। स्टॉक ब्रोकर होने के नाते उसने बाजार से मोटा पैसा उठाया था। जब उसे कहीं से राहत नहीं मिली, तो उसने बच्चों की पढ़ाई और उनके फोन पर पाबंदी लगाना शुरू कर दिया। पुलिस अब चेतन के बैंक खातों और कर्ज के लेन-देन की फाइलें खंगाल रही है। यह जांचा जा रहा है कि क्या कर्जदारों की धमकी से डरकर लड़कियों ने इतना बड़ा कदम उठाया या यह पूरी तरह मानसिक तनाव का नतीजा था।


फॉरेंसिक रिपोर्ट: क्या सुसाइड के पीछे कोई 'ऑनलाइन चैलेंज' था?

फॉरेंसिक टीम को लड़कियों के कमरे से कुछ ऐसी डायरियां मिली हैं, जिनमें कोरियन भाषा में कुछ शब्द लिखे हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या वे किसी ऐसे ऑनलाइन 'डेथ चैलेंज' का हिस्सा तो नहीं थीं, जो डार्क वेब या गुप्त गेमिंग रूम्स में चलता है। उनके पुराने इंटरनेट लॉग्स को रिकवर करने की कोशिश की जा रही है। अगर यह साबित होता है कि किसी बाहरी ऑनलाइन संपर्क ने उन्हें सुसाइड के लिए उकसाया, तो यह केस पूरी तरह बदल सकता है।

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