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MP में RTE घोटाला: स्कूलों में गरीब बच्चों का फर्जी एडमिशन दिखाकर लाखों का गबन

EOW की कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि RTE नियमों का उल्लंघन गंभीर अपराध माना जाएगा। अब जांच के आधार पर आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और सजा का रास्ता खुला है।


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Jabalpur RTE scam: सरकारी फंडों में हेरफेर का ऐसा खेल, जिसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। 6 स्कूलों और 5 अधिकारियों ने फर्जी दाखिले दिखाकर 26 लाख रुपये का गबन किया। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने अब इसे पकड़ लिया है और कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोप है कि इन लोगों ने एक ही छात्र का कई बार दाखिला दिखाकर सरकारी फीस की रकम में हेरफेर किया।

जबलपुर में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्राइवेट स्कूलों में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। EOW ने अब इस मामले में 6 स्कूल संचालकों और 5 नोडल अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। जांच में पता चला है कि यह घोटाला 2011 से 2016 के बीच हुआ। शिकायत मिली थी कि कुछ स्कूल संचालक RTE नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। शिक्षा के अधिकार के तहत, प्राइवेट स्कूलों को अपनी कुल सीटों का 25% हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर और गरीबी रेखा से नीचे वाले बच्चों के लिए मुफ्त रखना होता है। इसके बदले सरकार स्कूलों को फीस देती है।

6 स्कूलों ने 26.50 लाख रुपये का गबन

जांच में खुलासा हुआ कि जबलपुर के 466 प्राइवेट स्कूलों को 3 करोड़ 27 लाख 83 हजार रुपये फीस प्रतिपूर्ति के तौर पर दिए गए थे। लेकिन इनमें से 6 स्कूलों ने 628 छात्रों का फर्जी दाखिला दिखाकर करीब 26.50 लाख रुपये का गबन किया।

आरोपितों के नाम और कार्रवाई

EOW ने निम्नलिखित स्कूल संचालकों और नोडल अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और आपराधिक साजिश जैसे मामलों में केस दर्ज किया है। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।

1. स्मिता चिल्ड्रन एकेडमी– संचालक: मनीष असाटी, नोडल अधिकारी: चंद्र कोष्टा

2. अशासकीय आदर्श ज्ञान सागर शिक्षा शाला– संचालक: श्रीमती नसरीन बेगम, नोडल अधिकारी: गुल निगार खान

3. गुरू पब्लिक स्कूल– संचालक: मो. तौफिक, नोडल अधिकारी: अख्तर बेगम

4. अस्मानिया मिडिल स्कूल– संचालक: मो. शमीम, नोडल अधिकारी: राजेंद्र बुधौलिया

5. सेंट अब्राहम स्कूल– संचालक: मोहम्मद शफीक, नोडल अधिकारी: डीके मेहता

अब आगे क्या?

EOW की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि RTE नियमों का उल्लंघन गंभीर अपराध माना जाएगा। अब जांच के आधार पर आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और सजा का रास्ता खुला है।

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