कानपुर किडनी रैकेट: OT टेक्नीशियन ने यूरोलॉजिस्ट बनकर ट्रांसप्लांट की 40-50 किडनी
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कानपुर के अस्पताल किडनी रैकेट की जांच के दायरे में हैं (AI से बना चित्र)

कानपुर किडनी रैकेट: OT टेक्नीशियन ने यूरोलॉजिस्ट बनकर ट्रांसप्लांट की 40-50 किडनी

जांचकर्ताओं का कहना है कि मुदस्सर के पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं थी और उस पर 40-50 किडनी ट्रांसप्लांट करने का आरोप है।


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कानपुर पुलिस की अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है — एक ऑपरेशन थिएटर (OT) मैनेजर ने खुद को यूरोलॉजिस्ट बताकर हाल ही में कई ट्रांसप्लांट किए।

पुलिस के अनुसार, OT मैनेजर मुदस्सर अली के संबंध डॉ. रोहित, शिवम अग्रवाल और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ से थे। आरोप है कि उसने एक MBA छात्र से किडनी निकालकर एक महिला में प्रत्यारोपित की।

जांचकर्ताओं का कहना है कि मुदस्सर के पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं थी और उस पर 40-50 किडनी ट्रांसप्लांट करने का आरोप है।

पुलिस जांच में नए सुराग भी सामने आए हैं, जिनमें एक विदेशी महिला की कथित संलिप्तता और ट्रांसप्लांट के दौरान एक महिला की मौत शामिल है। इन पहलुओं की फिलहाल जांच चल रही है, जिससे इस अवैध किडनी रैकेट की जांच और गहरी हो गई है।

पुलिस की एक टीम दिल्ली के उत्तम नगर स्थित उसके फ्लैट पर गई, जहां उसकी पत्नी ने उसे OT मैनेजर बताया। पुलिस ने कहा कि वे मुदस्सर की सक्रिय रूप से तलाश कर रहे हैं।

गिरफ्तार OT टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार ने पुलिस को बताया कि मुदस्सर उनके साथ दिल्ली से कानपुर फ्लाइट से गया था और उसने ही सर्जरी की, जिसमें MBA छात्र से किडनी निकालकर रिसीवर में ट्रांसप्लांट की गई।

दोनों मरीजों को बाद में अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया।

पुलिस ने बताया कि मुदस्सर ने पिछले साल दिसंबर में कानपुर के कल्याणपुर क्षेत्र के मस्वानपुर इलाके में स्थित मेडीलाइफ अस्पताल में भी एक किडनी ट्रांसप्लांट किया था। जब पुलिस अस्पताल पहुंची, तो वह बंद मिला और घोटाले के सामने आने के बाद उसका मालिक फरार हो गया।

जांचकर्ताओं के अनुसार, मेडीलाइफ अस्पताल तीन डॉक्टरों की साझेदारी में चल रहा था — कन्नौज के तिर्वा के डॉ. रोहन, सौरिख के डॉ. संदीप और औरैया के डॉ. नरेंद्र। पुलिस ने बताया कि घोटाला सामने आने के बाद तीनों गायब हैं और कानपुर व उनके गृह जिलों में उनके घर बंद मिले। पुलिस को अवैध ट्रांसप्लांट में उनकी संलिप्तता का शक है।

पुलिस टीमों ने बताया कि फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए कानपुर और मेरठ में मिली जानकारी के आधार पर लगातार छापेमारी की जा रही है और जांच आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।

डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि रावतपुर स्थित निजी अस्पतालों में अवैध किडनी कारोबार के मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बाकी आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी है।

कैसे खुला मामला?

पहली बार ये मामला उस वक्त खुला, जब बिहार के आयुष को गेम एप से फंसाया गया। उसकी किडनी डोनेट कराने के बाद तय रकम से 50 हजार रुपए कम दिए गए। इस पर आयुष ने शिकायत कर दी और पूरा मामला खुल गया। कानपुर के CMO हरिदत्त नेमी ने आहूजा हॉस्पिटल सील कर दिया। हॉस्पिटल के मालिक पति-पत्नी समेत 9 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। 6 आरोपी अभी फरार हैं। जिन्हें अरेस्ट किया गया,

किडनी ट्रांसप्लांट केस के मुख्य आरोपियों में डॉ. प्रीति आहूजा है। जिस आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट होता था, डॉ. प्रीति उसकी मालकिन है। प्रीति MBBS, MD (मेडिसिन) है। वह हार्ट पेशेंट्स देखती थी। 5 मंजिला इस हॉस्पिटल में 35 बेड हैं। अमूमन वो अपने हॉस्पिटल में कम बैठती थी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की कानपुर यूनिट में उपाध्यक्ष है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में मेडिकल ऑफिसर है।

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